पटना. भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज ईशान किशन आज जिस मुकाम पर हैं, उसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत के साथ परिवार का बड़ा त्याग और मुश्किल वक्त में मिला भावनात्मक सहारा भी है. एक समय ऐसा भी था, जब ईशान भारतीय टीम से बाहर चल रहे थे. वापसी की राह आसान नहीं दिख रही थी और क्रिकेट करियर को लेकर कई तरह की चुनौतियां थीं. उस दौर में ईशान को उनके माता-पिता ने संभाला. परिवार के साथ भगवद्गीता के श्लोकों ने भी उनका मनोबल बढ़ाया. ईशान ने खुद को फिर से मजबूत किया, घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया और भारतीय टीम में वापसी की.
न्यूज18 से बातचीत में ईशान के पिता प्रणव पांडे और मां सुचित्रा सिंह ने उनके बचपन, क्रिकेट के जुनून, संघर्ष और परिवार से जुड़ी कई दिलचस्प बातें साझा कीं. उनकी बातों से साफ झलकता है कि ईशान का भारतीय टीम तक पहुंचने का सपना बचपन से ही कितना बड़ा था.
दो साल की उम्र में थामा बल्ला, भाई के साथ मैदान में शुरू हुआ सफर
ईशान किशन को क्रिकेट का जुनून बचपन से ही था. उनके पिता प्रणव पांडे बताते हैं कि जब ईशान महज दो साल के थे, तभी पहली बार उनके हाथ में बल्ला आया था. धीरे-धीरे उम्र बढ़ी तो क्रिकेट के प्रति उनका लगाव भी बढ़ता गया. वह अपने बड़े भाई के साथ मैदान में खेलने जाने लगे और कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा दिखाने लगे.
पिता से क्या कहते थे ईशान?
हालांकि, ईशान की पढ़ाई में खास रुचि नहीं थी. इस बात को लेकर उनके माता-पिता परेशान भी रहते थे. बिहार में क्रिकेट के बेहतर अवसरों की कमी के कारण पिता के सामने भी कई सवाल थे. प्रणव पांडे बताते हैं कि एक आम पिता की तरह उनकी इच्छा थी कि बेटा किसी तरह रणजी ट्रॉफी खेल ले और उसकी सरकारी नौकरी लग जाए. लेकिन ईशान के सपने इससे कहीं बड़े थे. वह अक्सर अपने पिता से कहते थे, ‘पापा, आप चिंता मत कीजिए. मुझे बहुत बड़ा खिलाड़ी बनना है और भारतीय टीम में जगह बनानी है.’ आज ईशान की कामयाबी देखकर पिता को बेटे के उस भरोसे और मेहनत पर गर्व है.
ईशान के लिए बड़े भाई ने छोड़ दिया अपना क्रिकेट करियर
ईशान के क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाने में उनके बड़े भाई का योगदान बेहद अहम रहा. पिता प्रणव पांडे बताते हैं कि उनका बड़ा बेटा भी अच्छा क्रिकेटर था, लेकिन उसने महसूस किया कि दोनों भाइयों के एक साथ क्रिकेट खेलने से ईशान के करियर पर असर पड़ सकता है. ऐसे में बड़े भाई ने ईशान के भविष्य के लिए अपने क्रिकेट करियर से पीछे हटने का फैसला किया. पिता के मुताबिक, बड़े बेटे के इस त्याग का फल आज सबके सामने है. उन्होंने खुद भी ईशान के क्रिकेट करियर के लिए अपना बहुत कुछ छोड़ दिया. वहीं, मां सुचित्रा सिंह ने भी हर कदम पर बेटे का साथ दिया और क्रिकेट के सफर में उसकी मदद करती रहीं.
टीम इंडिया में चयन की खबर सुनकर रोने लगे थे माता-पिता
ईशान के माता-पिता के लिए वह पल आज भी यादगार है, जब पहली बार बेटे का चयन भारतीय क्रिकेट टीम में हुआ था. प्रणव पांडे बताते हैं कि इस खुशखबरी की जानकारी सबसे पहले उनकी बहू ने दी थी. जैसे ही उन्हें और उनकी पत्नी को बेटे के चयन की खबर मिली, दोनों की आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े. काफी देर तक दोनों रोते रहे. इसके बाद जब रात में ईशान का फोन आया तो वह अपने चयन को लेकर काफी सहज थे. उन्होंने माता-पिता से कहा कि उन्होंने मेहनत की थी और उसी का फल मिला है. बेटे की इस कामयाबी ने परिवार के वर्षों के संघर्ष और त्याग को एक नई पहचान दी.
मां के हाथ का खाना पसंद, नेनुआ-कद्दू और आलू का चोखा है फेवरेट
ईशान किशन मैदान पर जितने आक्रामक बल्लेबाज हैं, घर में उतने ही मस्तीखोर और शरारती हैं. उनकी मां सुचित्रा सिंह बताती हैं कि ईशान बचपन से ही बेहद शरारती रहे हैं और आज भी उनकी शरारतों में बचपन झलकता है. जब भी वह पटना स्थित घर आते हैं तो पूरे परिवार के साथ खूब धमाल मचाते हैं. खाने-पीने की पसंद की बात करें तो ईशान को मां के हाथ का बना शुद्ध शाकाहारी खाना बेहद पसंद है. खासकर नेनुआ, कद्दू, भिंडी और आलू का चोखा वह बड़े चाव से खाते हैं. उनकी मां बताती हैं कि वह खुद मांसाहार नहीं खाती हैं और ईशान भी उनकी वजह से घर में नॉनवेज नहीं खाते. अगर कभी खाने का मन होता है तो दोस्तों या रिश्तेदारों के यहां खा लेते हैं.
एडम गिलक्रिस्ट हैं फेवरेट, धोनी से भी सीखा बहुत कुछ
ईशान के पसंदीदा क्रिकेटरों में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज एडम गिलक्रिस्ट का नाम सबसे ऊपर है. उनके पिता बताते हैं कि ईशान ने गिलक्रिस्ट को देखकर काफी कुछ सीखा है. वहीं, महेंद्र सिंह धोनी का भी उनके जीवन और क्रिकेट पर खास प्रभाव रहा है. यही वजह है कि ईशान की बल्लेबाजी में आक्रामकता की झलक दिखाई देती है. पिता के मुताबिक, ईशान को तेज गेंदबाजों के सामने खेलने से कभी खास डर नहीं लगा. वह तेज गेंदबाजी के सामने और आक्रामक हो जाते हैं, जबकि स्पिन गेंदबाजी उनके लिए अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण रही है.
भोजपुरी गानों पर बनाते हैं रील्स, वीडियो गेम और फिल्मों के भी शौकीन
क्रिकेट के अलावा ईशान को मनोरंजन का भी खूब शौक है. उनके माता-पिता बताते हैं कि उन्हें भोजपुरी गाने काफी पसंद हैं. पटना आने पर वह भोजपुरी गानों पर जमकर मस्ती करते हैं और परिवार के लोग भी उनके साथ शामिल हो जाते हैं. ईशान भोजपुरी गानों पर रील्स भी बनाते हैं, जिनकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा होती है. ईशान वीडियो गेम खेलने के भी शौकीन हैं. घर आने पर रात में काफी देर तक गेम खेलते हैं. इसके अलावा उन्हें फिल्में और वेब सीरीज देखना भी पसंद है. पिता बताते हैं कि ईशान के पसंदीदा अभिनेता अमिताभ बच्चन हैं और वह उनकी फिल्में बड़े शौक से देखते हैं.
ईशान की शादी को लेकर क्या सोचते हैं माता-पिता?
ईशान की शादी को लेकर भी उनके माता-पिता ने खुलकर बात की. उनका कहना है कि अगले दो-तीन साल में ईशान की शादी करने की योजना है. परिवार ऐसी बहू चाहता है, जो घर-परिवार को संभालने वाली हो और ईशान के क्रिकेट करियर को समझते हुए उनका साथ दे. फिलहाल परिवार ने किसी लड़की को नहीं देखा है और न ही ईशान ने अपनी पसंद के बारे में कुछ बताया है. एक मॉडल के साथ ईशान की तस्वीर वायरल होने को लेकर भी पिता ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं थी. उन्होंने माना कि ईशान की लड़कियों से दोस्ती है, लेकिन परिवार की अपनी पसंद है. हालांकि, उनका कहना है कि आखिरकार बेटे की पसंद भी मायने रखेगी.
माता-पिता का सपना- भारतीय टीम के कप्तान बनें ईशान
ईशान किशन ने भारतीय टीम तक पहुंचने का सपना पूरा कर लिया है, लेकिन उनके माता-पिता का सपना अभी और बड़ा है. वे चाहते हैं कि एक दिन उनका बेटा भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी करे. बेटे के बचपन से लेकर टीम इंडिया तक के सफर को याद करते हुए दोनों को गर्व है कि जिस बच्चे ने दो साल की उम्र में बल्ला थामा था, उसने अपनी मेहनत और परिवार के साथ से देश के लिए खेलने का मुकाम हासिल किया.