Bhai Dooj Katha: भाई दूज पर बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाती हैं, उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं और उन्हें प्यार से खाना खिलाती हैं. भाई भी बहनों को उपहार देकर इस रिश्ते को और खास बनाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भाई दूज पर तिलक लगाने की परंपरा आखिर शुरू कैसे हुई? इसके पीछे एक दिलचस्प धार्मिक कथा जुड़ी है, जिसमें मृत्यु के देवता यमराज और उनकी बहन यमुना का जिक्र मिलता है.
मान्यता है कि एक दिन यमराज अपनी बहन से मिलने उनके घर पहुंचे थे. यमुना ने उनका खास स्वागत किया और इसी मुलाकात से भाई दूज मनाने की परंपरा जुड़ गई.
यमराज और यमुना के बीच था भाई-बहन का खास रिश्ता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यमराज और यमुना सूर्य देव की संतान थे. दोनों भाई-बहन एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे, लेकिन यमराज अपने काम में व्यस्त रहते थे. इस वजह से उनकी बहन यमुना से मुलाकात नहीं हो पाती थी. यमुना अक्सर उन्हें अपने घर आने का न्योता देती थीं. वह चाहती थीं कि उनके भाई कभी उनके घर आएं और उनके साथ कुछ समय बिताएं.
कहा जाता है कि लंबे इंतजार के बाद कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने पहुंचे. बहन को अपने घर आया देखकर यमुना बहुत खुश हुईं. उन्होंने भाई का स्वागत किया और उनके माथे पर तिलक लगाया. इसके बाद आरती उतारी और प्यार से भोजन कराया.
यमराज ने बहन यमुना को कौन-सा वरदान दिया?
यमुना के इस प्रेम और स्वागत से यमराज बहुत प्रसन्न हुए. उन्होंने अपनी बहन से कहा कि वह उनसे कोई भी वरदान मांग सकती हैं. यमुना ने अपने लिए कुछ मांगने के बजाय भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ी एक इच्छा रखी.
लोकप्रिय धार्मिक कथा के अनुसार, यमुना ने वरदान मांगा कि हर साल इसी दिन यमराज उनसे मिलने आएं. साथ ही, जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाए, उसके हाथ से तिलक करवाए और उसके साथ भोजन करे, उसे लंबी उम्र और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिले. यमराज ने अपनी बहन की इच्छा पूरी करने का वचन दिया. इसी मान्यता के साथ कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यम द्वितीया कहा जाने लगा. भाई दूज पर बहन के हाथों तिलक लगवाने और उसके घर भोजन करने की परंपरा को इसी कथा से जोड़ा जाता है.
भाई दूज पर बहन के घर जाकर भोजन करने की है परंपरा
भाई दूज पर सिर्फ तिलक लगाने की रस्म ही खास नहीं होती, बल्कि बहन के घर जाकर उसके हाथों से भोजन करना भी इस त्योहार का अहम हिस्सा माना जाता है. धार्मिक परंपरा में इसे यमराज और यमुना की मुलाकात से जोड़कर देखा जाता है.
कई परिवारों में बहनें भाई को तिलक लगाकर आरती करती हैं और मिठाई खिलाती हैं. भाई अपनी बहन को उपहार देते हैं और उसकी खुशी का ख्याल रखने का वादा करते हैं. अलग-अलग राज्यों में इस त्योहार को मनाने के तरीके और नाम भी अलग हैं. महाराष्ट्र में इसे भाऊबीज, बंगाल में भाई फोंटा और नेपाल में भाई टीका कहा जाता है.
भाई दूज को यम द्वितीया क्यों कहते हैं?
इस त्योहार का एक नाम यम द्वितीया भी है. इसकी वजह कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि और यमराज से जुड़ी धार्मिक कथा है. इसी दिन यमराज के अपनी बहन यमुना के घर जाने की मान्यता है.
कुछ परंपराओं में इस दिन यमुना नदी में स्नान करना भी शुभ माना जाता है. मान्यता है कि भाई-बहन साथ में यमुना स्नान करें तो उन्हें यमराज का आशीर्वाद मिलता है. हालांकि, इन धार्मिक मान्यताओं और अलग-अलग जगहों पर प्रचलित कथाओं में कुछ अंतर भी मिलता है. इसलिए भाई दूज की कथा को धार्मिक परंपरा के रूप में ही समझना चाहिए, न कि किसी ऐतिहासिक घटना के प्रमाण के तौर पर.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)