PNB में कैसे चलता रहा करोड़ों का खेल? एक महीने पहले लग गई थी भनक, फिर भी मैनेजर-कर्मचारी दबाते रहे मामला

PNB में कैसे चलता रहा करोड़ों का खेल? एक महीने पहले लग गई थी भनक, फिर भी मैनेजर-कर्मचारी दबाते रहे मामला


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Greater Noida PNB Fraud Case : ग्रेटर नोएडा के पीएनबी में करीब 35 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी के मामले में हर दिन नए पहलू सामने आते हैं. मगर, हकीकत अभी तक छिपी हुई है. आखिर इन फ्रॉड के पीछे कौन था? अब एक रिपोर्ट में सामने आया है कि इस घोटाले की भनक एक माह पहले ही मैनेजर और कर्मचारियों को लग गई थी. मगर, वो केस दबाने में लगे रहे. 

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ग्रेटर नोएडा के पीएनबी बैंक फ्रॉड केस में बड़ा अपडेट. (सांकेतिक इमेज)

ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा के ऐच्छर गांव स्थित पंजाब नेशनल बैंक ब्रांच में करीब 35 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का मामला हाल ही में सामने आया था. इस मामले में भले ही कई गिरफ्तारियां और नए नए खुलासे हो रहे हों, मगर सच अभी तक छिपा हुआ है. अब इस घोटाले को लेकर बैंक प्रबंधन की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं. कुछ खाताधारकों ने आरोप लगाया है कि करीब एक महीने पहले से ही बैंक मैनेजर से लेकर कर्मचारी इस मामले को दबाने में जुटे हुए थे. बता दें पूरा मामला 16 सितंबर को सामने आया था.

एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार, बैंक के अधिकारी और कर्मचारी कई बार खाताधारकों के घर पहुंचे. उन्होंने लोगों से पुलिस में शिकायत नहीं करने की अपील की और भरोसा दिया कि उनका पूरा पैसा जल्द वापस कर दिया जाएगा. पीड़ितों का आरोप है कि अगर खाताधारक खुद सामने आकर फर्जी लेनदेन की शिकायत नहीं करते तो बैंक इस मामले को साइबर फ्रॉड बताकर टालने की कोशिश कर रहा था. इस मामले में अब आशुतोष पाठक की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. बताया जा रहा है कि आशुतोष और बैंक कर्मचारी दीपांशी के बीच करीबी संबंध थे. आरोप है कि खाताधारकों की एफडी तोड़कर निकाली गई ज्यादातर रकम आशुतोष के बैंक खातों में भेजी गई.

चर्चा है कि शुरुआत में आशुतोष ने कारोबार शुरू करने के नाम पर दीपांशी से पैसे उधार लिए थे. उसने मोटा मुनाफा कमाने और जल्द पैसे लौटाने का भरोसा दिया. इसके बाद वह लगातार दीपांशी से रकम लेता रहा. आरोप है कि दीपांशी ने खाताधारकों की एफडी तोड़कर यह पैसा आशुतोष तक पहुंचाया. धीरे-धीरे यह मामला बढ़ता गया और करोड़ों रुपये तक पहुंच गया.

50 लाख में से 35 लाख गायब

एक फैक्ट्री मालिक ने बताया कि उनके बैंक खाते में करीब 50 लाख रुपये जमा थे. आरोप है कि यह पूरी रकम निकालकर आशुतोष के खाते में भेज दी गई. जब फैक्ट्री मालिक ने बैंक पहुंचकर पैसे वापस मांगे तो बैंक कर्मचारी शिवानी ने आशुतोष के दूसरे खाते से 15 लाख रुपये उनके खाते में ट्रांसफर कराए. इस तरह तीन बार में करीब 35 लाख रुपये वापस किए गए.

शिकायत की बात पर बैंक में मची खलबली

जब खाताधारकों ने पुलिस और दूसरी जांच एजेंसियों से शिकायत करने की बात कही तो बैंक मैनेजर और कर्मचारियों में हलचल मच गई. 16 सितंबर 2026 को महिला खाताधारक संगीता अपने पति के साथ बेटी की पासबुक अपडेट कराने बैंक पहुंचीं. पासबुक में तीन ऐसे लेनदेन दर्ज मिले, जिनके बारे में परिवार को कोई जानकारी नहीं थी. बैंक की शुरुआती जांच में दीपांशी ने इन लेनदेन को सही बताया. बाद में उसने दावा किया कि संगीता ने फोन पर पैसे ट्रांसफर करने की सहमति दी थी. हालांकि, बैंक को इन लेनदेन से जुड़े कोई वाउचर नहीं मिले. इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ाई गई और गड़बड़ी सामने आने लगी.

झारखंड, गोवा और महाराष्ट्र के खातों में भेजी गई रकम

बैंक की शिकायत के मुताबिक, पूछताछ में दीपांशी ने बताया कि उसने आशुतोष के कहने पर पैसे ट्रांसफर किए थे. इसके लिए बैंक के अधिकारियों की यूजर आईडी का भी इस्तेमाल किया गया. शुरुआती जांच में पता चला कि रकम झारखंड, गोवा और महाराष्ट्र के कम से कम छह बैंक खातों के जरिए आशुतोष तक पहुंचाई गई थी.



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