Diwali 2026: 07 या 08 नवंबर कब मनाई जाएगी दीपावली? आचार्य ने दूर किया कन्फ्यूजन, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

Diwali 2026: 07 या 08 नवंबर कब मनाई जाएगी दीपावली? आचार्य ने दूर किया कन्फ्यूजन, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व


उज्जैन. हिंदू धर्म में दीपावली का पर्व खुशियों, आस्था और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर दीपोत्सव मनाया जाता है. इस विशेष अवसर पर घरों और मंदिरों को दीपों से सजाया जाता है. साथ ही सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है. हालांकि, इस साल दीपावली की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में महाकाल की नगरी उज्जैन में दीपावली किस दिन मनाई जाएगी और पूजा का शुभ समय क्या रहेगा? आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद भारद्वाज से.

कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से लेकर 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहने वाली है. ऐसे में दिवाली का त्योहार 8 नवंबर दिन रविवार को मनाया जाएगा. लक्ष्मी पूजन की बात करें तो शाम 5:54 बजे से लेकर रात 7:50 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहने वाला है.

सबसे पहले महाकाल के दरबार से होगी पर्व की शुरुआत
महाकाल मंदिर के पंडित महेश पुजारी बताते हैं कि महाकाल के दरबार से ही उज्जैन में हर पर्व की शुरुआत होती है. कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर तड़के चार बजे भस्म आरती में दीपावली मनाई जाती है. इसी के साथ इस बार भी 08 नवंबर को भस्म आरती में भगवान महाकाल को तिल्ली, केसर, चंदन का उबटन लगाकर गर्म जल से स्नान कराया जाएगा. इसके बाद नवीन वस्त्र धारण कराकर सोने चांदी के आभूषण से विशेष श्रृंगार किया जाएगा. अन्नकूट का भोग लगाकर फुलझड़ी से आरती की जाएगी. शाम को चतुर्दशी युक्त अमावस्या के संयोग में दीपोत्सव मनेगा. बाबा के दरबार में इसलिए सुबह से ही भक्तों का तांता देखने को मिलेगा.

दिवाली पूजा की सामग्री
दीपावली की पूजा शुरू करने से पहले सभी जरूरी सामान एक जगह जुटा लें. इसमें पूजा के लिए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां, चौकी और लाल कपड़ा रखें. इसके साथ रोली, कुमकुम, चंदन, अक्षत, पान, सुपारी, पंचामृत, नारियल और गंगाजल भी तैयार रखें. पूजा में कलश, आम के पत्ते, मौली और जनेऊ की भी जरूरत होती है. इसके अलावा फूल, फल, दूर्वा, धूप, कपूर, दीपक और रुई की बत्तियां रख लें. मां लक्ष्मी को अर्पित करने के लिए खील, बताशे और मिठाई भी पूजा की सामग्री में शामिल करें.

जानिए क्या है धार्मिक महत्व
रामायण के मुताबिक, भगवान श्रीराम जब लंकापति रावण का वध करके माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस लौटे तो उस दिन पूरी अयोध्या नगरी दीपों से सजी हुई थी. कहते हैं कि भगवान राम के 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या आगमन पर दिवाली मनाई गई. हर नगर हर गांव में दीपक जलाए गए थे. तब से दिवाली का यह पर्व अंधकार पर विजय का पर्व बन गया.



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