UPSC Success Story, Anand Sharma IAS: कौन हैं IAS आनंद शर्मा, जिनका महिला ने पकड़ लिया कॉलर? जर्मनी में कर चुके हैं नौकरी

UPSC Success Story, Anand Sharma IAS: कौन हैं IAS आनंद शर्मा, जिनका महिला ने पकड़ लिया कॉलर? जर्मनी में कर चुके हैं नौकरी


IAS Anand Sharma, Madhubani DM: बिहार के मधुबनी जिले में जिलाधिकारी (DM) आनंद शर्मा इन दिनों एक घटना को लेकर चर्चा में हैं. बाबूबरही थाना क्षेत्र के बलिराजगढ़ गांव में पुलिस के एक ASI की गोली से ग्रामीण की मौत के बाद जब डीएम आनंद शर्मा पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे तो आक्रोशित भीड़ के बीच एक महिला ने उनका कॉलर पकड़ लिया. महिला के हाथ में चप्पल भी थी. घटना के दौरान मौके पर अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षाकर्मियों को डीएम और एसपी को वहां से सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान आनंद शर्मा लोगों से बातचीत करते और स्थिति संभालने की कोशिश करते नजर आए.

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है और उनके धैर्य को लेकर भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं लेकिन इस घटना के बाद एक सवाल भी चर्चा में है कि आखिर मधुबनी के डीएम आनंद शर्मा कौन हैं? वह कहां के रहने वाले हैं, उनकी पढ़ाई-लिखाई कहां हुई, उन्होंने कब यूपीएससी पास कर आईएएस बनने का सफर तय किया और बिहार में अब तक किन-किन महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है? आइए जानते हैं उनकी पूरी कहानी.

कौन हैं मधुबनी के डीएम आनंद शर्मा?

आनंद शर्मा 2013 बैच के बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी हैं. वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी क्षेत्र के रहने वाले हैं. उन्होंने इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की पढ़ाई की है.उन्‍होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और मार्केटिंग में एमबीए किया है.आनंद शर्मा ने कानपुर के हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (HBTI) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (FMS) से मार्केटिंग में एमबीए की डिग्री हासिल की. इस तरह इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा में आने का रास्ता चुना.

पिता की इच्छा पूरी करने के लिए चुनी आईएएस की राह

आनंद शर्मा के करियर से जुड़ी एक दिलचस्प बात यह है कि उनके पिता चाहते थे कि बेटा सरकारी नौकरी करे. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि पिता की इच्छा पूरी करने के लिए ही उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में आने का फैसला किया. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने जर्मनी में भी नौकरी की थी.बाद में उन्‍होंने यूपीएससी की तैयारी की और आखिरकार उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की और 2013 बैच के आईएएस अधिकारी बने. उनकी सेवा में सीधी भर्ती यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से हुई थी. 2 सितंबर 2013 को उन्होंने आईएएस की ट्रेनिंग शुरू की और मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में प्रशिक्षण लिया.

पटना में एसडीओ से शुरू हुआ प्रशासनिक सफर

आईएएस बनने के बाद आनंद शर्मा को बिहार कैडर मिला. शुरुआती दौर में उन्होंने पटना में एसडीओ और एसडीएम के तौर पर काम किया. इसके बाद उन्हें बिहार सरकार और केंद्र सरकार से जुड़ी अलग-अलग जिम्मेदारियां मिलीं. उनके करियर में प्रशासनिक, शहरी विकास, ग्रामीण विकास, पर्यटन, सहकारिता और चुनाव प्रबंधन जैसे कई क्षेत्र शामिल रहे हैं. 2013 से 2015 तक मसूरी में आईएएस प्रशिक्षण पूरा किया. इसके बाद केंद्र सरकार के कपड़ा मंत्रालय में असिस्टेंट सेक्रेटरी के रूप में काम किया.2015 से 2016 तक बिहार में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) की जिम्मेदारी संभाली.2016 से 2017 तक पटना में एसडीओ और एसडीएम के पद पर तैनात रहे.2017 से 2018 तक भागलपुर में डिप्टी डेवलपमेंट कमिश्नर (DDC) और जिला परिषद के सीईओ के तौर पर काम किया.2018 से 2019 तक मुंगेर के जिलाधिकारी और कलेक्टर बने. यह उनके करियर की महत्वपूर्ण जिला स्तरीय जिम्मेदारियों में से एक थी.

2019 तक बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के मैनेजिंग डायरेक्टर बनाए गए. 2019 से 2021 तक सहकारिता विभाग में संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी संभाली. इसी दौरान बिहार राज्य फल एवं सब्जी विकास निगम के प्रबंध निदेशक के तौर पर भी काम किया. 2020 से 2021 तक आवास एवं शहरी विकास से जुड़े विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर रहे.2021 तक पटना नगर निगम में नगर आयुक्त और सीईओ की जिम्मेदारी भी संभाली. 2022 से अप्रैल 2023 तक सहरसा के जिलाधिकारी और कलेक्टर के पद पर तैनात रहे. 2023 में पंचायती राज विभाग में निदेशक, परियोजना निदेशक और ग्रामीण विकास से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं. आवास एवं शहरी विकास विभाग में अपर सचिव के तौर पर भी काम किया.2024 में बिहार राज्य निर्वाचन आयोग के चुनाव विभाग में अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (Additional CEO) की जिम्मेदारी संभाली.इस तरह आनंद शर्मा ने जिला प्रशासन से लेकर राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और चुनाव प्रबंधन तक में काम किया है. उनके करियर में मुंगेर और सहरसा जैसे जिलों में डीएम की जिम्मेदारी भी शामिल रही है.

2025 में बने मधुबनी के जिलाधिकारी

बिहार सरकार ने 2025 में आनंद शर्मा को मधुबनी का जिलाधिकारी बनाया. उन्होंने 3 जून 2025 से इस पद की जिम्मेदारी संभाली. वह मधुबनी के जिला निर्वाचन पदाधिकारी की भूमिका भी निभा चुके हैं.मधुबनी में डीएम के तौर पर उनके सामने शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास योजनाओं, कानून-व्यवस्था, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और चुनाव प्रबंधन जैसी जिम्मेदारियां हैं. नेपाल सीमा से सटे इस जिले में प्रशासनिक कामकाज के साथ सीमा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर भी प्रशासन को नजर रखनी होती है.

चुनाव में उत्कृष्ट काम के लिए राष्ट्रपति से मिला सम्मान

आनंद शर्मा के करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि चुनाव प्रबंधन से जुड़ी है. 2025 के विधानसभा चुनाव और मतदाता जागरूकता से जुड़े कामों के लिए मधुबनी जिले को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला. 25 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मधुबनी के तत्कालीन जिला निर्वाचन पदाधिकारी और जिलाधिकारी आनंद शर्मा को यह पुरस्कार प्रदान किया.मधुबनी जिले को राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण (Training and Capacity Building) की श्रेणी में पहला पुरस्कार मिला था. यह सम्मान चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण तथा उनकी क्षमता बढ़ाने के काम के लिए दिया गया था.

स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर निर्देश 

मधुबनी में डीएम के तौर पर आनंद शर्मा इससे पहले भी चर्चा में आ चुके हैं. अप्रैल 2026 में स्कूलों में शिक्षकों के मोबाइल फोन इस्तेमाल को लेकर उनका एक वीडियो सामने आया था. इसके बाद उन्होंने स्कूलों में क्लास के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने से जुड़ा निर्देश दिया था.उन्होंने शिक्षकों से कहा था कि पढ़ाने के समय उनका ध्यान बच्चों की शिक्षा पर होना चाहिए. इस निर्देश के उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी. इस मामले को लेकर भी उनकी चर्चा हुई थी.

क्या है मधुबनी में डीएम का कॉलर पकड़ने का पूरा मामला?

दरअसल 3 नवंबर 2026 को मधुबनी जिले के बाबूबरही थाना क्षेत्र के बलिराजगढ़ गांव में एक पुलिस एएसआई की फायरिंग से ग्रामीण अशोक यादव की मौत हो गई. इस घटना में तीन अन्य लोग भी गोली लगने से घायल हो गए. घटना के बाद गांव में तनाव फैल गया और ग्रामीणों ने सड़क पर शव रखकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. पुलिस के मुताबिक आरोपी एएसआई चंद्रमोहन सिंह बलिराजगढ़ गांव में बने पुलिस पिकेट पर तैनात था. शुरुआती जानकारी के अनुसार वह सोमवार देर रात गांव की एक महिला के घर पहुंचा था. ग्रामीणों ने उसे वहां देख लिया और घेर लिया. बताया गया कि खुद को घिरा देखकर एएसआई ने अपनी सर्विस पिस्टल से तीन से चार राउंड फायरिंग की और वहां से फरार हो गया. इस घटना में 50 वर्षीय अशोक यादव की मौत हो गई जबकि तीन लोग घायल हुए.घटना के बाद मधुबनी के एसएसपी योगेंद्र कुमार ने बताया कि आरोपी एएसआई की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं. उसके निलंबन की कार्रवाई भी की गई और सूचना देने वाले के लिए 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया.



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