₹40000 की लागत, ₹100000 का मुनाफा: जहानाबाद के किसान साधु ने की है 15 कट्ठा में सिंघाड़े की खेती, जानें कमाई का तरीका

₹40000 की लागत, ₹100000 का मुनाफा: जहानाबाद के किसान साधु ने की है 15 कट्ठा में सिंघाड़े की खेती, जानें कमाई का तरीका


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15 कट्ठा में सिंघाड़े की खेती से हो रही बंपर कमाई,₹40000 में ₹100000 का मुनाफा

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Jehanabad Agriculture News: जहानाबाद के ग्रेजुएट किसान साधु कुमार चौधरी सरकारी नौकरी की तैयारी के साथ सिंघाड़ा की खेती कर रहे हैं. 15 कट्ठा में उगे सिंघाड़ा की खेती से उन्हें चालीस हजार खर्च पर एक लाख तक का मुनाफा हो रहा है. उन्होंने कहा कि इसकी खेती में मखाना से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है.

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जहानाबाद: छठ पूजा का समय नजदीक आ गया है. ऐसे में लोगों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. इस समय सीजनल फल की बहुत डिमांड रहती है. इन्हीं फलों में पानी फल वाला सिंघाड़ा भी शामिल है. बहुत जगह मार्केट में यह फल आना शुरू हो चुका है. बिहार के जहानाबाद जिला में भी पानी वाला सिंघाड़ा की खेती बड़े स्तर पर होती है. सबसे खास बात यह है कि यह फल बेकार पड़ी जमीन में फलता है. कीचड़ और तालाब में यह फल उगाये जाते हैं. इसकी तैयारी जून और जुलाई से ही शुरू हो जाती है. जिले के काको प्रखंड स्थित अमथुआ में साधु कुमार चौधरी एक ग्रैजुएट किसान हैं. वह भी सिंघाड़ा की खेती कर रहे हैं. आइये जानते हैं उनसे इसकी खेती के बारे में.

बता दें कि साधु एक तरफ सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं, तो दूसरी तरफ खेती किसानी से भी जुड़े हुए हैं. अभी सीजन के हिसाब से 15 कट्ठा में पानी वाला सिंघाड़ा लगाए हुए हैं. इसकी बुआई जून -जुलाई में ही की थी और अब तुड़ाई होने लगी है. साधु 30 साल के हैं और वो पढ़ाई के साथ खेती में हाथ बटाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं.

वह यह मानते हैं कि हमें आश्रित नहीं रहना है. कुछ करते रहेंगे तो हमारी कमाई होती रहेगी और दूसरों पर आश्रित होने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यही कारण है कि खेती के साथ साथ पढ़ाई भी जारी रखे हुए हैं. एक बार बिहार पुलिस में फिजिकल और रिटन दोनों निकल गया था, लेकिन मेरिट में छट गया था. इसके चलते नौकरी नहीं कर पाए.

सरकारी नौकरी की तैयारी के साथ खेती से कमाई

जहां तक बात करें पानी वाले सिंघाड़े की खेती की तो हम बहुत पहले से ही इसकी खेती करते आ रहे हैं. 15 कट्ठा में लगाए हुए हैं. जहां अब इसकी तुड़ाई शुरू हो चुकी है और मार्केट तक माल पहुंचने लगा है. इस फसल की तुड़ाई करना चुनौतीपूर्ण है. घंटों पानी में रहकर तुड़ाई करना पड़ता है. 5 से 6 घंटे तक पानी में रहते हैं, तो एक से डेढ़ मन तक तुड़ाई होती है. हमारा मानना है कि मखाना की खेती से ज्यादा सिंघाड़ा की खेती में परेशानी है. शुरू से लेकर अंत तक सिर्फ पानी में रहकर काम करना पड़ता है. इसके बाद ही सिंघाड़ा लोगों तक पहुंच पाता है.

₹40000 खर्च में ₹100000 तक का है मुनाफा

किसान साधु कुमार ने लोकल 18 से कहा, “हम तो कहना चाहेंगे कि इस फसल की खेती को भी बढ़ावा देना चाहिए. हमारे जिले में बहुत किसान सिंघाड़ा की खेती करते हैं. 15 कट्ठा में करीब ₹40000 का खर्च आता है. वहीं, एक सीजन में लगभग एक लाख रुपए बहुत मेहनत के बाद प्राप्त होता है. युवाओं से कहना चाहेंगे कि इसकी खेती में आगे आयेंगे तो सही में अच्छा उत्पादन मिल सकता है. यह फसल कम समय में बेहतर कमाई प्राप्त करवा सकती है. हालांकि, मेहनत अधिक करना पड़ता है. साधु कुमार चौधरी पढ़ाई के साथ खेती में करीब 10 साल से जुड़े हुए हैं.



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