8th Pay Commission: रिटायरमेंट पर लिया एकमुश्त पैसा, अब 15 साल तक कटेगी पेंशन! 8वें वेतन आयोग से उम्मीद लगाए बैठे लाखों पेंशनर्स

8th Pay Commission: रिटायरमेंट पर लिया एकमुश्त पैसा, अब 15 साल तक कटेगी पेंशन! 8वें वेतन आयोग से उम्मीद लगाए बैठे लाखों पेंशनर्स


नौकरी के आखिरी दिन या रिटायरमेंट के आसपास अगर किसी सरकारी कर्मचारी को अचानक पैसों की जरूरत हो तो उसके पास एक विकल्प होता है- अपनी पेंशन का कुछ हिस्सा पहले ही एकमुश्त ले लेना. इसे पेंशन कम्यूटेशन कहते हैं. घर बनाना हो, बच्चों की शादी करनी हो या कोई पुराना कर्ज चुकाना हो, रिटायरमेंट के वक्त मिली यह रकम काफी काम आती है.

लेकिन इस सुविधा की एक कीमत भी है. कर्मचारी को इसके बदले हर महीने मिलने वाली पेंशन का एक हिस्सा छोड़ना पड़ता है. यह कटौती 15 साल तक जारी रहती है. 15 साल पूरे होने के बाद ही कम्यूट की गई पेंशन का हिस्सा दोबारा जुड़ता है.

अब इसी 15 साल के नियम पर पेंशनर्स ने सवाल खड़ा किया है. उनका कहना है कि जब कम्यूट की गई रकम की भरपाई इससे पहले ही हो जाती है तो फिर 15 साल तक पेंशन का हिस्सा क्यों काटा जाए? कोई इसे 12 साल करने की मांग कर रहा है तो कोई 11 साल में पेंशन बहाल करने की बात कह रहा है. यही मुद्दा अब 8वें वेतन आयोग के सामने भी पहुंच गया है. यानी इस बार पेंशनर्स की नजर सिर्फ पेंशन बढ़ने पर नहीं, बल्कि हर महीने हाथ में आने वाली रकम पर भी है.

15 साल तक इंतजार क्यों ?

मान लीजिए किसी कर्मचारी की पेंशन 40,000 रुपये महीने बनती है. वह अपनी पेंशन का एक हिस्सा कम्यूट कराकर रिटायरमेंट के समय एकमुश्त रकम ले लेता है. इसके बदले उसकी हर महीने मिलने वाली पेंशन घट जाती है. यानी अब उसे पूरी पेंशन नहीं मिलती. कम्यूटेशन का मकसद कर्मचारी को भविष्य की पेंशन का कुछ हिस्सा आज ही नकद उपलब्ध कराना है.

नियम के मुताबिक, कम्यूट किए गए हिस्से की बहाली के लिए 15 साल इंतजार करना पड़ता है. पेंशनर्स संगठनों का सवाल है कि क्या यह अवधि जरूरत से ज्यादा लंबी है? उनका तर्क है कि कम्यूटेशन के बदले मिलने वाली रकम की वसूली करीब 10 से 12 साल में हो सकती है. ऐसे में उसके बाद भी कटौती जारी रहना पेंशनर पर अतिरिक्त बोझ डालता है. हालांकि, यह पेंशनर्स संगठनों का दावा है. इसे अदालतों ने अभी अंतिम रूप से स्वीकार नहीं किया है.

दो हाई कोर्ट पहुंचे, लेकिन 15 साल का नियम नहीं बदला

इस मांग को लेकर अदालतों में भी लड़ाई हुई, लेकिन पेंशनर्स को वहां से राहत नहीं मिली. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 27 नवंबर 2024 को 808 याचिकाओं पर फैसला सुनाया. याचिकाकर्ता चाहते थे कि 15 साल के बजाय करीब 11.5 या 12 साल में कम्यूट की गई पेंशन बहाल कर दी जाए.

अदालत ने कहा कि कर्मचारियों ने अपनी इच्छा से पेंशन का हिस्सा कम्यूट कराया था और इसके बदले एकमुश्त रकम ली थी. इसलिए बाद में तय शर्तों को बदलने की मांग अदालत के जरिए स्वीकार नहीं की जा सकती. कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि नियम बदलना सरकार और संबंधित नीति-निर्माताओं का काम है.

इसके बाद 29 मई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने भी केंद्रीय कर्मचारियों पर लागू 15 साल के नियम को बरकरार रखा. अदालत ने कहा कि यह व्यवस्था एक्चुरियल आकलन, विशेषज्ञों की सिफारिशों और लंबे समय से चली आ रही कानूनी व्यवस्था पर आधारित है. यानी दो अदालतों के फैसलों से फिलहाल 15 साल का नियम नहीं बदला. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती.

कर्मचारी संगठनों की क्‍या ड‍िमांड

भारत पेंशनर्स समाज: 60 साल की उम्र में रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए 11 साल या 71 साल की उम्र, जो पहले हो, उस समय पेंशन का कम्यूट किया गया हिस्सा बहाल करने की मांग.

फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशंस: करीब 10 साल में कम्यूटेशन की रकम की भरपाई होने का तर्क देते हुए अवधि घटाने की मांग.

मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन: 15 साल की जगह 12 साल में पेंशन बहाली का प्रस्ताव.

ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन: कम्यूटेशन की बहाली की अवधि 12 साल करने की मांग.

इन सभी मांगों का मकसद एक ही है- पेंशनर को 15 साल तक कम पेंशन लेने के बजाय कुछ साल पहले पूरी पेंशन मिल सके.

8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीद?

अब इस पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका 8वें वेतन आयोग की हो सकती है. पेंशनर्स संगठन चाहते हैं कि आयोग केवल वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी की सिफारिश न करे, बल्कि कम्यूटेशन की 15 साल वाली अवधि की भी समीक्षा करे.

हालांकि, आयोग की तरफ से इस अवधि को घटाने का कोई अंतिम फैसला या गारंटी अभी सामने नहीं है. दो हाई कोर्ट के फैसलों ने भी साफ कर दिया है कि इस नियम में बदलाव अदालत के आदेश से नहीं, बल्कि सरकार के नीतिगत फैसले और विशेषज्ञों के आकलन से ही हो सकता है.



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