Papiya Sultana IPS: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों IPS अधिकारी पापिया सुल्ताना चर्चा में हैं. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 31 अक्टूबर को पश्चिम मेदिनीपुर के गढ़बेटा में एक जनसभा के दौरान उन्हें छोटा अंगरिया मामले के आरोपियों को तलाशने और पुराने मामलों की नए सिरे से जांच करने का निर्देश दिया. मुख्यमंत्री ने मंच से ही जिले की पुलिस अधीक्षक पापिया सुल्ताना को कहा कि उन्हें तपन घोष और सुकुर अली को ढूंढ़कर निकालना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि वह तपन घोष को जेल में देखना चाहते हैं. सीएम ने कहा ‘SP मैडम, आपको उसे ढूंढ़ निकालना होगा.
इस बयान के बाद पापिया सुल्ताना का नाम एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है लेकिन पापिया सुल्ताना केवल इस घटना की वजह से चर्चा में नहीं हैं. वह पश्चिम बंगाल की पहली मुस्लिम महिला पुलिस अधिकारी के रूप में भी पहचानी जाती हैं. हावड़ा जिले के एक गांव से निकलकर पुलिस सेवा में आने, महिला और बच्चों से जुड़े मामलों में काम करने और फिर प्रमोशन के जरिए भारतीय पुलिस सेवा (IPS) तक पहुंचने का उनका सफर कई मायनों में खास है. आइए जानते हैं कौन हैं पापिया सुल्ताना?.
कौन हैं IPS पापिया सुल्ताना और क्यों चर्चा में हैं?
पापिया सुल्ताना पश्चिम बंगाल कैडर की IPS अधिकारी हैं. फिलहाल वह पश्चिम मेदिनीपुर जिले की पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर तैनात हैं. वह राज्य पुलिस सेवा से पदोन्नति पाकर IPS बनी हैं. उनका IPS बैच 2015 दर्ज है.पापिया सुल्ताना हाल ही में तब चर्चा में आईं जब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गढ़बेटा की जनसभा में छोटा अंगरिया और नंदीग्राम हिंसा से जुड़े पुराने मामलों का जिक्र किया. मुख्यमंत्री ने पुलिस को इन मामलों में कार्रवाई करने और आरोपितों को तलाशने के निर्देश दिए. इसी दौरान उन्होंने पापिया सुल्ताना को मंच से ही तपन घोष और सुकुर अली को ढूंढ़ने की जिम्मेदारी सौंपी. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार नंदीग्राम हिंसा से जुड़े मामलों को फिर से खोलने के निर्देश दे रही है.
हावड़ा के बौरिया में हुआ जन्म
पापिया सुल्ताना का जन्म 5 जुलाई 1980 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के बौरिया इलाके में हुआ था. उनका परिवार साधारण पृष्ठभूमि से जुड़ा था और घर में पढ़ाई को महत्व दिया जाता था. उनके पिता अरजहान हलदर उलुबेरिया ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस में इंजीनियर के तौर पर काम करते थे वहीं उनकी मां सलीमा जहां खाशखामार हाई मदरसा में शिक्षिका थीं. पापिया ने अपनी शुरुआती पढ़ाई बौरिया हाई स्कूल से की. उस दौर में उनके आसपास कई लड़कियां स्कूल के बाद आगे की पढ़ाई नहीं कर पाती थीं, लेकिन उन्होंने हायर एजुकेशन हासिल करने का फैसला किया. पढ़ाई और करियर को लेकर उनकी रुचि बनी रही. बताया जाता है कि वह किरण बेदी से प्रेरित थीं और पुलिस सेवा में जाना चाहती थीं. उनकी कहानी की एक खास बात यह भी है कि शादी के बाद भी उन्होंने अपने करियर के लक्ष्य को नहीं छोड़ा. परिवार और सामाजिक परिस्थितियों के बीच उन्होंने पुलिस सेवा में आने की तैयारी जारी रखी.
कब पुलिस सेवा में आईं पापिया सुल्ताना?
पापिया सुल्ताना ने पश्चिम बंगाल पुलिस सेवा (WBPS) की परीक्षा पास करने के बाद वर्ष 2008 में पुलिस सेवा में काम शुरू किया. उपलब्ध सरकारी सेवा रिकॉर्ड के अनुसार वह 3 मार्च 2008 को सेवा में आईं. उन्हें शुरुआती दौर में डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DySP) के पद पर नियुक्त किया गया था. उन्हें पश्चिम बंगाल की पहली मुस्लिम महिला पुलिस अधिकारी के रूप में पहचाना जाता है. फरवरी 2008 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी उन्हें राज्य की पहली मुस्लिम महिला बताया गया था, जिन्होंने पश्चिम बंगाल पुलिस सेवा की परीक्षा पास की थी. उन्होंने पहले राज्य पुलिस सेवा में काम किया और बाद में प्रमोशन पाकर IPS अधिकारी बनीं. इस उपलब्धि के साथ उन्होंने उन महिलाओं के लिए एक मिसाल पेश की जो सामाजिक और पारिवारिक चुनौतियों के बावजूद वर्दी में देश और समाज की सेवा करना चाहती हैं.
123 लड़कियों को बचाने के काम से मिली पहचान
पापिया सुल्ताना के शुरुआती पुलिस करियर में महिला और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े काम को खास तौर पर याद किया जाता है. सेवा में आने के एक साल के भीतर उन्होंने तस्करी और शोषण का शिकार हुई 123 लड़कियों को बचाने में अहम भूमिका निभाई थी. इस प्रयास के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष की ओर से उनकी सराहना की गई थी. उनका काम इस बात पर केंद्रित रहा कि कानून लागू करने के साथ-साथ पीड़ितों को सुरक्षा और मदद भी मिले. महिला सुरक्षा और बाल संरक्षण से जुड़े कामों ने उन्हें पुलिस महकमे में अलग पहचान दिलाई.
किन-किन जगहों पर तैनात रहीं पापिया सुल्ताना?
पुलिस सेवा में आने के बाद पापिया सुल्ताना ने पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों और पुलिस इकाइयों में जिम्मेदारियां संभालीं. शुरुआती दौर में उन्होंने दक्षिण 24 परगना के फलता जोन में काम किया. बाद में वह अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (Additional SP) के पद पर भी तैनात रहीं. उन्होंने मुर्शिदाबाद पुलिस जिले में ट्रैफिक विभाग की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के तौर पर काम किया. इसके अलावा वह स्टेट आर्म्ड पुलिस की दूसरी बटालियन में डिप्टी कमांडेंट भी रहीं. उन्होंने बैरकपुर में स्टेट आर्म्ड पुलिस की पहली बटालियन से जुड़ी जिम्मेदारी भी संभाली. फरवरी 2024 में संदेशखाली में महिलाओं की शिकायतों और आरोपों की जांच से जुड़े काम में भी उनकी भूमिका सामने आई थी. उस समय वह पुलिस टीम के साथ इलाके में गई थीं और महिलाओं के बयान दर्ज किए थे. इस घटनाक्रम के बाद उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई थी.
इसके बाद वह होमगार्ड संगठन में एसपी और सीनियर स्टाफ ऑफिसर जैसे पदों पर काम करती रहीं. वह बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट में डीसी, एसबी के पद पर तैनात रहीं. मार्च 2026 में चुनाव आयोग ने उन्हें पश्चिम मेदिनीपुर का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया. यह जिला चुनाव और कानून-व्यवस्था के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है. फिलहाल वह पश्चिम मेदिनीपुर की एसपी हैं.
2023 में कैसे बनीं IPS अधिकारी?
पापिया सुल्ताना का IPS तक पहुंचने का सफर राज्य पुलिस सेवा से शुरू हुआ था. उन्होंने कई वर्षों तक पश्चिम बंगाल पुलिस सेवा में काम किया. इसके बाद उन्हें राज्य पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति मिली. केंद्रीय गृह मंत्रालय की 4 जनवरी 2023 की अधिसूचना में पापिया सुल्ताना का नाम उन पश्चिम बंगाल पुलिस सेवा अधिकारियों की सूची में शामिल है, जिन्हें पदोन्नति के आधार पर IPS में नियुक्त किया गया था. सरकारी रिकॉर्ड में उनका IPS बैच 2015 है.
कितनी पढ़ी-लिखी हैं पापिया सुल्ताना?
पापिया सुल्ताना ने बीएससी किया है और इसके अलावा पुलिस मैनेजमेंट में डिप्लोमा हासिल किया है. पश्चिम बंगाल पुलिस की उपलब्ध सेवा सूची में उनके नाम के साथ B.Sc., PGDM और PDHRD दर्ज है. उनकी शुरुआती पढ़ाई हावड़ा के बौरिया हाई स्कूल में हुई थी. पापिया सुल्ताना की शादी मई 2006 में बदरुल आलम से हुई थी, जो पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर बताए जाते हैं. दोनों को एक बेटा है. उनके करियर के शुरुआती दौर में परिवार के कुछ सदस्यों को वर्दी वाली नौकरी को लेकर चिंता थी, लेकिन बाद में उनके काम और उपलब्धियों को लेकर परिवार का नजरिया बदला.