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Sahara News : सहरसा के नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा को बिहार सरकार ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. उन पर 8 करोड़ 44 लाख रुपये की चार बड़ी विकास परियोजनाओं में अनियमितता का आरोप है. नगर विकास एवं आवास विभाग की पांच सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि चार बड़ी परियोजनाओं को 68 छोटी योजनाओं में बांटकर काम कराया गया.
सहरसा के नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.
पटना. बिहार सरकार ने सहरसा के नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. उन पर करीब 8 करोड़ 44 लाख रुपये की चार बड़ी विकास परियोजनाओं में अनियमितता का आरोप है. मामले की जांच के बाद सरकार ने यह कार्रवाई की है. उन पर करीब 8 करोड़ 44 लाख रुपये की चार बड़ी विकास परियोजनाओं में गड़बड़ी करने का आरोप है. नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से गठित पांच सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने यह कार्रवाई की है.
दरअसल, सहरसा नगर निगम में प्रभात कुमार झा के कार्यकाल के दौरान करीब 8.44 करोड़ रुपये की लागत वाली चार बड़ी परियोजनाओं में अनियमितता की शिकायत सामने आई थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग ने इसकी जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की थी. समिति को परियोजनाओं से जुड़े कार्यों, दस्तावेजों और टेंडर प्रक्रिया की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी.
टेंडर से बचने के लिए 68 योजनाओं में बांटा काम
जांच के दौरान एक अहम बात सामने आई. रिपोर्ट के मुताबिक, चार बड़ी परियोजनाओं को 68 छोटी-छोटी योजनाओं में विभाजित कर काम कराया गया था. आरोप है कि टेंडर की निर्धारित प्रक्रिया से बचने के लिए ऐसा किया गया. बड़ी परियोजनाओं को छोटे हिस्सों में बांटकर काम कराने के पीछे सरकारी नियमों और निर्धारित निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं करने की मंशा बताई गई. पांच सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में इन आरोपों को सही पाया. इसके बाद जांच रिपोर्ट नगर विकास एवं आवास विभाग को सौंपी गई. रिपोर्ट के आधार पर बिहार सरकार ने प्रभात कुमार झा के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की.
मगध प्रमंडल आयुक्त कार्यालय में रहेगा मुख्यालय
सरकार के आदेश के मुताबिक, प्रभात कुमार झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है. निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय मगध प्रमंडल के आयुक्त कार्यालय में निर्धारित किया गया है. इस कार्रवाई को नगर निकायों में विकास योजनाओं के टेंडर और सरकारी राशि के खर्च में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. खासकर बड़ी परियोजनाओं को छोटी योजनाओं में बांटकर काम कराने के मामले ने सरकारी खरीद और निविदा प्रक्रिया के पालन पर सवाल खड़े किए हैं.