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New Car Buy on Dhanteras: त्योहारी सीजन में वाहन खरीदने से पहले पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक कारों में से कौन-सा विकल्प आपके लिए सबसे बेहतर रहेगा, इसे जानना काफी जरूरी है. आगरा के ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट ने इसे लेकर सारी जानकारी दी है.
आगरा: दीपावली और धनतेरस के मौके पर नया वाहन खरीदना शुभ माना जाता है. यही वजह है कि त्योहार के दौरान बड़ी संख्या में लोग कार और अन्य वाहन खरीदना पसंद करते हैं. लेकिन वाहन खरीदने से पहले लोगों के मन में सवाल रहता है कि पेट्रोल, डीजल, सीएनजी या इलेक्ट्रिक में कौन सा विकल्प बेहतर है. आगरा में पिछले 12 वर्षों से ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़े एक एक्सपर्ट ने बताया कि इन दिनों सबसे ज्यादा मांग सीएनजी गाड़ियों की है. उन्होंने कहा कि भले ही सीएनजी कारों की शुरुआती कीमत पेट्रोल मॉडल से कुछ अधिक होती है, लेकिन रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले लोग कम खर्च के चलते इन्हें पसंद कर रहे हैं.
एक्सपर्ट ने बताया कि जिन नौकरीपेशा लोगों की रोजाना रनिंग कम होती है, उनके लिए पेट्रोल कार अच्छा विकल्प है. वहीं पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में सफर करने वालों के लिए डीजल गाड़ियां बेहतर साबित हो सकती हैं. दूसरी ओर इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर अभी ग्राहकों में थोड़ा संकोच है. इसकी बड़ी वजह कई क्षेत्रों में पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध न होना है. ऐसे में वाहन खरीदते समय बजट, रोजाना की दूरी और इस्तेमाल को ध्यान में रखना जरूरी है.
टैक्सी प्रोफाइल व्यक्ति पसंद करता है CNG गाड़ी
आगरा में पिछले 12 वर्षों से ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़े धर्मवीर कुशवाहा ने बताया कि टैक्सी चलाने वाले लोग सबसे ज्यादा सीएनजी गाड़ियों को पसंद करते हैं. इनमें मारुति स्विफ्ट और अर्टिगा की मांग अधिक रहती है. उन्होंने कहा कि ये गाड़ियां कम खर्च में बेहतर माइलेज देने के साथ रोजमर्रा के व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए अच्छा विकल्प मानी जाती हैं.
धर्मवीर ने बताया कि जिन लोगों की प्रतिदिन लंबी दूरी तय करने की जरूरत होती है, वे भी सीएनजी वाहन खरीदना पसंद करते हैं. इसकी एक खासियत यह भी है कि सीएनजी गाड़ियों में पेट्रोल टैंक की सुविधा भी मिलती है. ऐसे में सीएनजी खत्म होने या गैस स्टेशन उपलब्ध न होने पर पेट्रोल से भी सफर जारी रखा जा सकता है. यही सुविधा इन्हें इलेक्ट्रिक वाहनों से अलग बनाती है.
देहात के लोग डीजल गाड़ी लेना करते हैं पसंद
आगरा के धर्मवीर कुशवाहा ने बताया कि गांव और देहात के लोग आज भी डीजल गाड़ियों पर ज्यादा भरोसा करते हैं. इसकी मुख्य वजह इन गाड़ियों की बेहतर ताकत और कठिन रास्तों पर चलने की क्षमता है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बोलेरो और स्कॉर्पियो जैसी गाड़ियों की मांग अधिक रहती है. ये वाहन खराब रास्तों और लंबी दूरी के सफर के लिए पसंद किए जाते हैं.
धर्मवीर ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में बीएस-4 वाहनों पर प्रतिबंध है, जबकि वहां बीएस-6 मानक वाले वाहन संचालित होते हैं. इसके अलावा पहाड़ी इलाकों में भी डीजल गाड़ियों को बेहतर विकल्प माना जाता है, क्योंकि चढ़ाई वाले रास्तों पर इनका प्रदर्शन उपयोगी साबित होता है.