एक हफ्ते में दूसरा चक्रवात, बंगाल की खाड़ी से ही क्यों उठ रहे हैं इतने तूफान?
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महज 1 हफ्ते में ही बंगाल की खाड़ी में एक के बाद दूसरा चक्रवात तूफान तैयार हो गया है. बैक-टू-बैक आए इन तूफानों की वजह से कई हिस्सों में अचानक ठंड भी बढ़ गई है. पर क्या इतने कम समय में 2 चक्रवातों का एक ही समुद्र में उठना एक सामान्य घटना है? क्या ये मजह इत्तेफाक है या सच में जलवायु परिवर्तन का स्तर इस कदर बढ़ गया है कि इसकी वजह से हालात बद से बद्दतर होते जा रहे हैं…
29 अक्टूबर को करवाचौथ के दिन उत्तर भारत की लाखों महिलाएं व्रत पूरा करने के लिए रात को चांद का इंतजार कर रही थीं. पर अचानक आए बादलों को देख कई महिलाओं को इस बात का अंदेशा हो गया था कि आज रात चांद मुश्किल ही नजर आएगा. इन बादलों की वजह था चक्रवाती तूफान अर्नब जो 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश से टकराया था. (फोटो- AP)
अर्नब की तबाही का मंजर अभी देश देख ही रहा था कि अब ‘मुरासु’ ने दस्तक दे दी है. मुरासु चक्रवात की वजह से 1 नवंबर से ही बंगाल की खाड़ी से लगे तटीय इलाकों में तेज बारिश और तूफानी हवाएं चल रही हैं. IMD ने आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों समेत तमिलनाडु, तेलंगाना, दक्षिणी ओडिशा और छत्तीसगढ़ में बारी बारिश की चेतावनी दी है. सिर्फ बारिश ही नहीं, इस साइक्लोन की वजह से भारत के कई इलाकों में ठंड अचानक बढ़ गई है. (फोटो- रायटर्स)
बंगाल की खाड़ी में ही क्यों आते हैं इतने तूफान? – ये दोनों ही तूफान बंगाल की खाड़ी से उठे हैं. दरअसल भारत में 80 प्रतिशत साइक्लोन या चक्रवात बंगाल की खाड़ी से ही उठते हैं. उसकी वजह है बंगाल की खाड़ी का तीन तरफ से जमीन से घिरा होना. जमीन से घिरा होने की वजह से इसके पानी का तापमान ज्यादा घिरा होता है. समुद्र में चक्रवात तब बनते हैं जब समुद्र का तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर होने लगता है. जबकि जानकारी के अनुसार अभी यहां का तापमान 28 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है. दूसरी बड़ी वजह है कि मानसून के बाद भारत में हवाएं साइक्लोनों को ईस्ट से वेस्ट की तरफ बढ़ाती हैं. (फोटो- AP)
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यही वजह है कि जब बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बनता है तो वो भारत की तरफ बढ़ता है जबकि जब अरब सागर में चक्रवात उठता है तो वो भारत की बजाए पश्चिम दिशा में ओमान या मिडिल ईस्ट की तरफ बढ़ जाता है. यही वजह है कि विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में इतने कम समय में 2 तूफानों का उठना कोई बिरला उदाहरण नहीं है. (फोटो- AP)
क्या अल-नीनो की वजह से हो रहे हैं ये तूफान?- अल-नीनो और ला-नीनो दोनों ही प्रशांत महासागर में होने वाली एक-दूसरे के विपरीत जलवायु घटनाएं हैं. अल-नीना यानी वो कंडीशन जब प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान ज्यादा गर्म हो जाता है. इसकी वजह से भारत और आस्ट्रेलिया जैसे इलाकों में मानसून कमजोर हो जाता है और सूखा और गर्मी बढ़ती है. (फोटो- AP)
जबकि ला-नीना इसके उलट स्थिति है. ला-नीना यानी अल-नीनो की ‘छोटी बहन’. इसमें प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से काफी ठंडा हो जाता है. इसकी वजह से भारत, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में बहुत ज्यादा बारिश होती है और बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं.
(फोटो- AP)
इस साल यान 2026 में प्रशांत महासागर में एक काफी ताकतवर अल-नीनो एक्टिव है. इसी की वजह से भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर बुरा असर पड़ा है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और राष्ट्रीय समुद्री और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) के अनुसार, 2026 के मध्य में स्थितियां तेजी से बदलीं और अल-नीनो काफी मजबूत हो गया. इसका असर फरवरी, 2027 तक रहने वाला है.
(फोटो- AP)
क्योंकि इस साल एक सुपर अल-नीनो एक्टिव है, इसलिए बंगाल की खाड़ी के ऊपरी सतह का पानी 28 से 30 डिग्री तक गर्म हो गया है. यही गर्मी इन चक्रवातों के लिए फ्यूल का काम करती है और इसकी स्थिति कुछ ही घंटों में कई गुना बढ़ा देती हैं. इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज और आंध्र यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 1995 से 2019 के चक्रवातों पर रिसर्च की है. इसके अनुसार 9 अल-नीनो सालों में 15 चक्रवात और 11 ला-नीना सालों में 33 चक्रवाती तूफान आए. यानी अल-नीनो सालों में साइक्लोन तो काफी कम आए पर उनकी स्पीड आर इनका असर ला-नीना के सालों में आए तूफानों से काफी ज्यादा था. (फोटो- रायटर्स)