किसानों को देखकर आया आइडिया, अब बैंगन की खेती से लाखों कमाने की उम्मीद

किसानों को देखकर आया आइडिया, अब बैंगन की खेती से लाखों कमाने की उम्मीद


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खेती में मुनाफा कमाने के लिए जरूरी नहीं कि हर बार कोई नई फसल ही उगाई जाए. सही वैरायटी और देखभाल से पारंपरिक सब्जियों की खेती भी अच्छी आमदनी का जरिया बन सकती है. गोंडा के युवा किसान राजा निषाद पढ़ाई के साथ दो बीघे में बैंगन की खेती कर रहे हैं. उन्होंने श्रीनाथ वैरायटी लगाई है, जिससे करीब छह महीने तक उत्पादन मिलता है. आइए जानते हैं उनकी खेती का तरीका और इसकी खासियत.

राजा निषाद बताते हैं कि दो बीघे में बैंगन की खेती करने के लिए करीब 20 हजार रुपये खर्च हुए हैं. वह अपने खेत में तैयार बैंगन को नवाबगंज सब्जी मंडी में सप्लाई करते हैं. बाजार में बैंगन की लगातार मांग बनी रहती है. अच्छी पैदावार और बाजार की मांग को देखते हुए उन्हें इस खेती से लाखों रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है. आसपास के किसानों को देखकर ही उन्हें बैंगन की खेती करने का आइडिया मिला

बैंगन की इस वैरायटी में एक बार फल आना शुरू होने के बाद लंबे समय तक उत्पादन मिलता रहता है. राजा निषाद के मुताबिक, उनके खेत में करीब छह महीने तक बैंगन की फसल मिलती रहती है. लगातार फल आने की वजह से किसान को एक ही बार में पूरी फसल बेचने की जरूरत नहीं पड़ती.

राजा निषाद ने अपने खेत में श्रीनाथ वैरायटी का बैंगन लगाया है. उनके मुताबिक यह किस्म गोंडा के वातावरण के लिए अच्छी है. इस वैरायटी की खास बात यह है कि पौधों की रोपाई के करीब 60 दिन बाद ही फल आने शुरू हो जाते हैं. इससे किसान को अपेक्षाकृत जल्दी उत्पादन मिलने लगता है.

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राजा निषाद बताते हैं कि बैंगन की खेती में नियमित तुड़ाई करना जरूरी होता है. एक बार बैंगन तोड़ने के बाद करीब चौथे दिन दोबारा फल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं. इस तरह खेत से लगातार उत्पादन मिलता रहता है और किसान को बार-बार बाजार में सब्जी पहुंचाने का मौका मिलता है.

राजा निषाद बताते हैं कि बैंगन की खेती में नियमित तुड़ाई करना जरूरी होता है. एक बार बैंगन तोड़ने के बाद करीब चौथे दिन दोबारा फल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं. इस तरह खेत से लगातार उत्पादन मिलता रहता है और किसान को बार-बार बाजार में सब्जी पहुंचाने का मौका मिलता है.

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के युवा किसान राजा निषाद ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे हैं. पढ़ाई के बाद मिलने वाले खाली समय का इस्तेमाल वह खेती में करते हैं. उन्होंने करीब दो बीघे जमीन पर बैंगन की खेती शुरू की है. सिंचाई से लेकर निराई-गुड़ाई और फसल की देखभाल तक के काम खुद संभालते हैं.

राजा निषाद ने अपने खेत में श्रीनाथ वैरायटी का बैंगन लगाया है. उनके मुताबिक यह किस्म गोंडा के वातावरण के लिए अच्छी है. इस वैरायटी की खास बात यह है कि पौधों की रोपाई के करीब 60 दिन बाद ही फल आने शुरू हो जाते हैं. इससे किसान को अपेक्षाकृत जल्दी उत्पादन मिलने लगता है.

बैंगन की इस वैरायटी में एक बार फल आना शुरू होने के बाद लंबे समय तक उत्पादन मिलता रहता है. राजा निषाद के मुताबिक, उनके खेत में करीब छह महीने तक बैंगन की फसल मिलती रहती है. लगातार फल आने की वजह से किसान को एक ही बार में पूरी फसल बेचने की जरूरत नहीं पड़ती.

राजा निषाद बताते हैं कि बैंगन की खेती में नियमित तुड़ाई करना जरूरी होता है. एक बार बैंगन तोड़ने के बाद करीब चौथे दिन दोबारा फल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं. इस तरह खेत से लगातार उत्पादन मिलता रहता है और किसान को बार-बार बाजार में सब्जी पहुंचाने का मौका मिलता है.

राजा निषाद बताते हैं कि बैंगन की खेती में नियमित तुड़ाई करना जरूरी होता है. एक बार बैंगन तोड़ने के बाद करीब चौथे दिन दोबारा फल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं. इस तरह खेत से लगातार उत्पादन मिलता रहता है और किसान को बार-बार बाजार में सब्जी पहुंचाने का मौका मिलता है.

राजा निषाद बताते हैं कि दो बीघे में बैंगन की खेती करने के लिए करीब 20 हजार रुपये खर्च हुए हैं. वह अपने खेत में तैयार बैंगन को नवाबगंज सब्जी मंडी में सप्लाई करते हैं. बाजार में बैंगन की लगातार मांग बनी रहती है. अच्छी पैदावार और बाजार की मांग को देखते हुए उन्हें इस खेती से लाखों रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है. आसपास के किसानों को देखकर ही उन्हें बैंगन की खेती करने का आइडिया मिला



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