Agriculture: सरसों की इन किस्मों की करें बुवाई, बंपर मिलेगी पैदावार, बस किसान इन बातों का रखें ख्याल

Agriculture: सरसों की इन किस्मों की करें बुवाई, बंपर मिलेगी पैदावार, बस किसान इन बातों का रखें ख्याल


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सरसों की बुवाई से पहले चुनें ये 5 किस्में, कम लागत में मिलेगी बेहतर पैदावार

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Mustard Farming Tips: सरसों की खेती का सीजन शुरू हो गया और किसान बीज बुवाई भी करने लगे हैं. सरसों की खेती में सही बीज का महत्वपूर्ण है. सही बीज से किसान अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं. राजस्थान में आरएच-30, आरएच-749, गिरिराज डीआरएमआर-आईजे-31, पूसा विजय और पूसा बोल्ड जैसी किस्में किसानों के बीच लोकप्रिय हैं. हालांकि इन बीजों की बुवाई से पहले खेत को बेहतर तरीके से तैयार करें और बीजोपचार के बाद ही बुवाई करें. बुवाई के बाद सिंचाई और खाद प्रबंधन भी जरूरी है. खरपतवार नियंत्रित रखना भी किसानों के लिए बेहतर जरूरी है. वरना इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है. कुछ जरूरी उपाय कर किसान बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं.

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भीलवाड़ा. रबी सीजन शुरू होते ही किसानों ने खेतों में फसलों की बुवाई की तैयारी शुरू कर दी है. इस मौसम में सरसों की खेती किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया मानी जाती है. भीलवाड़ा के कई इलाकों में किसान बड़े स्तर पर सरसों की खेती करते हैं. लेकिन अच्छी पैदावार पाने के लिए सिर्फ खेत तैयार करना ही काफी नहीं है, बल्कि सही किस्म का चुनाव और समय पर बुवाई करना भी बहुत जरूरी है. अगर किसान बुवाई में थोड़ी सी भी लापरवाही करते हैं तो इसका असर फसल की पैदावार पर पड़ सकता है. सरसों की खेती में अच्छा उत्पादन और मुनाफे की बात की जाए तो कई किस्में किसानों के लिए अच्छी मानी जाती है. हालांकि किस्म का चुनाव करते समय स्थानीय जलवायु देख कर और कृषि विभाग की देखरेख में ही करना चाहिए.

पूर्व कृषि अधिकारी डॉ. इंदर सिंह संचेती ने बताया कि भीलवाड़ा में सरसों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. भीलवाड़ा के अलावा बात की जाए तो चित्तौड़गढ़ , टोंक , राजसमंद जिले में भी किसान सरसों की खेती करते हैं. सरसों की अच्छी फसल लेने के लिए किसानों को बुवाई से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. सबसे पहले अपने इलाके की जलवायु, मिट्टी और सिंचाई की सुविधा के अनुसार सरसों की किस्म का चुनाव करना चाहिए. राजस्थान में आरएच-30, आरएच-749, गिरिराज (डीआरएमआर-आईजे-31), पूसा विजय और पूसा बोल्ड जैसी किस्में किसानों के बीच लोकप्रिय हैं.

सरसों की खेती के लिए सही किस्म का चयन जरूरी

हालांकि किस्म का चुनाव करते समय कृषि विशेषज्ञों की सलाह जरूर लेनी चाहिए. सरसों की बुवाई के लिए खेत की अच्छी तरह से तैयारी करना जरूरी है. खेत की मिट्टी भुरभुरी और समतल होनी चाहिए, ताकि बीज का जमाव अच्छे से हो सके. बुवाई के लिए प्रमाणित और अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का ही इस्तेमाल करें. बीज बोने से पहले उसका उपचार करना भी फसल को शुरुआती बीमारियों से बचाने में मदद करता है. आमतौर पर सरसों की बुवाई का उपयुक्त समय अक्टूबर के मध्य से नवंबर के शुरुआती दिनों तक माना जाता है, लेकिन यह समय किस्म और स्थानीय मौसम के अनुसार बदल सकता है. देर से बुवाई करने पर तापमान बढ़ने के कारण फूल और दाने बनने पर असर पड़ सकता है जिससे उत्पादन कम हो सकता है.

सरसों की बुवाई के बाद इन चीजों का रखें ख्याल

किसानों को बुवाई करते समय कतार से कतार और पौधे से पौधे की उचित दूरी भी रखनी चाहिए. इससे पौधों को पर्याप्त धूप, हवा और पोषक तत्व मिलते हैं. खेत में नमी बनाए रखने के लिए जरूरत के अनुसार सिंचाई करें. सरसों की फसल में पहली सिंचाई फूल आने से पहले और दूसरी सिंचाई दाना बनने के समय करना फायदेमंद हो सकता है. इसके अलावा खरपतवार पर नियंत्रण रखना और समय-समय पर फसल की निगरानी करना भी जरूरी है. किसानों को खाद का इस्तेमाल मिट्टी की जांच और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार करना चाहिए. इस तरह सही किस्म, समय पर बुवाई, अच्छे बीज और उचित देखभाल से किसान सरसों की बेहतर पैदावार प्राप्त कर सकते हैं.



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