UP Chunav: योगी-शाह ने थाम लिया वो हथियार, जो यूपी से लेकर बिहार और बंगाल तक बीजेपी को दिलाते रहे हैं झोली भरकर वोट

UP Chunav: योगी-शाह ने थाम लिया वो हथियार, जो यूपी से लेकर बिहार और बंगाल तक बीजेपी को दिलाते रहे हैं झोली भरकर वोट


उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर गृहमंत्री अमित शाह ने लखनऊ दौरे पर बीजेपी कार्यकर्ताओं और नेताओं को अबकी बार 350 सीटें जीतने का लक्ष्य दिया है. इस लक्ष्य का पूरा करने के लिए गृहमंत्री ने उस हथियार को आजमाने का भी सिग्लन दे दिया जिसके बूते बिहार और पश्चिम बंगाल में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिली है. हालांकि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछले ढाई-तीन महीने से लगातार अलग-अलग जिलों के दौरों पर अपने भाषणों में इसी हथियार को लगातार आजमा रहे हैं.

क्या है शाह-योगी का वो हथियार जो यूपी में दिलाएगा 350 सीटें

2025 का बिहार चुनाव में बीजेपी-जेडीयू समेत अन्य एनडीए घटक दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि वो वहां करीब 20 साल से लगातार सत्ता चला रहे हैं. ऐसे में नई जेनरेशन के वोटरों ने अपनी याद में नीतीश कुमार के कार्यकाल को ही देखा था. ऐसे में बीजेपी और जेडीयू ने विशेष रूप से रणनीति बनाई कि युवा वोटरों को हर हाल में समझाना है कि 20 साल पहले बिहार कैसा था. उन्हें लगातार सलाह देनी है कि वे अपने माता-पिता, दादा दादी या नाना-नानी से पूछें कि 2020 पहले क्या वाकई बिहार में जंगलराज था. खुद नीतीश कुमार हर बयान में इसी बात को दोहराते दिखते-‘2005 से पहले बिहार में कुछ था जी’. यह तरकीब काम कर गई और 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन ने 202 सीटों की प्रचंड जीत दर्ज की.

ठीक इसी तरह 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी ममता बनर्जी की सरकार को उखाड़ने के लिए पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत बीजेपी के तमाम नेता मंचों से यही बात दोहराते कि टीएमसी की सरकार में किस कदर गुंडागर्दी और उगाही का धंधा चल रहा है. यहां भी बीजेपी का यह हथियार चलाना काम कर गया और सुवेंदु अधिकारी की अगुवाई में पहली बार में ही प्रचंड बहुमत की सरकार बनी. अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी गृहमंत्री अमित शाह ने कार्यकर्ताओं के साथ अपने पहले संबोधन में ही कहा कि जिस मुलायम सिंह यादव ने कार सेवकों को पर गोलियां चलाई थी उनकी सरकार कैसे बन सकती है. यूपी में बीजेपी अंगद के पांव की तरह है जिसे कोई हिला ही नहीं सकता है.

योगी आदित्यनाथ भाषणों में सपा सरकार की यादें कर रहे ताजा

सीएम योगी जिस भी जनसभा में जाते हैं उनके भाषण का करीब 80 फीसदी समय समाजवादी पार्टी के सरकारों में होने वाली गंडागर्दी और खराब लॉ एंड ऑर्डर को लेकर आरोप लगाने में ही गुजरते हैं. उदाहरण के लिए एक नवंबर की रैली में सीएम योगी ने कहा- ‘समाजवादी पार्टी तो माफिया प्रवृति की ही पार्टी है. जैसे कुत्ते की पूंछ सीधी नहीं हो सकती, उसी तरह समाजवादी पार्टी के लोग भी सीधे नहीं हो सकते हैं. इन लोगों की प्रवृति है जब भी मौका मिला जमीन कब्जा करना, गोरखुपर बाइपास जेल रोड पर एक प्रतिष्ठित परिवार की दो हवेलियां हुआ करती थी. सपा की सरकार के समय जबरदस्ती कब्जा होने का प्रयास किया गया. विरोध किया गया तो वह बच गईं, लेकिन उस परिवार ने रातो रात दोनों हवेलियां गिरा दी. मैंने पूछा तो कहा कि साहब कम से कम जमीन तो कब्जे में रहेगी, नहीं तो सपा के माफिया सब कब्जा लेंगे.’

3 नवंबर की जनसभा में सीएम योगी ने कहा- ‘इस बार नवरात्रि पर पूरे प्रदेश में 67000 मूर्तियां रखी गई थी. मैंने कहा कि इसके लिए किसी प्रकार की परमिशन लेने की जरूरत नहीं है. किसी सपाई या किसी कसाई को परेशानी होती है तो कहो अपने घर में शोक मनाओ. ऐसे ही उमंग के साथ कांवड़ यात्रा होती है. गाजियाबाद और मेरठ के बीच इस बार रिकॉर्ड साढ़े चार करोड़ लोगों ने कावंड यात्रा की. सपा के लोगों ने उसपर भी विरोध लगा दी थी. कहते थे दंगा हो जाएगा. मैंने कहा हमारे समय में कोई दंगा नहीं होगा. तुमने अपने समय में दंगाइयों को अपने आवास पर बुलाकर सम्मानित करते हो, इसलिए वो दंगा करने का दुस्साहस करता था.’

इसी तरह पिछले सप्ताह कानपुर के बिठूर की एक जनसभा में सीएम योगी के 45 मिनट के भाषण में 5-10 मिनट को छोड़कर ज्यादातर पिछली अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (SP) सरकार पर कुशासन का आरोप लगाने पर ही था. आदित्यनाथ ने बार-बार सपा सरकार की मुस्लिम तुष्टीकरण की पॉलिसी, बार-बार होने वाले सांप्रदायिक दंगे, खराब कानून-व्यवस्था और हिंदू सांस्कृतिक विरासत के प्रति उदासीनता पर जोर दिया. इसकी तुलना मंदिर बनाने और हिंदू धार्मिक स्थलों को सजाने-संवारने में उनकी अपनी सरकार के रिकॉर्ड करते दिखे.

सीएम योगी के भाषणों में इस तरह की लाइनें खूब दिखती हैं-

  • सपा का मतलब दंगा है
  • सपा का मतलब भ्रष्टाचार है
  • सपा का मतलब परिवारवाद है
  • सपा का मतलब युवाओं के जीवन के साथ खिलवाड़
  • सपा का मतलब प्रदेश में अराजकता है
  • सपा का मतलब भाई-भतीजावाद
  • सपा का मतलब युवाओं के जीवन और भविष्य के साथ खेलना है.
  • सपाई सत्ता बनने के लिए हिन्दुत्व का ढ़ोंग कर रहे हैं
  • सपाई सत्ता पाने के लिए कालनेमि का रूप धारण करके आए हैं
  • सपा राज में देख सपाई, बिटिया घबराई
  • सपा राज में एक जिला एक माफिया था

बीजेपी के सोशल मीडिया पेज से भी सीएम योगी के भाषण से इसी तरह की लाइन को काटकर पोस्ट किया जा रहा है. 19 अक्टूबर को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- ‘सपा की गुंडागर्दी और माफिया राज उत्तर प्रदेश में कभी वापस नहीं आएगा.’ वहीं दूसरे उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लगातार कहते सुने जाते हैं- ‘उत्तर प्रदेश के लोग सपा के कानून न होने और माफिया कल्चर के रिकॉर्ड को नहीं भूले हैं.’ यानी गृहमंत्री अमित शाह ने लखनऊ दौरे पर बीजेपी नेताओं को जिस हथियार का इस्तेमाल करने का इशारा कर गए सीएम योगी और दोनों उपमुख्यमंत्री उसका पहले से ही जमकर प्रयोग कर रहे हैं.

सपा के खिलाफ इस हथियार पर क्या सोचती है बीजेपी

बीजेपी इस बात को खारिज करती है कि वह सपा सरकार के खराब रिकॉर्ड पर निर्भर है. बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा, ‘यह सच नहीं है. हम अपनी कामयाबियों को रेगुलर लोगों तक ले जा रहे हैं. लेकिन हम उनसे पहले की दोनों सरकारों की तुलना भी कर रहे हैं ताकि वे सही चुनाव कर सकें. 2017 से पहले UP कैसा था और उसके बाद यह कैसे बदल गया है. चाहे बिजली की हालत हो, एक्सप्रेसवे हों, एयरपोर्ट हों, मेडिकल कॉलेज हों. बदलाव साफ दिख रहा है. पहले दंगे होते थे, लेकिन अब दंगे नहीं होते. मकसद वोटरों को यह बताना है कि आदित्यनाथ ने राज्य की हालत और दिशा कैसे बदली है.’

सपा कह रही बीजेपी के पास बताने को कुछ नहीं

वहीं सपा का कहना है कि सत्ता में अपने सालों का बार-बार जिक्र करना यह दिखाता है कि बीजेपी अपने ही रिकॉर्ड के आस-पास चुनाव नहीं बना पा रही है.

सपा के राज्यसभा सांसद जावेद अली ने बातचीत में कहा- ‘बीजेपी जो इतिहास को मजबूत करने का फॉर्मूला इस्तेमाल कर रही है, वह अब खत्म हो चुका है. पहली बात, अखिलेश जी का राज आदित्यनाथ से बेहतर था. साथ ही, लोगों ने 2024 में ही दिखा दिया है कि वे इस नैरेटिव पर यकीन नहीं कर रहे हैं. हाल ही में हुए MLC चुनावों ने भी दिखा दिया है कि लोग इस नैरेटिव को हराने के लिए तैयार हैं.’

वहीं सपा प्रवक्ता फखरुल हसन ने कहा- ‘हम अपने राज की कामयाबियों के बारे में बात करते हैं. वे हमारे बारे में बात करते हैं. यह उनकी मजबूरी है क्योंकि उनके पास किए गए काम के तौर पर दिखाने के लिए कुछ नहीं है. उनका एकमात्र मकसद चुनावों को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करना है. बीजेपी की एक मीटिंग में ‘काटेंगे तो बताएंगे’ के नारे लगे. उन्हें शिक्षा, हेल्थकेयर और रोज़गार के मुद्दों से कोई लेना-देना नहीं है.’



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