पटना. मोकामा के विधायक अनंत सिंह को जेडीयू से पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित किया गया है. उनपर आरोप है कि उन्होंने बिहार विधान परिषद चुनाव के दौरान पटना स्नातक क्षेत्र में जेडीयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ जाकर जन सुराज पार्टी के अनुज सिंह का खुला समर्थन और प्रचार किया था. इसे पार्टी विरोधी कृत्य मानते हुए जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को अखबार कटिंग, सीडी और वीडियो जैसे सबूतों के साथ आवेदन दिया था. अब इसके आधार पर सचिव संजय कुमार सिंह ने नोटिस जारी किया है, जिसमें 7 दिनों के अंदर जवाब मांगा गया है. जानकारी मिली है कि अनंत सिंह ने नोटिस प्राप्त कर लिया है. आज से एक सप्ताह के भीतर अनंत सिंह को जवाब देना आवश्यक होगा. ऐसे में सवाल यह कि अब अनंत सिंह के पास क्या विकल्प हैं?
नोटिस का जवाब ही तय करेगा आगे की दिशा
विशेषज्ञों के अनुसार, अनंत सिंह को सबसे पहले निर्धारित समय सीमा के भीतर विधानसभा सचिव को अपना जवाब देना होगा. इसके तहत वे अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रख सकते हैं. साथ ही जेडीयू की ओर से दिए गए दस्तावेजों, पेपर कटिंग और सीडी की प्रामाणिकता, संदर्भ और कानूनी महत्व पर सवाल उठा सकते हैं. वे यह दलील भी दे सकते हैं कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक हैं या उपलब्ध साक्ष्य पूरे घटनाक्रम को सही तरीके से नहीं दर्शाते. हालांकि, केवल आरोपों को नकारना पर्याप्त नहीं होगा, उन्हें अपने पक्ष में तथ्य और दस्तावेज भी देने होंगे.
क्या पार्टी से निष्कासन के बाद विधायकी अपने आप चली जाती है?
विशेषज्ञों के अनुसार, जेडीयू से निष्कासित किए जाने का मतलब यह नहीं है कि अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता तत्काल समाप्त हो जाएगी. सदस्यता पर फैसला संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून के तहत विधानसभा अध्यक्ष को करना होगा. सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, किसी विधायक को पार्टी से निकाल दिए जाने के बावजूद दल-बदल कानून के लिए उसे उसी राजनीतिक दल का सदस्य माना जा सकता है, जिसके टिकट पर वह चुनाव जीता था. इसलिए पार्टी से निष्कासन अपने आप सदस्यता बचाने का आधार नहीं बनता.
अब अनंत सिंह के पास क्या-क्या विकल्प हैं?
- विशेषज्ञों के अनुसार, अनंत सिंह के पास पहला विकल्प है जवाब देकर आरोपों को खारिज कर दें. अनंत सिंह 7 दिन के अंदर लिखित जवाब में कह सकते हैं कि उन्होंने कोई पार्टी विरोधी गतिविधि नहीं की. पेपर कटिंग और सीडी को मनगढ़ंत या एडिटेड बता सकते हैं. वह कह सकते हैं कि वह अभी भी पार्टी के प्रति निष्ठावान हैं. अगर विधायक का जवाब संतोषजनक रहा तो अध्यक्ष नोटिस को समाप्त कर सकते हैं.
- दूसरा विकल्प है व्यक्तिगत रूप से सफाई देना: अनंत सिंह विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष खुद उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकते हैं. कई मामलों में अध्यक्ष सुनवाई का मौका भी देते हैं. इस दौरान वह अपने समर्थकों या वकील के माध्यम से साक्ष्य पेश कर सकते हैं.
- तीसरा विकल्प है कानूनी रास्ता: अगर विधानसभा सदस्यता पर तलवार लटकती है तो वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं. दलबदल विरोधी कानून के तहत अगर कार्रवाई होती भी है तो इसे कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है. लेकिन नोटिस का जवाब देना अनिवार्य है, जवाब नहीं देने पर एकतरफा कार्रवाई हो सकती है.
क्या-क्या कार्रवाई हो सकती है?
जानकार बताते हैं कि अगर जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो विधान सभा अध्यक्ष प्रेम कुमार कई तरह की कार्रवाई कर सकते हैं. सबसे बड़ी कार्रवाई दलबदल विरोधी कानून के तहत सदस्यता रद्द करना है. अगर यह साबित हो गया कि अनंत सिंह ने पार्टी विरोधी गतिविधि की और किसी अन्य दल को समर्थन दिया या पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया तो सदस्यता जा सकती है. दूसरी कार्रवाई में पार्टी से निष्कासन की सिफारिश और विधानसभा में अलग गुट में बैठने का निर्देश हो सकता है. तीसरी कार्रवाई में चेतावनी देकर छोड़ना भी शामिल है.
कैसे बच सकते हैं अनंत सिंह?
जानकारों के अनुसार, अनंत सिंह के पास कार्रवाई से बचाव का तरीका भी है, और बचने का सबसे आसान तरीका है मजबूत साक्ष्य के साथ जवाब देना. अनंत सिंह को यह साबित करना होगा कि उन्होंने पार्टी विरोधी गतिविधि नहीं की है. वह जेडीयू नेतृत्व से माफी मांग कर और भविष्य में पार्टी लाइन पर चलने का भरोसा देकर भी राहत पा सकते हैं. वहीं, राजनीतिक समाधान भी एक विकल्प है. जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने जो आवेदन दिया है, अगर पार्टी उसे वापस लेने को कह दे तो नोटिस स्वतः खत्म हो सकता है.
क्या दूसरे दल के उम्मीदवार का प्रचार करना अयोग्यता का आधार है?
यही इस मामले का सबसे अहम कानूनी सवाल है. दसवीं अनुसूची के तहत किसी विधायक का स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ना अयोग्यता का आधार हो सकता है. इसके लिए केवल औपचारिक इस्तीफा जरूरी नहीं है. विधायक का आचरण भी यह संकेत दे सकता है कि उसने पार्टी छोड़ दी है. सुप्रीम कोर्ट ने रवि एस. नाइक मामले में इस सिद्धांत को स्पष्ट किया था. हालांकि, दूसरे दल के उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करना अपने आप सदस्यता समाप्त करने का अंतिम प्रमाण नहीं है.
सदस्यता जाने का कितना खतरा?
अनंत सिंह की विधायकी पर खतरा जरूर है, लेकिन नोटिस जारी होने से सदस्यता समाप्त नहीं होती. विधानसभा अध्यक्ष को पूरे मामले, साक्ष्यों और अनंत सिंह के जवाब का मूल्यांकन करना होगा. ऐसे में अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि विधानसभा अध्यक्ष आरोपों और साक्ष्यों को किस तरह देखते हैं और अनंत सिंह अपने जवाब में क्या तथ्य प्रस्तुत करते हैं. फिलहाल उनके पास सात दिनों में अपना पक्ष रखने का अवसर है और यही जवाब आगे की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई की दिशा तय कर सकता है. ऐसे में आने वाले सात दिन अनंत सिंह के लिए बेहद अहम हैं.