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Haridwar News: उत्तरी खंड गंग नहर हर साल दशहरे की रात से दीपावली की रात तक करीब 18 से 20 दिनों के लिए वार्षिक बंदी के तहत सूखी रहती है. इस दौरान नहर की सफाई, मरम्मत और बुनियादी ढांचे से जुड़े जरूरी कार्य किए जाते हैं.
हरिद्वार: हरिद्वार से लेकर उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात तक जाने वाली उत्तरी खंड गंग नहर इस समय सूखी पड़ी है. अंग्रेजों के दौर में सिंचाई के लिए बनाई गई इस नहर की हर साल वार्षिक बंदी होती है. दशहरे की रात से शुरू होकर दीपावली की रात तक चलने वाली नहर बंदी करीब 18 से 20 दिनों की होती है. पानी रुकते ही नहर की तलहटी साफ नजर आने लगी है और नहर में जमा सिल्ट, गंदगी और कपड़े साफ दिखाई दे रहे हैं.
नहर में पानी नहीं होने से किसानों की सिंचाई पर इसका प्रभाव पड़ता है. वहीं हर की पौड़ी पर आने वाले श्रद्धालुओं के स्नान और सभी धार्मिक कार्य भी प्रभावित होते हैं. ऐसे में सबसे पहला सवाल यही होता है कि आखिर नहर को हर साल 18 से 20 दिनों के लिए पूरी तरह बंद क्यों किया जाता है? क्या है इसके पीछे की असली वजह और तकनीकी रहस्य, चलिए इसे विस्तार से समझते हैं.
नहर में पानी ना होने की ये है वजह
हरिद्वार से उत्तर प्रदेश कानपुर देहात तक जाने वाली नहर की वार्षिक बंदी हर साल की तरह इस बार भी अपने समय पर हुई है. इसकी अधिक जानकारी करने के लोकल 18 ने उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विकास त्यागी से बातचीत की, तो उन्होंने लोकल 18 को बताया कि गंगा बंदी एक वार्षिक कार्यक्रम है, जो हर साल एक निर्धारित समय पर होता है. नहर बंदी की इस अवधि में विभाग द्वारा कई तरह के मिसलेनियस कार्य जैसे घाटों की मरम्मत, नहर से सिल्ट सफाई समेत कई कार्य किए जाते हैं.
विकास त्यागी बताते हैं कि नहर बंदी के दौरान वह सभी कार्य किए जाते हैं, जो नहर में पानी के दौरान नहीं हो सकते हैं. दशहरे की रात से दीपावली की रात तक नहर बंदी के इन 18 से 20 दिनों में गंगनहर के बुनियादी ढांचे को भी दुरुस्त किया जाता है.
सालभर की गंदगी 18 दिनों में होती साफ
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विकास त्यागी ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि साल भर नहर चलने से सिल्ट और गंदगी जमा हो जाती है. भीमगोड़ा बैराज से जब नहर बंद होती है तो अलीगढ़ सहित 15 जनपदों में नहर के अंदर सभी जरूरी कार्य कराए जाते हैं. जब नहर का पानी बंद हो जाता है तो क्षतिग्रस्त हिस्सों को चिह्नित किया जाता है. जबकि कुछ डैमेज कार्यों के लिए योजना पहले से ही तैयार कर ली जाती है.
हरिद्वार से कानपुर देहात तक जाने वाली इस नहर के सभी जरूरी जीर्णोद्धार और तकनीकी कार्यों को नहर बंदी के इन 18-20 दिनों में पूरा किया जाता है. विकास त्यागी ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग सभी जरूरी कार्यों को नहर बंदी की समय-सीमा तक पूरा करने में युद्धस्तर पर जुटा हुआ है.