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बालाघाट के बूढ़ी इलाके में रहने वाला 36 साल का विवेक तिरपुड़े बीते 265 दिनों जिंदा है. . अपनों से बात तक नहीं कर सकता है. पूरा तिरपुड़े परिवार विवेक का ख्याल रखने उसके आसपास रहता है.परिजनों ने डॉक्टर पर एक गंभीर आरोप लगाया कि 20 मिनट की सर्जरी की बात कहकर विवेक को ऑपरेशन थिएटर लेकर गए लेकिन समय बीतता गया और विवेक की जान जोखिम जाते गई. उसी के बाद से विवेक कोमा में चले गया और अब 262 दिनों से वह ICU में है.
बालाघाट के बूढ़ी इलाके में रहने वाला 36 साल का विवेक तिरपुड़े बीते 265 दिनों जिंदा है. अपनों से बात तक नहीं कर सकता है. पूरा तिरपुड़े परिवार विवेक का ख्याल रखने उसके आसपास रहता है. उम्मीद करते हैं कि जान विवेक हल्की सी पलक ही झपक ले. विवेक का हल्का सा एक मूवमेंट पूरे परिवार को उम्मीद देता है. लेकिन जब विवेक फिर शांत हो जाता, तो परिवार फिर निराश हो जाता था. विवेक के भाई अमित तिरपुड़े का कहना है कि 10 फरवरी को विवेक शहर में ही एक हादसे का शिकार हो गए. इस हादसे में विवेक के बाएं हाथ की हथेली में एक फ्रैक्चर आया था. इसके बाद उन्होंने इलाज के लिए सरदार पटेल मल्टीस्पेशिलिटी हॉस्पिटल में भर्ती करवाया.
परिजनों ने डॉक्टर पर एक गंभीर आरोप लगाया कि 20 मिनट की सर्जरी की बात कहकर विवेक को ऑपरेशन थिएटर लेकर गए लेकिन समय बीतता गया और विवेक की जान जोखिम जाते गई. उसी के बाद से विवेक कोमा में चले गया और अब 262 दिनों से वह ICU में है. ऐसे में परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन विवेक की हालत का जिम्मेदार माना और पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाई. अब इस मामले में पुलिस ने 252 दिनों के बाद उस अस्पताल से जुड़े डॉक्टर हितेश कावड़े को गिरफ्तार किया. वहीं, एनेसथितिस्थ डॉक्टर सृष्टि जैन पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी. लेकिन उन्होंने अंतरिम जमानत ले ली और पुलिस का कहना है कि उन्हें पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा.
उस दिन क्या हुआ था
विवेक के भाई अमित का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें बस मामूली सर्जरी के लिए ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया था. लेकिन समय बीतता गया और अस्पताल में अफरा तफरी मच गई. ऐसे में तीन घंटे तक ऑपरेशन थिएटर में क्या होता रहा किसी को कोई भनक तक नहीं थी. वहीं, जब परिजनों ने डॉक्टर से पुछा कि क्या हुआ है. तब जाकर उन्होंने बताया कि विवेक को कार्डियक अरेस्ट आया है. ऐसे में विवेक की भाभी दीक्षा रामटेके भी डॉक्टर है. उनका कहना है कि एक माइनर मेटाकार्पल इंजरी थी. इसमें इलाज अगर ऑपरेशन की भी जरूरत पड़ती, तो जनरल एनेस्थीसिया की जरूरत नहीं थी. रीजनल एनेस्थीसिया से भी काम हो सकता था. परिवार के बार-बार मना करने के बाद भी डॉक्टरों ने सर्जरी की जिद
सीएमएचओ की रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई थी एफआईआर
उस समय तत्कालीन सीएचएमओ की निगरानी में तीन डॉक्टर्स की टीम गठित हुई थी. विवेक ग्लोबल हाइपोक्सिक इंजरी से जूझ रहा है. इसके पीछे की वजह एनेस्थीसिया के इस्तेमाल के दौरान मरीज को ठीक ढंग से वेंटिलेटर पर नहीं रखा गया. नतीजतन, दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच सकी और 36 साल का विवेक इस हाल में पहुंचा. डॉक्टर्स की टीम ने ये भी पाया कि जब एनेस्थीसिया देने के दौरान विवेक की हालत बिगड़ने लगी, तो उसे सीपीआर देकर पुनर्जीवित किया. इस तरह की आपातकाल की स्थिति में अस्पताल में स्किल्ड मैनपावर नहीं था. पुलिस ने इसी रिपोर्ट के आधार में पर डॉक्टर हितेश कावड़े और डॉक्टर श्रष्टि जैन पर एफआईआर दर्ज की थी. पुलिस ने लंबे समय बाद आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार किया था. हालांकि बाद उसे जमानत मिल गई और दूसरी तरफ महिला डॉक्टर ने अंतरिम जमानत ले ली थी.
अस्पताल प्रबंधन पर नोट्स बदलने का आरोप
इस मामले में बालाघाट पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा का कहना है कि मेडिकल बोर्ड के बाद दो डॉक्टर पर एफआईआर दर्ज की गई थी. पुलिस ने जब इस मामले की तहकीकात की तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. फॉरेंसिक रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि अस्पताल के जिस थिएटर में विवेक ऐसी हालत हुई वहाँ पर नोट्स से छेड़छाड़ हुई. पुलिस का कहना है कि पहले ऑपरेशनल नोट्स में छेड़छाड़ किया और उसमें बदलाव कर दिया. इस बात की पुष्टि होने के बाद उन दोनों डॉक्टरों के खिलाफ धाराओं में इजाफा किया गया.
बिना रजिस्ट्रेशन के ही नौकरी करने के आरोप
पुलिस की कार्रवाई अब डॉक्टर्स के रजिस्ट्रेशन तक पहुंच चुकी है. परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर प्रिंस वर्मा शुरुआत से ही विवेक को देख रहे थे. वहीं, डॉक्टर शुभम वैद्य विवेक के ऑपरेशन में लीड डॉक्टर थे. वहीं, जब विवेक की स्थिति बिगड़ने लगी तब डॉक्टर प्रिंस वर्मा की ऑपरेशन थिएटर पहुंचे और दोनों ने मिलकर विवेक को सीपीआर दिया. इसके बाद विवेक की स्थिति और भी खराब होती गई. अब एक आरटीआई से खुलासा हुआ है कि जब विवेक का सरदार पटेल मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में इलाज चल रहा था. तब तक इन दोनों डॉक्टर्स का रजिस्ट्रेशन एमपी मेडिकल काउंसिल में हुआ ही नहीं था. आपको बता दें कि जब मामले की जांच तेज हुई तो 1 मई 2026 को डॉक्टर प्रिंस वर्मा और डॉक्टर शुभम वैद्य ने 3 मई को रजिस्ट्रेशन के अप्लाई किया. ऐसे में अस्पताल पर ही सवाल उठता है कि बिना रजिस्ट्रेशन वाले डॉक्टर्स को नौकरी पर कैसे रखा.
विवेक की स्थिति अब भी गंभीर
विवेक की स्थिति अब भी गंभीर बताई जा रही है. परिवार की आर्थिक स्थिति भी लगातार खराब हुए जा रही है. वहीं, विवेक के भाई अमित भाई के इलाज के लिए अस्पतालों के और भाई को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए पुलिस स्टेशन और कोर्ट के चक्कर लगा रहे है. वहीं, परिवार की आर्थिक स्थिति भी खराब होती जा रही है. ऐसे में विवेक के इलाज के लिए घर पर ही एक अस्थाई आईसीयू सेंटर तैयार किया गया है. इलाज में अब तक 65 लाख रुपए का खर्च आया है. ऐसे में अब क्राउड फंडिंग के जरिए भी इलाज में मदद ली जा रही है.