Reliance Industries Share: रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए इन दिनों चारों ओर से अच्छी खबरें आ रही हैं. एक ओर जियो प्लेटफार्म की शानदार लॉन्चिंग हुई. तो दूसरी ओर कंपनी ने सितंबर तिमाही में रिफाइनरी से लेकर केमिकल कारोबार तक शानदार कमाई की है. यही वजह है कि सोमवार 2 नवंबर 2026 को शेयर बाजार में रिलायंस के शेयर ने जबरदस्त छलांग लगाई. कारोबार के दौरान शेयर करीब 8.1% उछलकर 1,259 रुपये तक पहुंच गया. यह तीन साल से ज्यादा समय में शेयर की सबसे बड़ी इंट्राडे तेजी है. कंपनी का मार्केट कैप भी 17 लाख करोड़ रुपये के पार चला गया. बाजार के जानकारों को उम्मीद है कि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भी कंपनी की कमाई मजबूत रह सकती है. हालांकि, जहाज से तेल मंगाने का खर्च बढ़ने से कुछ दबाव आ सकता है, लेकिन सस्ता कच्चा तेल इस नुकसान की भरपाई करने में मदद कर सकता है.
कच्चा तेल सीधे गाड़ी या मशीन में इस्तेमाल नहीं किया जाता. इसे बड़ी-बड़ी रिफाइनरी में प्रोसेस किया जाता है. इसके बाद पेट्रोल, डीजल और दूसरे उत्पाद तैयार होते हैं. कंपनी को इस काम से कितनी कमाई होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसने कच्चा तेल कितने में खरीदा और उससे तैयार उत्पाद कितने में बेचे. जब तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत और कच्चे तेल की कीमत के बीच अंतर बढ़ता है, तो रिफाइनरी को ज्यादा कमाई होती है. इसी अंतर को रिफाइनिंग मार्जिन या क्रैक कहा जाता है.
सितंबर तिमाही में दुनिया के कई बाजारों में पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई कम थी. इसके साथ भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भी बाजार को प्रभावित किया. इसका फायदा रिलायंस के रिफाइनिंग कारोबार को मिला.
सितंबर तिमाही में रिलायंस ने कितनी कमाई की?
- रिलायंस के ऑयल टू केमिकल (O2C) कारोबार ने सितंबर तिमाही में अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन किया. इस कारोबार में कच्चे तेल से पेट्रोलियम उत्पाद और केमिकल तैयार किए जाते हैं.
- कंपनी के O2C कारोबार का रेवेन्यू सालाना आधार पर 44.2% बढ़कर 2.32 लाख करोड़ रुपये हो गया. वहीं, इस कारोबार का EBITDA 67.9% उछलकर रिकॉर्ड 25,203 करोड़ रुपये पहुंच गया.
- EBITDA को कंपनी के मुख्य कारोबार से होने वाली कमाई का एक पैमाना है. इसमें ब्याज, टैक्स और कुछ दूसरे खर्चों को शामिल नहीं किया जाता.
- कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 1.6 प्रतिशत अंक बढ़कर 10.9% हो गया. इसका मतलब है कि कंपनी अपने कारोबार से पहले के मुकाबले ज्यादा कमाई निकालने में सफल रही.
- इस दौरान ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल होने वाले ईंधन के रिफाइनिंग मार्जिन भी पिछले साल के मुकाबले 3 से 3.7 गुना तक बढ़ गए. तिमाही के दौरान ये ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गए.
तीसरी तिमाही में भी क्यों बनी रह सकती है तेजी?
अब सवाल है कि सितंबर तिमाही में शानदार कमाई के बाद क्या रिलायंस का प्रदर्शन अक्टूबर से दिसंबर के बीच भी ऐसा ही रह सकता है? Chola Securities के धर्मेश कांत का मानना है कि कंपनी को जिन वैश्विक हालात का फायदा दूसरी तिमाही में मिला, उनका असर तीसरी तिमाही में भी जारी रह सकता है. उन्होंने रिलायंस के नतीजों को मजबूत बताया और शेयर में गिरावट आने पर खरीदारी करने की सलाह दी है. इस उम्मीद की एक वजह यह है कि दुनिया में पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई और उनकी मांग से जुड़ी परिस्थितियां अभी भी रिफाइनिंग कारोबार के लिए अनुकूल रह सकती हैं.
Nomura ने भी रिलायंस के सितंबर तिमाही के नतीजों को मजबूत बताया है. उसके मुताबिक, कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA पिछली तिमाही के मुकाबले 19% बढ़ा और उसके अनुमान से 9% ज्यादा रहा. इसमें O2C कारोबार की बड़ी भूमिका रही.
जहाज से तेल मंगाना महंगा, लेकिन सस्ता कच्चा तेल देगा राहत
- रिलायंस के सामने एक चुनौती भी है. दुनिया के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक कच्चा तेल लाने के लिए बड़े-बड़े जहाजों का इस्तेमाल होता है. इन जहाजों को चलाने और तेल पहुंचाने का खर्च बढ़ने पर कंपनी की लागत भी बढ़ जाती है.
- गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि तीसरी तिमाही में बहुत बड़े कच्चा तेल वाहक जहाजों (VLCC) का भाड़ा यानी माल ढुलाई का खर्च बढ़ने से रिलायंस के रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव आ सकता है.
- लेकिन यहां कंपनी के लिए राहत की बात भी है. रिलायंस रियायती कीमत पर मिलने वाला भारी कच्चा तेल प्रोसेस करके इस बढ़े हुए खर्च की कुछ भरपाई कर सकती है.
- यानी एक तरफ तेल को भारत तक लाने का खर्च बढ़ सकता है, लेकिन दूसरी तरफ अगर कच्चा तेल ही कम कीमत पर मिलता है, तो कंपनी को कुछ राहत मिल सकती है.
पेट्रोकेमिकल कारोबार ने भी दिया साथ
रिलायंस को सिर्फ पेट्रोल और डीजल बनाने से ही फायदा नहीं हुआ है. उसके पेट्रोकेमिकल कारोबार का प्रदर्शन भी बेहतर रहा. कंपनी के पॉलिएस्टर कारोबार का मार्जिन तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया. इसके पीछे पैराक्साइलीन (PX) के स्प्रेड में 15% और प्यूरिफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड (PTA) के स्प्रेड में 52% की बढ़ोतरी रही. ये ऐसे कच्चे माल हैं जिनका इस्तेमाल पॉलिएस्टर से जुड़े उत्पाद बनाने में होता है. इनके दाम और तैयार उत्पाद की बिक्री कीमत के बीच अंतर बढ़ने से कंपनी को ज्यादा फायदा मिलता है.
रिलायंस के शेयर पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय?
कंपनी के मजबूत नतीजों के बाद ब्रोकरेज कंपनियों ने भी रिलायंस पर अपना भरोसा बनाए रखा है. गोल्डमैन सैक्स ने शेयर पर खरीदारी की रेटिंग बरकरार रखते हुए 1,840 रुपये का टारगेट दिया है. वहीं, Nomura ने भी खरीदारी की रेटिंग बनाए रखी है और 1,560 रुपये का टारगेट दिया है. सोमवार को शेयर में आई करीब 8.1% की तेजी ने भी निवेशकों का ध्यान खींचा है. हालांकि, ब्रोकरेज के टारगेट अनुमान हैं, शेयर वहां तक पहुंचेगा इसकी गारंटी नहीं है.