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How can a protect itself from horse bees: जोधपुर के पांचबत्ती चौराहे पर घोड़ा मधुमक्खी (एपिस डोरसाटा) के हमले से एक व्यक्ति की मौत और कई लोग घायल हो गए. सामान्य से बड़ी यह जंगली मक्खी छत्ते के पास हलचल होने पर सैकड़ों की संख्या में सिर और चेहरे पर हमला करती है. इसके कई डंक जानलेवा हो सकते हैं. हमले की स्थिति में तुरंत बंद कमरे में जाएं, सिर ढकें और गंभीर होने पर तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचें.
Jodhpur: मधुमक्खी का नाम लेते ही अक्सर मन में शहद और छोटे आकार के कीटों की छवि बनती है, लेकिन प्रकृति में कुछ ऐसी प्रजातियां भी मौजूद हैं जिनका गुस्सा इंसान के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. हाल ही में जोधपुर के पांचबत्ती चौराहे के पास घोड़ा मधुमक्खी के हमले से एक व्यक्ति की मौत और कई लोगों के घायल होने की घटना ने सभी को दहशत में डाल दिया है.
विशेषज्ञों के अनुसार, जिसे स्थानीय भाषा में ‘घोड़ा मक्खी’ कहा जाता है, वह असल में विशाल जंगली मधुमक्खी यानी रॉक बी है, जिसका वैज्ञानिक नाम एपिस डोरसाटा है. यह सामान्य घरेलू मधुमक्खियों की तुलना में काफी बड़ी होती है. इसके शरीर का रंग काला और पीला-भूरा होता है तथा इसके पंख बहुत मजबूत और पारदर्शी होते हैं. ये आमतौर पर ऊंचे पेड़ों, बड़ी चट्टानों और ऊंची इमारतों पर अपने खुले छत्ते बनाती हैं.
रेस्क्यू विशेषज्ञ टीआर शर्मा और दिनेश कुमावत के अनुसार, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘घोड़ा मक्खी’ कहा जा रहा है, वह असल में बड़ी जंगली मधुमक्खी यानी रॉक बी (Rock Bee) है.
- वैज्ञानिक नाम: एपिस डोरसाटा (Apis dorsata)
- शारीरिक बनावट: यह सामान्य घरेलू मधुमक्खी से आकार में काफी बड़ी होती है. इसका शरीर काले और पीले-भूरे रंग का होता है तथा इसके पंख बहुत मजबूत और पारदर्शी होते हैं.
- रहने का स्थान: यह आमतौर पर ऊंचे पेड़ों, बड़ी चट्टानों और ऊंची इमारतों की छतों या दीवारों पर अपने खुले छत्ते बनाती है.
- सतर्कता: छत्ते के आसपास किसी भी व्यक्ति की हलचल महसूस होते ही इसकी पहरेदार मधुमक्खियां तुरंत अलर्ट हो जाती हैं.
खतरा महसूस होते ही कैसे होता है सामूहिक हमला?
इन जंगली मधुमक्खियों का सबसे खतरनाक पहलू इनका सामूहिक हमला (Group Attack) करने का तरीका है.
- चेतावनी का संकेत: छत्ते के पास किसी व्यक्ति के पहुंचने पर सबसे पहले तेज भिनभिनाहट की आवाज सुनाई देती है.
- हमले की प्रक्रिया: इसके बाद कुछ मधुमक्खियां खतरे की दिशा में उड़ती हैं और यदि खतरा बना रहता है, तो सैकड़ों की संख्या में मधुमक्खियां एक साथ हमला कर देती हैं.
- निशाना: ये मुख्य रूप से सिर, चेहरे, गर्दन और शरीर के अन्य खुले हिस्सों पर डंक मारती हैं.
शरीर पर प्रभाव:
- एक-दो डंक लगने से तेज दर्द, जलन और सूजन की समस्या होती है.
- बड़ी संख्या में डंक लगने पर उल्टी, चक्कर आना और शरीर में गंभीर विषाक्त प्रभाव (टॉक्सिसिटी) फैल सकते हैं.
- जिन लोगों को इसके जहर से विशेष एलर्जी होती है, उनके लिए एक अकेला डंक भी जानलेवा साबित हो सकता है.
जोधपुर के पांचबत्ती चौराहे पर क्या हुआ था?
जोधपुर में एयरपोर्ट रोड स्थित पांचबत्ती चौराहे के पास, पोलो ग्राउंड के बाहर टिड्डी दल नियंत्रक कार्यालय के नजदीक घोड़ा मक्खियों के अचानक हुए हमले से पूरे इलाके में भयंकर दहशत फैल गई थी.
- घायलों की संख्या: स्थिति इतनी भयावह थी कि एक ही दिन में 15 से 20 लोगों को इन मक्खियों ने अपना निशाना बनाया, जबकि अगले दिन सुबह भी 5 से 7 लोगों के काटे जाने की सूचना सामने आई.
- मौत की घटना: इसी दर्दनाक हमले के दौरान घोड़ा मक्खी के काटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी.
- रेस्क्यू ऑपरेशन: वन विभाग से सूचना मिलने पर रेस्क्यू विशेषज्ञ टीआर शर्मा और दिनेश कुमावत सुबह करीब 7:30 बजे मौके पर पहुंचे. उस समय भी मधुमक्खियां राहगीरों पर लगातार हमला कर रही थीं.
- दहशत का माहौल: जो लोग बंद वाहनों के अंदर थे, उन्हें कम परेशानी हुई, लेकिन पैदल चलने वाले राहगीर इसकी बुरी तरह चपेट में आ गए. डर के मारे कुछ ट्रैक्टर चालक अपने वाहन वहीं छोड़कर भाग खड़े हुए. पास ही स्थित आईजी कार्यालय के अंदर मौजूद लोग भी काफी परेशान रहे. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञों ने वहां मौजूद ऐसे 3 खतरनाक छत्तों को सुरक्षित रूप से हटाया.
हमला होने पर क्या करें और कैसे बचाएं अपनी जान?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कभी मधुमक्खियों का झुंड आप पर हमला कर दे, तो घबराने के बजाय तुरंत इन बातों का ध्यान रखें:
- सुरक्षित स्थान पर शरण लें: तुरंत छत्ते की जगह से दूर भागकर किसी बंद कमरे, दुकान या वाहन के अंदर शरण ले लें.
- सिर और चेहरा ढकें: भागते समय अपने सिर, चेहरे और गर्दन को किसी कपड़े, जैकेट या चादर से अच्छी तरह ढक लें.
- पानी में न कूदें: पानी के टैंक या तालाब में कूदकर बचने की गलती बिल्कुल न करें, क्योंकि मधुमक्खियां पानी के ऊपर मंडराती रहती हैं और बाहर निकलते ही दोबारा हमला कर देती हैं.
- डंक हटाएं: सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के बाद चिमटी की मदद से शरीर में लगे डंकों को बाहर निकालें.
- तुरंत अस्पताल जाएं: यदि कई डंक लगे हैं या सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना, चेहरे और गले में सूजन जैसी गंभीर समस्याएं महसूस हों, तो बिना किसी देरी के तत्काल चिकित्सा सहायता (अस्पताल) लें.