छठ में बन रहा है अद्भुत संयोग, अर्घ्य देने से दूर हो होगा कुंडली का सूर्य दोष
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छठ पूजा पर इस बार रविवार के दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने का खास संयोग बन रहा है. ज्योतिषियों के अनुसार, इससे कुंडली का सूर्य दोष दूर होता है. सूर्य देव की विधि-विधान से उपासना करने और बीज मंत्र का जाप करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है.
देवघरः छठ पूजा का महापर्व आने में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं. बिहार, झारखंड समेत देश के कई राज्यों में इस पर्व को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. छठ पूजा सिर्फ आस्था और विश्वास का पर्व नहीं है, बल्कि ज्योतिष शास्त्र में भी इसका विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि छठ महापर्व के दौरान भगवान सूर्य को विधि-विधान से अर्घ्य देने और उनकी उपासना करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है. लेकिन इस बार छठ पूजा में एक ऐसा विशेष संयोग बनने जा रहा है. जिसे ज्योतिषीय दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. खासकर उन लोगों के लिए यह पर्व बेहद खास हो सकता है, जिनकी कुंडली में सूर्य ग्रह कमजोर है या सूर्य दोष से जुड़ी परेशानियां बनी हुई हैं.
बन रहा है बेहद खास संयोग
दरअसल, साल 2026 में छठ महापर्व की शुरुआत 13 नवंबर को नहाय-खाय के साथ होने जा रही है. इसके अगले दिन यानी 14 नवंबर को खरना होगा. वहीं 15 नवंबर को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और 16 नवंबर को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ चार दिवसीय महापर्व का समापन होगा. इस बार खास बात यह है कि अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य रविवार के दिन दिया जाएगा. ज्योतिष शास्त्र में रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित माना जाता है. ऐसे में रविवार को सूर्यास्त के समय सूर्यदेव की उपासना और अर्घ्य देने का विशेष महत्व बताया जा रहा है.जो इस साल छठ पूजा मे संयोग बन रहा है.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुद्गल ने लोकल 18 को बताया कि जिन जातकों की कुंडली में सूर्य कमजोर स्थिति में है या सूर्य दोष से संबंधित समस्याएं हैं, उन्हें छठ महापर्व के दौरान विशेष रूप से सूर्यदेव की आराधना करनी चाहिए. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार कुंडली में कमजोर सूर्य होने पर व्यक्ति को आत्मविश्वास की कमी, मानसिक तनाव, मान-सम्मान में परेशानी और जीवन में बार-बार बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. कुछ लोग लगातार स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से भी जूझते रहते हैं. ऐसे में छठ पूजा के दौरान पूरी श्रद्धा और नियम के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है.
भगवान सूर्य के बीज मन्त्र का जाप करते हुए दें अर्घ्य
पंडित नंद किशोर मुदगल के अनुसार इस बार रविवार के दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने का संयोग बनना विशेष महत्व रखता है. ऐसे में जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर है, वे छठ पूजा के दौरान सूर्यदेव की उपासना करते हुए उनके बीज मंत्र का जाप कर सकते हैं. इसके लिए ‘ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करने की ज्योतिषीय सलाह दी जाती है. इसके बाद पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ सूर्यदेव को अर्घ्य प्रदान करना चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से सूर्य ग्रह से जुड़ी अशुभता कम करने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है.
संयम नियम और शुद्धता को ध्यान में रखते हुए मनाना चाहिए यह पर्व
उन्होंने बताया कि छठ महापर्व में सूर्यदेव के साथ छठी मैया की भी पूजा की जाती है. इस दौरान व्रती कठिन नियमों का पालन करते हुए चार दिनों तक पूजा-अर्चना करते हैं. नहाय-खाय से शुरू होने वाली यह परंपरा खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य तक चलती है. इसलिए इस पर्व में केवल एक दिन ही नहीं, बल्कि चारों दिनों का अपना अलग धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. ऐसे में श्रद्धालुओं को पूरे नियम, संयम और साफ-सफाई के साथ पूजा करनी चाहिए.