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Bhiwani Teacher Manisha Death Case: भिवानी की शिक्षिका मनीषा मौत मामले में कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी है. पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं. परिजनों ने रिपोर्ट को चुनौती दी थी.
भिवानी. हरियाणा के भिवानी की प्ले-स्कूल शिक्षिका मनीषा मौत मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट ने खारिज कर दी है. परिजनों की ओर से इसे कोर्ट में चुनौती दी गई थी. याचिका पर पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई हुई और इस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए दोबारा जांच के आदेश दिए गए. ऐसे में जल्द ही इस मामले में सीबीआई दोबारा जांच करेगी.
मनीषा के पिता संजय ने बताया कि कोर्ट का फैसला आने के बाद अब दोबारा से न्याय की उम्मीद जगी है. उन्होंने कहा कि सीबीआई ने करीब डेढ़ साल तक इस पूरे मामले की जांच पड़ताल की गई और मौत को आत्महत्या बताते हुए क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दायर की थी. उन्होंने क्लोजर रिपोर्ट को चैलेंज किया था और कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए मनीष मौत मामले की दोबारा से सीबीआई जांच करवाने के आदेश दिए हैं.
मनीषा के पिता के वकील भगवान सिंह ने बताया कि इस आदेश के बाद परिजनों और समाज को उम्मीद की किरण दिखाई दी है. सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को निरस्त करते हुए और अब दोबारा इस मामले को लेकर जांच पड़ताल की जाएगी. सीनियर आईपीएस अधिकारी इस मामले की जांच करेंगे. उन्होंने कहा कि अब क्लोजर रिपोर्ट सीबीआई को वापस जाएगी. वकील ने बताया कि इस मामले में जो तथ्य थे, वह आत्महत्या की तरफ नहीं जा रहे थे और क्लोजर रिपोर्ट आत्महत्या की दी गई थी. भगवान सिंह ने कहा कि हम सरकार से भी निवेदन करते हैं हरियाणा व केंद्र सरकार हमें न्याय दें और हमारी लड़ाई सरकार के खिलाफ नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार मनीषा को न्याय दिलाने के लिए सहयोग करें.
क्या है पूरा मामला
हरियाणा के भिवानी की 19 वर्षीय मनीषा 11 अगस्त 2025 को भिवानी के ढाणी लक्ष्मण गांव से लापता हुई थीं और 13 अगस्त 2025 को उसका शव सिंघानी गांव के खेतों में मिला था. शुरुआत में पुलिस इसे आत्महत्या मान रही थी, लेकिन परिजनों के विरोध के बाद यह मामला सीबीआई को सौंपा गया था. सीबीआई ने जांच के बाद 12 अगस्त 2026 को पंचकूला की विशेष अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए इस मौत को आत्महत्या बताया. मृतका के पिता संजय कुमार और उनके वकील एडवोकेट हर्ष मोहन सिंह ने इस क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ विरोध याचिका दाखिल की है. इसमें सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग, एफएसएल रिपोर्ट और घटनास्थल के साक्ष्यों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं.