एक खेत में धान की 5 वैरायटी, एमएससी एजी कर रहे किसान ने बताया अपना प्रयोग
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धान की खेती में अच्छी पैदावार हासिल करने के लिए सही किस्म का चुनाव बेहद जरूरी है. गोंडा के युवा किसान हरिओम मिश्रा ने इसका प्रयोग अपने खेत में किया है. उन्होंने करीब 5 एकड़ में धान की पांच अलग-अलग वैरायटी लगाई हैं. खास बात यह है कि वह एमएससी एजी की पढ़ाई के साथ खेती भी कर रहे हैं. आइए जानते हैं इन पांचों किस्मों को लगाने की वजह और इनसे होने वाली कमाई का गणित.
हरिओम मिश्रा को शुरू से ही खेती में रुचि रही है. इसी वजह से वह एमएससी एजी की पढ़ाई के साथ खेतों में भी काम कर रहे हैं. कृषि की पढ़ाई से मिलने वाली जानकारी को वह खेती में इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि बेहतर उत्पादन के तरीके समझ सकें.
हरिओम मिश्रा को शुरू से ही खेती में रुचि रही है. इसी वजह से वह एमएससी एजी की पढ़ाई के साथ खेतों में भी काम कर रहे हैं. कृषि की पढ़ाई से मिलने वाली जानकारी को वह खेती में इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि बेहतर उत्पादन के तरीके समझ सकें.
हरिओम के मुताबिक, इन पांचों किस्मों में कावेरी धान सबसे जल्दी तैयार होता है. इसे पकने में करीब 70 से 80 दिन का समय लगता है. इसकी कटाई भी हो चुकी है और किसान को इससे अच्छी आमदनी हुई है.
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6444 और 2244 वैरायटी को तैयार होने में करीब 110 से 120 दिन का समय लगता है. किसान ने इन दोनों किस्मों को भी अपने खेत में लगाया है, ताकि इनके उत्पादन और खेती के अनुभव को समझ सकें.
काला नमक और संभा मंसूरी धान की फसल को तैयार होने में करीब 140 से 150 दिन लगते हैं. इन किस्मों का समय दूसरी वैरायटी के मुकाबले ज्यादा है. किसान के मुताबिक, गोंडा के वातावरण और खेती के लिहाज से ये पांचों किस्में अच्छी हैं.
हरिओम मिश्रा के अनुसार, धान की खेती में एक एकड़ पर करीब 15 हजार रुपये की लागत आती है. इससे लगभग 30 हजार रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है. उनका कहना है कि किसानों को अपनी जमीन और मौसम के अनुसार अलग-अलग किस्मों की जानकारी लेकर धान की खेती करनी चाहिए.