बैंक FD में पैसा लगाएं या PPF में करें निवेश? जानें कहां रहेगा फायदेमंद
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Investment Planning: निवेश के लिए PPF और FD में से किसे चुनें. इकोनॉमिस्ट आकाश जिंदल के मुताबिक PPF में लॉक-इन अवधि होती है, जबकि FD में लिक्विडिटी की सुविधा मिलती है. दोनों में संतुलन बनाकर निवेश करना बेहतर है. आइये जानते हैं इसके बारे में.
दिल्ली: अक्सर निवेश करते समय सिर्फ अच्छा रिटर्न देखना ही काफी नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि जरूरत पड़ने पर अपना पैसा कितनी आसानी से निकाला जा सकता है. कई लोग सुरक्षित निवेश के लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का ऑप्शन चुनते हैं, लेकिन इन दोनों में से किसमें पैसा लगाना ज्यादा सही रहेगा. इसका जवाब आपकी जरूरत, निवेश के लक्ष्य और पैसों की उपलब्धता पर निर्भर करता है.
PPF में पैसा लगाने से पहले समझें ये बात
इकोनॉमिस्ट आकाश जिंदल के मुताबिक, PPF और FD में निवेश का फैसला लेते समय सबसे अहम फैक्टर लिक्विडिटी यानी जरूरत पड़ने पर पैसे निकालने की सुविधा है. PPF में पैसा निकालने के नियम और सीमाएं होती हैं. ऐसे में अगर निवेशक को बीच में पैसों की जरूरत पड़ जाए, तो वह अपनी पूरी रकम आसानी से नहीं निकाल सकता. PPF उन लोगों के लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है, जो लंबे समय के लिए बचत करना चाहते हैं और जिन्हें तुरंत पैसों की जरूरत पड़ने की आशंका कम है, लेकिन इसमें निवेश करने से पहले लॉक-इन अवधि और निकासी से जुड़े नियम समझना जरूरी है.
FD की सबसे बड़ी ताकत है पैसों तक आसान पहुंच
आकाश जिंदल बताते हैं कि FD की सबसे बड़ी खासियत उसकी लिक्विडिटी है. आज ऑनलाइन बैंकिंग के दौर में निवेशक बैंक के नियमों और FD की शर्तों के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर रात में भी अपनी FD तुड़वाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. हालांकि, समय से पहले FD तोड़ने पर पेनल्टी या ब्याज में कटौती हो सकती है. उनके मुताबिक, जिंदगी में कभी भी अचानक पैसों की जरूरत पड़ सकती है. ऐसी स्थिति में अगर अपनी बचत होने के बावजूद पैसा नहीं निकाल पाए, तो दोस्त या रिश्तेदारों से मदद मांगने की नौबत आ सकती है. इसलिए निवेश में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि जरूरत के समय अपने ही पैसे काम आ सकें.
PPF और FD में कैसे बनाएं बैलेंस
आकाश जिंदल की सलाह है कि निवेशकों को अपनी पूरी बचत किसी एक ही ऑप्शन में लगाने के बजाय PPF और FD के बीच संतुलन बनाना चाहिए. कुछ पैसा PPF में लंबे समय के लक्ष्य के लिए रखा जा सकता है, जबकि कुछ रकम FD में रखकर जरूरत के समय पैसों की उपलब्धता बनाए रखी जा सकती है, लेकिन इमरजेंसी के लिए अलग से आसानी से उपलब्ध रकम रखना भी जरूरी है. निवेश का चुनाव अपनी आमदनी, खर्च, वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखकर करना चाहिए.