महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा है सर्वाइकल कैंसर, हर 7 मिनट में एक मौत! जानें पैप स्मीयर टेस्ट और वैक्सीनेशन की अहमियत

महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा है सर्वाइकल कैंसर, हर 7 मिनट में एक मौत! जानें पैप स्मीयर टेस्ट और वैक्सीनेशन की अहमियत


नई दिल्लीः महिलाओं की सेहत से जुड़ी कई ऐसी बीमारियां हैं, जिनके बारे में जानकारी की कमी उन्हें बड़े खतरे में डाल सकती है. सर्वाइकल कैंसर भी ऐसी ही एक बीमारी है.हैरानी की बात यह है कि कई महिलाओं को आज भी यह नहीं पता कि सर्विक्स क्या होता है और इस कैंसर का असर शरीर के किस हिस्से पर पड़ता है. सर्विक्स गर्भाशय का निचला हिस्सा होता है, जो योनि से जुड़ा रहता है. इसी हिस्से में होने वाले कैंसर को सर्वाइकल कैंसर कहा जाता है.

क्या है सर्वाइकल कैंसर और कैसे होता है?
RG Hospitals में प्रैक्टिस कर रहीं महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञ और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पलक दीवान स्त्री रोग विशेषज्ञ के मुताबिक, सर्वाइकल कैंसर के ज्यादातर मामलों का संबंध ह्यूमन पैपिलोमा वायरस यानी HPV के लंबे समय तक शरीर में बने रहने से होता है. यह वायरस मुख्य रूप से यौन संपर्क के जरिए फैल सकता है. हालांकि, HPV संक्रमण होने का मतलब यह नहीं है कि महिला को कैंसर होगा. ज्यादातर HPV संक्रमण अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ हाई-रिस्क प्रकार के वायरस लंबे समय तक बने रहने पर कैंसर का कारण बन सकते हैं.

किन महिलाओं को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत
डॉ. पलक के मुताबिक, सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए जागरूकता और समय पर जांच बेहद जरूरी है. HPV संक्रमण, खासकर हाई-रिस्क HPV का लंबे समय तक बने रहना, इसका प्रमुख कारण है. इसके अलावा HIV या कमजोर इम्यूनिटी, धूम्रपान और नियमित स्क्रीनिंग न कराना भी खतरे को बढ़ा सकता है. कई यौन साथी होने से HPV संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है, लेकिन केवल इस आधार पर किसी महिला को कैंसर होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. अच्छी साफ-सफाई रखना जरूरी है, हालांकि सर्वाइकल कैंसर को सिर्फ हाइजीन की कमी से जोड़ना सही नहीं है.

कब करानी चाहिए जांच
सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए स्क्रीनिंग काफी अहम है. इसके लिए पैप स्मीयर और HPV DNA टेस्ट जैसे विकल्प मौजूद हैं. पैप स्मीयर में सर्विक्स की कोशिकाओं में होने वाले बदलावों की जांच की जाती है, जबकि HPV DNA टेस्ट से कैंसर का खतरा बढ़ाने वाले वायरस की पहचान की जा सकती है. जांच कब और कितने अंतराल पर करानी चाहिए, यह उम्र, पिछली जांच की रिपोर्ट और मेडिकल हिस्ट्री पर निर्भर करता है. इसलिए डॉक्टर की सलाह से स्क्रीनिंग कराना जरूरी है. असामान्य ब्लीडिंग, पीरियड्स के बीच खून आना, संबंध बनाने के बाद ब्लीडिंग या असामान्य डिस्चार्ज जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे लक्षण होने पर स्क्रीनिंग की तय उम्र का इंतजार किए बिना डॉक्टर से मिलना चाहिए.

वैक्सीन से कैसे मिलेगी सुरक्षा
डॉ. पलक के मुताबिक, सर्वाइकल कैंसर से बचाव में HPV वैक्सीन की अहम भूमिका है. यह वैक्सीन कैंसर पैदा करने वाले HPV के कुछ प्रकारों से बचाव करती है. इसे यौन संपर्क शुरू होने से पहले लगवाने पर सबसे ज्यादा फायदा मिलता है. हालांकि, वैक्सीन लगवाने के बाद भी स्क्रीनिंग जरूरी रहती है, क्योंकि कोई भी वैक्सीन सभी प्रकार के HPV से पूरी सुरक्षा नहीं देती. भारत में HPV वैक्सीनेशन को लेकर जागरूकता बढ़ रही है. गार्डासिल-4, गार्डासिल-9 और भारत में विकसित सर्वावैक जैसे टीके उपलब्ध हैं. वैक्सीन की उम्र, डोज और उपलब्धता के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

समय पर जानकारी ही सबसे बड़ा बचाव
सर्वाइकल कैंसर के मामले में सबसे जरूरी है कि महिलाएं अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें. सही उम्र में वैक्सीनेशन, डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्क्रीनिंग और किसी भी असामान्य लक्षण पर जांच से बीमारी के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है. जागरूकता और समय पर कदम उठाकर इस कैंसर से होने वाली कई गंभीर परेशानियों से बचा जा सकता है.



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