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Ground Report Jamui: जमुई में दीपावली पर कुम्हार दीये बनाने में जुटे हैं, लेकिन चक्रवाती तूफान अर्णव और खराब मौसम के कारण उत्पादन आधा रह गया है. मोहन पंडित जैसे कारीगरों को पिछले साल के 40 हजार दीयों की तुलना में इस बार आधे दीये बनाना भी मुश्किल हो रहा है, जिससे परिवारों की चिंता बढ़ गई है.
अर्णव तूफान के कारण जमुई में दीयों का उत्पादन आधा हुआ.
Ground Report Jamui: दीपावली में अब कुछ ही दिन शेष हैं. ऐसे में जमुई में कुम्हारों के घरों में मिट्टी के दीये और खिलौने बनाने का काम तेज हो गया है. पर चक्रवाती तूफान अर्णव के कारण खराब मौसम ने कुम्हारों की परेशानी बढ़ा दी है. बारिश और मौसम की मार के चलते इस बार पिछले साल की तुलना में मिट्टी के दीयों का उत्पादन काफी कम होने की आशंका है. कारीगरों का कहना है कि मौसम खराब रहने के कारण दीयों को तैयार करने और सुखाने में परेशानी हुई है. मौसम में सुधार के बाद अब कुम्हार परिवार के सभी सदस्य दीपावली की तैयारी में जुट गए हैं.
मौसम की मार ने बढ़ाई परेशानी
जमुई शहर के शिवनडीह मोहल्ले में रहने वाले 60 वर्षीय मोहन पंडित भी इन दिनों दीये बनाने में व्यस्त हैं. मोहन पंडित पिछले 48 वर्षों से मिट्टी के दीये बना रहे हैं. उन्होंने महज 12 साल की उम्र से इस काम की शुरुआत की थी. उनके परिवार की कई पीढ़ियों से मिट्टी के बर्तन और दीये बनाने का काम होता रहा है. इस बार मौसम की मार ऐसी पड़ी है कि उनके परिवार को पिछले साल की तुलना में आधे दीये भी तैयार कर पाना मुश्किल लग रहा है.
40 हजार दीयों से घटकर आधे से भी कम उत्पादन का अनुमान
मोहन पंडित के परिवार ने पिछले साल दीपावली के मौके पर करीब 40 हजार मिट्टी के दीये तैयार किए थे. लेकिन इस बार खराब मौसम के कारण उत्पादन काफी प्रभावित हुआ है. मोहन पंडित ने कहा कि इस साल मुश्किल से पिछले साल के मुकाबले आधे दीये ही तैयार हो पाएंगे. दीपावली का त्योहार नजदीक होने के कारण अब परिवार के सभी सदस्य उत्पादन बढ़ाने में जुटे हैं. मोहन पंडित के तीन बेटे हैं. इनमें से दो बेटे राजमिस्त्री का काम करते हैं. दीपावली के लिए दीयों की मांग और कम समय को देखते हुए दोनों बेटों ने फिलहाल अपना काम छोड़ दिया है. अब वे भी पिता के साथ चाक चलाने और मिट्टी के दीये बनाने में हाथ बंटा रहे हैं. परिवार के महिला और अन्य सदस्य भी दीये और मिट्टी के खिलौने तैयार करने में लगे हैं.
मौसम की मार से बढ़ी कुम्हारों की चिंता
कुम्हारों के लिए दीपावली साल का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है. इस दौरान मिट्टी के दीयों और खिलौनों की मांग बढ़ जाती है. खराब मौसम के कारण इस बार उनका काम प्रभावित हुआ है. दीये बनाने के बाद उन्हें सुखाने और तैयार करने के लिए अनुकूल मौसम की जरूरत होती है. ऐसे में चक्रवाती तूफान के प्रभाव से बदले मौसम ने कारीगरों की मुश्किलें बढ़ा दीं. मौसम ठीक होने के बाद अब मोहन पंडित का पूरा परिवार दिन-रात मेहनत कर रहा है, ताकि दीपावली तक ज्यादा से ज्यादा दीये तैयार किए जा सकें. एक तरफ त्योहार की रौनक बढ़ाने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ मौसम की मार से हुए नुकसान की चिंता भी कुम्हार परिवार को सता रही है.