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मुंगेर में अर्णब साइक्लोन के असर से तेज हवाओं के कारण हवेली खड़गपुर के प्रसंडो गांव में तैयार धान की फसल खेतों में गिर गई है. कटाई से कुछ दिन पहले फसल बर्बाद होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट पैदा
मुंगेर: बिहार के मुंगेर जिले में अर्णब साइक्लोन किसानों पर कहर बनकर टूटा है. हवेली खड़गपुर प्रखंड के प्रसंडो गांव में तेज हवाओं ने किसानों की तैयार धान की फसल को खेतों में गिरा दिया है. हालात यह हैं कि जिस फसल की कटाई महज दो से चार दिनों में शुरू होने वाली थी, वह अब बर्बादी के कगार पर पहुंच गई है. महीनों की मेहनत और हजारों रुपये की लागत के बाद अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे किसानों के सामने अब आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.
तस्वीरें मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर प्रखंड अंतर्गत प्रसंडो गांव की हैं, जहां अर्णब साइक्लोन के प्रभाव से चली तेज हवाओं ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेतों में पककर तैयार धान की फसल हवा के दबाव से जमीन पर गिर गई है।गांव के किसान बंटू कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने करीब 10 से 12 बीघा जमीन में धान की खेती की थी। चार महीने तक खाद, बीज, दवा और सिंचाई पर लगातार खर्च करने के बाद फसल पूरी तरह तैयार हो चुकी थी. अगले दो से चार दिनों में कटाई शुरू करने की तैयारी थी, लेकिन अचानक आई प्राकृतिक आपदा ने पूरी मेहनत बर्बाद कर दी.
किसान बंटू कुमार सिंह का कहना है कि नुकसान सिर्फ उनके खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे इलाके के किसान इस समस्या से जूझ रहे हैं. वहीं, किसान दिवाकर सिंह की परेशानी और भी गंभीर है. उन्होंने कर्ज लेकर धान की खेती की थी. उम्मीद थी कि फसल बेचकर कर्ज चुकाने के साथ परिवार का भरण-पोषण करेंगे, लेकिन तैयार फसल के खेतों में गिर जाने से अब उनके सामने कर्ज चुकाने का संकट खड़ा हो गया है. किसानों का कहना है कि खेतों में गिरी धान की फसल की कटाई करना काफी मुश्किल होगा. वहीं, अगर बारिश होती है तो धान के दाने खराब होने और पैदावार में और कमी आने की आशंका है. ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान की दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है.
सरकार और प्रशासन कब लेगा किसानों की सुध
प्राकृतिक आपदा से परेशान प्रसंडो गांव के किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से अविलंब नुकसान का आकलन कराने की मांग की है। किसानों की मांग है कि अधिकारियों की टीम गांव पहुंचकर खेतों का स्थलीय निरीक्षण करे और फसल क्षति का वास्तविक आकलन कर सरकारी प्रावधानों के तहत उचित मुआवजा एवं कृषि सहायता उपलब्ध कराए, ताकि आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों को राहत मिल सके. अब देखना होगा कि किसानों की इस पीड़ा पर जिला प्रशासन और कृषि विभाग कब तक संज्ञान लेते हैं.