‘मोतियों का राजा’ मध्यप्रदेश के उदय होने का गवाह है मोतीमहल, ‘मध्य भारत’ की विधानसभा, 20 करोड़ का झूमर बढ़ता है शान

‘मोतियों का राजा’ मध्यप्रदेश के उदय होने का गवाह है मोतीमहल, ‘मध्य भारत’ की विधानसभा, 20 करोड़ का झूमर बढ़ता है शान


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Madhya Pradesh Foundation Day: 1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश अस्तित्व में आया था. आज मध्य प्रदेश दिवस के मौके पर आपको ‘मध्य भारत’ राज्य की विधानसभा के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे मोती महल का नाम से जाना जाता है. क्या है इस महल का पूरा इतिहास आइये जानते हैं..

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ग्वालियर. आज मध्य प्रदेश दिवस है और 1956 में मध्य प्रदेश के उदय होने की कहानी ग्वालियर के मोती महल से ही शुरू हुई थी. ग्वालियर के मोती महल में ‘मध्य भारत’ राज्य की विधानसभा थी. आजादी के बाद मध्य भारत राज्य का गठन हुआ तो उसकी पहली विधानसभा ग्वालियर के मोती महल स्थित दरबार हाल में थी. यहां से 1948 से 1956 तक मध्य भारत राज्य चला. वहीं 1955-56 में मध्यप्रदेश के उदय होने की रूपरेखा पर मोहर भी दरबार हॉल स्थित मध्य भारत की विधानसभा में ही लगी थी. पढ़िए ये ख़ास स्टोरी..

1825 में दौलतराव सिंधिया ने और फिर 1827 में जयाजीराव सिंधिया ने मोती महल का निर्माण करवाया था. उस दौर में 900 से 1200 कमरे, 52 चौक और 9 बावड़ियां थी. इसके सामने खूबसूरत बैजाताल, जहां शाम को संगीत महफिलें सजती थी.

इसी महल को ‘मोतियों का राजा’ कहा जाता था, इसलिए नाम मोतीमहल पड़ गया. महल के अंदर दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, दीवारों पर रागमाला पेंटिंग, 200 साल पुरानी राधा-कृष्ण की पेंटिंग और दरबार हॉल में 15 किलो सोने का वर्क है. इसमे 1.5 टन का बेल्जियम ग्लास का झूमर है. कहते है कि दुनिया में ऐसे सिर्फ 2 झूमर हैं. एक यहां दूसरा जर्मनी की महारानी के महल में.

1947 में मध्य भारत की राजधानी बनी
देश आजाद होने पर 15 अगस्त 1947 को पहला तिरंगा मोती महल में ही फहराया गया था. ग्वालियर नव गठित ‘मध्य भारत’ राज्य की राजधानी बनी थी. मोती महल में दरबार हॉल को मध्य भारत की विधानसभा बनाया गया. 1948 में तत्कालीन गवर्नर महाराज जीवाजी राव सिंधिया ने मध्य भारत से पहले CM लीलाधर जोशी को शपथ दिलाई थी. 1948 से 1956 तक यहीं से 22 रियासतों वाले मध्य भारत की सरकार चली थी. मोती महल ग्वालियर की सत्ता का 200 साल का इतिहास है.

1956 में मध्य प्रदेश का गठन
1956 में जब राज्य का पुनर्गठन हुआ. ‘मध्य भारत’ को नए रूप में मध्य प्रदेश बनाया गया. मध्य प्रदेश के उदय होने की रूपरेखा भी ग्वालियर के मोती महल के दरबार हॉल स्थित ‘मध्य भारत’ की विधानसभा में बनी थी. आज मध्य भारत की पहली विधानसभा ‘दरबार हॉल’ को पर्यटन स्थल बना दिया है. इसे संग्रहालय के रूप में तब्दील किया गया है जहां दूर- दूर से पर्यटक आते हैं और मध्य भारत की पहली विधानसभा और मोती महल के 200 साल के इतिहास को देख गौरव का अनुभव करते हैं.

आज 20 करोड़ का है झूमर
बेल्जियम ग्लास का झूमर-दुनिया में सिर्फ 2 पीस बने हैं. एक जर्मनी की महारानी के महल में दूसरा ग्वालियर के मोती महल में है.1825 बेल्जियम कांच के झूमर यूरोप में सबसे महंगे माने जाते थे. मोती महल का 1.5 टन वाले झूमर की कीमत उस समय लगभग 1.5 लाख रुपये रही. आज ये एंटीक और हेरिटेज पीस है, ‘इस पर लगी 15 किलो सोने की पॉलिश आज के सोने से ज्यादा शुद्ध है. बीमा या एंटीक वैल्यू के हिसाब से देखो, तो आज बेल्जियम ग्लास का ऐसा 1.5 टन का कस्टम झूमर नया बनवाने में ही करीब 8 करोड़ रुपये से ज्यादा लगेगा. हेरिटेज वैल्यू जोड़ दें तो इसकी कीमत 25 करोड़ के करीब होगी. दुनिया में इसका दूसरा पीस सिर्फ जर्मनी में है.



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