Agency:एजेंसियां
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सोचिए आप MakeMyTrip से होटल बुक करें और आपको वहां होटल मिले ही न तो क्या होगा? ऐसे ही एक मामले में पंजाब के उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को दोषी ठहराया. कंपनी को 48,775 रुपये का रिफंड और मुआवजा देना होगा.
मेक माई ट्रिप पर बुकिंग के बाद होटल नहीं मिला.
कश्मीर की बर्फ वाली वादियों में परिवार संग छुट्टियां मनाने का सपना देख रहे थे राजेश चोहान. पैसे जोड़-जोड़कर MakeMyTrip से दो होटल बुक करवा लिए. लेकिन जब परिवार वहां पहुंचा तो होटल तो दूर, जगह पर भी कुछ नहीं मिला. श्रीनगर में होटल हेरिटेज रोज इन पहुंचे तो पता चला कि लिस्टेड होटल असल में एक निजी होमस्टे है. अगले दिन गुलमर्ग में होटल एप्पल ट्री रिजॉर्ट्स ढूंढने निकले, लेकिन वहां तो होटल का नामोनिशान तक नहीं था.
पत्नी और दो बच्चों के साथ फंसे परिवार के पास कोई उपाय नहीं बचा. रात को तापमान माइनस 4 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका था. पूरे परिवार को कार के अंदर ही रात काटनी पड़ी. पहले से बुक किए गोंडोला टिकट भी बेकार चले गए. अगले ही दिन निराश होकर परिवार गुरुदासपुर लौट आया. राजेश ने MakeMyTrip से बार-बार संपर्क किया, लेकिन कंपनी ने न कोई मदद की, न पैसे वापस किए. उल्टा कह दिया कि हम तो सिर्फ बिचौलिया हैं, होटल हमारे नहीं हैं. होटल वालों ने बुकिंग को नो-शो बता दिया.
कोर्ट ने सुनाई खरी-खरी
राजेश ने पंजाब के जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत की. आयोग ने फैसला सुनाते हुए MakeMyTrip की सारी दलीलें खारिज कर दीं. आयोग ने साफ कहा कि जब कोई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पूरा पैसा लेता है, कन्फर्म बुकिंग वाउचर जारी करता है और वेरिफाइड होटल का वादा करता है, तो वह अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता. आयोग ने पाया कि श्रीनगर वाला प्रॉपर्टी असल में होमस्टे था और गुलमर्ग वाला होटल अस्तित्व में ही नहीं था. नो-शो का बहाना भी नहीं चला, क्योंकि जो होटल है ही नहीं, उसमें चेक-इन कैसे होता?
MakeMyTrip को क्या-क्या देना पड़ा?
18,775 रुपये का पूरा रिफंड (9 फीसदी सालाना ब्याज के साथ)
25,000 रुपये मानसिक और शारीरिक परेशानी का मुआवजा
5,000 रुपये मुकदमे का खर्च
कुल मिलाकर 48,775 रुपये
बड़े प्लेटफार्म यह कहकर नहीं बच सकते कि हम तो बिचौलिये
आयोग ने MakeMyTrip को लापरवाही, सेवा में कमी और गलत व्यापार का दोषी ठहराया. यह फैसला उन हजारों यात्रियों के लिए राहत भरा है जो ऑनलाइन बुकिंग के भरोसे निकलते हैं और फिर फर्जी होटलों के जाल में फंस जाते हैं. अब बड़े प्लेटफॉर्म सिर्फ हम तो बिचौलिये हैं कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते.
इन 5 बातों का ध्यान रखें, आप कभी नहीं फंसेंगे
- होटल बुक करने से पहले गूगल मैप और गूगल अर्थ पर लोकेशन जरूर चेक करें. फोटो और रिव्यू देखकर पुष्टि कर लें कि होटल असल में उसी जगह मौजूद है या नहीं.
- सिर्फ बुकिंग साइट पर भरोसा न करें. होटल की आधिकारिक वेबसाइट, फोन नंबर और सोशल मीडिया पेज से संपर्क करके बुकिंग कन्फर्म करवा लें.
- हाल के गूगल और ट्रिपएडवाइजर रिव्यू जरूर पढ़ें. खासकर पिछले 1-2 महीने के रिव्यू में लोकेशन और असलियत से जुड़ी शिकायतें तो नहीं हैं.
- बुकिंग करते समय रिफंडेबल ऑप्शन चुनें. नॉन-रिफंडेबल डील सस्ती लगती है, लेकिन समस्या आने पर पैसा वापस मिलना मुश्किल हो जाता है.
- बुकिंग वाउचर मिलने के बाद होटल से सीधे कॉल या व्हाट्सऐप पर कन्फर्मेशन लें. पता, कमरे की उपलब्धता और चेक-इन समय दोबारा पूछ लें.