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खरगोन को विश्व पर्यटन मानचित्र पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से बन रहे नवग्रह लोक के निर्माण कार्य में अब तेजी लाने की तैयारी है. करीब 25 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहे इस कॉरिडोर का रविवार देर शाम प्रदेश के सहकारिता मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री विश्वास सारंग ने निरीक्षण किया
मध्य प्रदेश के खरगोन में नवग्रह लोक को भव्य धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका निर्माण महाकाल लोक की तर्ज पर किया जा रहा है. परियोजना का उद्देश्य नवग्रह मंदिर की धार्मिक महत्ता को सामने लाने के साथ खरगोन को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाना है. इसी को ध्यान में रखते हुए प्रभारी मंत्री विश्वास सारंग ने निर्माण कार्यों का जायजा लिया और अधिकारियों के साथ जरूरी सुधारों पर चर्चा की.
निरीक्षण के दौरान पूर्व मंत्री और खरगोन विधायक बालकृष्ण पाटीदार के साथ मंदिर प्रशासन के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे. मंत्री ने कलेक्टर, पीआईयू और निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को बैठक कर निर्माण में सामने आ रही कमियों को दूर करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि नवग्रह लोक का निर्माण केवल एक कॉरिडोर के रूप में नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए.
मंदिर की परंपराओं और पुजारियों की भावनाओं का रखें ध्यान
मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि नवग्रह कॉरिडोर का स्वरूप ऐसा होना चाहिए, जो मंदिर की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुरूप हो. इसके निर्माण में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ मंदिर के पुजारी और व्यवस्थापक की भावनाओं का भी ध्यान रखा जाए. उन्होंने अधिकारियों को निर्माण से जुड़ी कमियों को समय रहते दूर करने के निर्देश दिए.
सिंहस्थ को देखते हुए काम में तेजी लाने पर जोर
निरीक्षण के दौरान कुंदा नदी के किनारे चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर भी चर्चा हुई। मंत्री ने आगामी सिंहस्थ को देखते हुए परियोजना के काम में तेजी लाने पर जोर दिया. उनका कहना था कि नवग्रह लोक ऐसा विकसित किया जाए, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर धार्मिक और आध्यात्मिक अनुभव मिल सके.
खरगोन को मिलेगी पर्यटन की नई पहचान
करीब 25 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना से खरगोन में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. मंत्री ने कहा कि नवग्रह लोक की पहचान केवल प्रदेश तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे विश्व के पर्यटन मानचित्र पर स्थान मिलना चाहिए. इसके लिए निर्माण की गुणवत्ता, धार्मिक स्वरूप और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं.