घुसपैठिए! बॉर्डर क्रॉस कर नेपाल-बांग्लादेश जाने वाले बाघों का क्या होता है?
Last Updated:
टाइगर की टेरिटरी बड़ी होती है. कई बार इंटरनेशनल बॉर्डर से जंगल सटे होने की वजह से ये बॉर्डर पार करके नेपाल, भूटान और बांग्लादेश पहुंच जाते हैं. ऐसे में उन बाघों का क्या होता है?
बॉर्डर पर लगे कंटीले तार पार कर अगर इंसान किसी पड़ोसी देश में पहुंच जाए तो उसे या तो घुसपैठियां मान लिया जाता है, या इसे सामान्य गलती मानते हुए वापस भेज दिया जाता है. मगर क्या कभी आपने सोचा है कि जो जानवर बॉर्डर पार कर पड़ोसी देशों में पहुंच जाते हैं, उनका क्या होता है. खासकर बाघ जिनकी टेरिटरी यानी इलाका ही तकरीबन 60 से 150 किलोमीटर तक होता है. संरक्षित होने की वजह से इन पर विशेष नजर रखी जाती है. मगर इन्हें बॉर्डर पार करने से नहीं रोका जा सकता. अब तक कई बार ऐसा हो चुका है कि भारत से बाघ सीमा पार कर नेपाल, भूटान या बांग्लादेश पहुंच गए. (सभी फोटो-Pixabay)
भारत के बॉर्डर का एक बड़ा हिस्सा जंगली इलाका है. चाहे उत्तराखंड का जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व हो या नंदहौर वन्य जीव अभ्यारण. उत्तर प्रदेश का पीलीभीत टाइगर रिजर्व और दुधवा टाइगर रिजर्व सीधे नेपाल से लगे हैं. इसके अलावा भूटान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पांगोलखा वन्यजीव अभ्यारण है. खासतौर से ये टाइगरों के आने जाने के लिए एक गलियारे का काम करता है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल का बुक्सा टाइगर रिजर्व और असम का मानस टाइगर रिजर्व भी भूटान से लगता है. सबसे ज्यादा मुश्किल भारत और बांग्लादेश की सीमा पर स्थित सुंदर वन में है. इनमें मैंग्रोव जंगल दोनों देशों में फैला है.
टाइगर रिजर्व एक-दूसरे से सटे होने की वजह से कई बार बाघ दूसरे देशों में पहुंच जाते हैं. खासकर नर बाघ क्योंकि इनका इलाका बड़ा होता है. ये नया इलाका तलाशने के लिए लंबा सफर तय करते हैं. ऐसे में बाघों का पता लगाने के लिए जंगल में जगह-जगह कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं. अगर ये कैमरे में कैद नहीं होते तो फिर धारियों से इनकी पहचान होती है. दरअसल हर बाघ के शरीर पर धारियों का पैटर्न अलग होता है. अगर इनसे भी पहचान नहीं हो पाती तो फिर DNA जांच कराई जाती है.
Add News18 as
Preferred Source on Google
नेपाल में नेशनल पार्क एंड वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन एक्ट 1973 लागू है. भारत में वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत बाघों के संरक्षण की व्यवस्था है. ऐसे में दोनों देश सामंजस्य के साथ इनकी देखभाल करते हैं. अगर कोई बाघ गलती से बॉर्डर पार कर वहां जाता है या आता है तो जब तक वह उस क्षेत्र में रहेगा तब तक बाघ की सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित देश की होती है. चाहे वह कितने ही दिन रहे. कई बार भारत से नेपाल पहुंचे बाघ सालों तक वहां रहते हैं. उन्हें वापस लौटने के लिए फोर्स नहीं किया जा सकता.
भूटान ने भी फॉरेस्ट एंड नेचर कंजर्वेशन एक्ट 2023 के तहत बाघ को शेड्यूल-1 में रखा है. इसके तहत वन्यजीवों का शिकार, उन्हें पकड़ना या नुकसान पहुंचाना दंडनीय है. हालांकि नेपाल की तरह यहां भारत से कोई संधि नहीं है, मगर अगर भारत से कोई बाघ वहां जाता है तो संबंधित देश ही उसे सुरक्षा देगा, निगरानी और संरक्षण करेगा.
बांग्लादेश के साथ 2011 में रॉयल बंगाल टाइगर की सुरक्षा के लिए एक समझौता हुआ था.इसमें वन अधिकारियों का प्रशिक्षण और जानकारी साझा करना, सुंदरबन के जलमार्गों में गश्त कर शिकार और तस्करी रोकना तथा बाघों की सुरक्षा को बॉर्डर मीटिंग में शामिल करने पर सहमति बनी थी. यहां पर बाघों की स्वतंत्र आवाजाही है. बाघ जिस देश की सीमा में होगा, संबंधित देश ही उसकी निगरानी करेगा.
यानी बाघ पूरी तरह बॉर्डर पार करने के लिए स्वतंत्र है. वह जहां चाहे वहां रह सकता है. उन्हें किसी भी एक देश में रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. न ही उन्हें आगे बढ़ने से रोका जा सकता है. वह जब तक चाहें एक एरिया या देश में रह सकते हैं. वह जिस देश में होंगे वहीं उनकी गिनती करेगा.