दिल्ली एक्सपो में छाई असली फूलों से बनी ज्वेलरी, कीमत ₹150
Last Updated:
Real Flower Jewellery In Delhi: दिल्ली के ग्रैंड एक्सपो में असली पहाड़ी और कश्मीरी फूलों से रेजिन तकनीक से बनी ज्वेलरी आकर्षण का केंद्र है. सोनू द्वारा तैयार झुमके और पेंडेंट की कीमत 150 रुपये से शुरू होती है और इसे बनाने में 3-4 महीने लगते हैं.
फूलों को देखकर अक्सर लोग उनकी खूबसूरती की तारीफ करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन्हीं फूलों को लंबे समय तक अपने पास भी रखा जा सकता है.दिल्ली के बाबा खड़क सिंह मार्ग पर चल रहे ग्रैंड एक्सपो में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है.यहां विक्रेता सोनू असली फूलों से बनी ज्वेलरी लेकर पहुंचे हैं.इनकी खासियत है कि इनमें इस्तेमाल होने वाले फूलों की प्राकृतिक खूबसूरती को ही ज्वेलरी का हिस्सा बनाया जाता है.इनसे झुमके, इयररिंग्स और पेंडेंट तैयार किए जा रहे हैं.
पहाड़ी और कश्मीरी फूलों से तैयार होती है ज्वेलरी
सोनू बताते हैं कि उनकी ज्वेलरी में ज्यादातर पहाड़ों से मिलने वाले फूलों का इस्तेमाल किया जाता है.इनमें कश्मीरी और पहाड़ी फूल शामिल हैं.हालांकि, दूसरे देसी भारतीय फूलों से भी ज्वेलरी तैयार की जाती है.फूलों को पहले सावधानी से अलग किया जाता है और फिर प्रेस करके सुखाया जाता है, जिससे उन्हें मनचाहा आकार देने में आसानी हो.
रेजिन में फूलों को सहेजकर देते हैं नया रूप
इस ज्वेलरी को बनाने का तरीका भी काफी दिलचस्प है. सबसे पहले फूलों को प्रेस किया जाता है.इसके बाद उन्हें जरूरत के मुताबिक काटकर रेजिन में लगाया जाता है.फिर फ्रेमिंग के हिसाब से उन्हें मनचाहा आकार दिया जाता है.इस तरह फूलों की प्राकृतिक बनावट को ज्वेलरी में शामिल किया जाता है.सोनू के मुताबिक, एक प्रदर्शनी की तैयारी में करीब 3 से 4 महीने तक का समय लग जाता है.
₹150 से शुरू होती है कीमत, इयररिंग्स की ज्यादा मांग
अगर कीमत की बात करें तो यहां ₹150, ₹250 और ₹350 की रेंज में ज्वेलरी मिल रही है.कुछ डिजाइन की कीमत ₹350 से ₹400 तक भी है.सोनू के मुताबिक, ग्राहकों के बीच इयररिंग्स की मांग ज्यादा रहती है.फूलों का प्राकृतिक लुक इन्हें दूसरी ज्वेलरी से अलग बनाता है.हालांकि, ग्राहकों की पसंद और मोलभाव के हिसाब से कीमत में बदलाव भी हो सकता है.
प्रदर्शनियों के जरिए देशभर में पहुंच रहे हैं प्रोडक्ट
सोनू बताते हैं कि वह दिल्ली हाट, सूरजकुंड, प्रगति मैदान और देश के अलग-अलग हिस्सों में लगने वाली प्रदर्शनियों और सरकारी आयोजन स्थलों पर अपने प्रोडक्ट बेचते हैं.फिलहाल उनकी बिक्री मुख्य रूप से प्रदर्शनियों के जरिए ही होती है.वह ऑनलाइन बिक्री नहीं करते.उनके मुताबिक, इस काम में मुनाफे का मार्जिन करीब 60 फीसदी तक रहता है, हालांकि यह डिजाइन, लागत और ग्राहक को दिए जाने वाले डिस्काउंट पर निर्भर करता है.