बिहार में ‘बड़ा सरकार’ के भरोसे राजधानी पटना क्यों पहुंच रहीं महिलाएं? 3 डिसमिल जमीन वाला बसेरा अभियान क्या है?

बिहार में ‘बड़ा सरकार’ के भरोसे राजधानी पटना क्यों पहुंच रहीं महिलाएं? 3 डिसमिल जमीन वाला बसेरा अभियान क्या है?


एक तरफ सरकार कह रही है कि 3 डिसमिल जमीन के लिए पटना आने की जरूरत नहीं है. दूसरी तरफ बिहार के अलग-अलग जिलों से महिलाएं राजधानी पहुंच रही हैं. किसी के हाथ में आधार कार्ड है तो कोई सादे कागज पर आवेदन लेकर आई है. पूछने पर कई महिलाओं का जवाब है- “गांव में कहा गया कि पटना में जमा करने के बाद ही जमीन मिलेगी. बड़ा सरकार पटना में रहती है.” पिछले कई दिनों से सामने आ रही यह तस्वीर सिर्फ एक योजना के प्रति लोगों की उम्मीद नहीं दिखाती, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि सरकारी योजना की सही जानकारी गांव तक पहुंची या नहीं.

वहीं, भूमि राजस्व विभाग कह रहा है कि आवेदन अपने अंचल और ब्लॉक में दीजिए, लेकिन महिलाओं का कहना है कि गांव में कहा गया है कि बड़ा सरकार पटना में रहती है, वहीं जमा करने पर जमीन मिलेगी. सवाल है कि सरकारी संदेश गांव तक सही क्यों नहीं पहुंच रहा. ऐसे में आइए जानते हैं कि बसेरा योजना क्या है? योजना का लाभ किन्हें और कैसे मिलेगा? योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया योजना को लेकर भ्रम क्यों फैल रहा है? सरकार का पक्ष क्या है?

बता दें कि बसेरा अभियान बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की योजना है. इसका उद्देश्य ग्रामीण भूमिहीन परिवारों को घर बनाने के लिए वासभूमि यानी होमस्टेड लैंड उपलब्ध कराना है. यह पुरानी योजना है और अभियान बसेरा या बसेरा-2 योजना नाम से भी जाना जाता है. इसके बारे में जानकारी का प्रसार होने के बाद से ही वर्तमान में पटना में मुख्यमंत्री सचिवालय के बाहर हजारों महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. दूर-दराज के जिलों से आने वाली इन महिलाओं में यह गहरा भ्रम फैल गया है कि आवेदन सीधे पटना में ‘बड़ी सरकार’ यानी मुख्यमंत्री आवास या राज्य मुख्यालय में जमा करने पर ही जमीन मिलेगी. जबकि हकीकत यह है कि सरकार ने पूरी प्रक्रिया को स्थानीय और ऑनलाइन स्तर पर बेहद सरल बना दिया है.

क्या है अभियान बसेरा-2 योजना?

बिहार सरकार के अभियान बसेरा-2 के तहत सुयोग्य भूमिहीन परिवारों को घर बनाने के लिए वासयोग्य जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है. सरकार ने नवंबर 2026 तक राज्य में 30 हजार भूमिहीन परिवारों को बंदोबस्ती प्रमाण पत्र देने का लक्ष्य तय किया है. इसके लिए 20 नवंबर को विशेष अभियान के तहत प्रमाण पत्र वितरण की तैयारी है. योजना के तहत पात्र परिवारों को 3 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराने की बात है. यानी प्रत्येक पात्र परिवार को लगभग 1306 वर्ग फीट जमीन दी जाएगी. अगर अंचल में सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं हुई तो सरकार निजी जमीन खरीदने के लिए 1 लाख रुपये की सहायता देगी. इसका मकसद ऐसे परिवारों को घर बनाने के लिए वासभूमि उपलब्ध कराना है, जिनके पास रहने के लिए अपनी जमीन नहीं है.

किन परिवारों को मिलेगा लाभ?

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मुताबिक अभियान बसेरा-2 में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग के सुयोग्य भूमिहीन परिवारों को वासयोग्य भूमि उपलब्ध कराई जाएगी. यानी साफ है कि मुख्य रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग EBC-I, EBC-II के परिवारों को प्राथमिकता दी जा रही है. हालांकि केवल आवेदन कर देने से जमीन मिलना तय नहीं है. पहले पात्रता की जांच और उपलब्ध जमीन के आधार पर बंदोबस्ती की प्रक्रिया पूरी होगी. लाभ उन्हीं को मिलेगा जो बिहार के स्थायी निवासी हों, पूरी तरह भूमिहीन हों, ग्रामीण क्षेत्र में रहते हों और पहले किसी सरकारी योजना में जमीन न मिली हो.

आवेदन के लिए पटना आने की जरूरत नहीं

सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि अभियान बसेरा-2 के लिए आवेदन पटना में जमा करना जरूरी नहीं है और संबंधित अंचल कार्यालय में आवेदन दिया जा सकता है. इसके अतिरिक्त पंचायत स्तर पर भी आवेदन लेने के लिए विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद X पर लिखा है कि 22 सितंबर से सभी पंचायतों में विशेष शिविर लगेंगे. आवेदन अपने नजदीकी ग्राम पंचायत या अंचल कार्यालय में जमा किए जा सकेंगे. सभी अधिकारियों को आवेदन लेकर रसीद देने का निर्देश दिया गया है. ऑनलाइन आवेदन बिहार भूमि पोर्टल biharbhumi.bihar.gov.in पर अभियान बसेरा हेतु आवेदन करें विकल्प पर जाकर किया जा सकता है. आवेदन के बाद अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मचारी सत्यापन करेंगे. पंचायत सरकार भवन में लगाए जाने वाले विशेष शिविर में आवेदन भरने में मदद के लिए हेल्प डेस्क की व्यवस्था भी की जा रही है. आवेदन जमा होने के बाद आवेदक को पावती रसीद मिलनी चाहिए.

फिर पटना तक क्यों पहुंचीं हजारों महिलाएं

बता दें कि पिछले करीब एक सप्ताह से अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में महिलाएं पटना पहुंच रही हैं. एक अनुमान के मुताबिक रोजाना हजारों लोग राजधानी आ रहे हैं. कई महिलाएं आधार कार्ड और सादे कागज पर आवेदन लेकर मुख्यमंत्री सचिवालय या आसपास पहुंच रही हैं. महिलाओं का कहना है कि उन्हें गांव में बताया गया कि 3 डिसमिल जमीन के लिए आवेदन पटना में देना होगा. ऐसे में स्पष्ट है कि सरकार की योजना गांव तक पहुंची, लेकिन आवेदन की सही प्रक्रिया की जानकारी नहीं पहुंची. अगर अंचल, पंचायत और ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था है तो भूमिहीन परिवारों को पटना आने की जरूरत क्यों महसूस हुई? क्या गांव स्तर पर प्रचार-प्रसार पर्याप्त नहीं हुआ? या बीच में किसी ने योजना को अपने तरीके से समझाकर लोगों को राजधानी भेज दिया?

भ्रम क्यों फैल रहा है और सरकार का पक्ष क्या है?

भ्रम की वजह अधूरी जानकारी और अफवाह है. गांवों में यह फैल गया कि फॉर्म पटना में जमा होगा तो तुरंत जमीन मिलेगी. जबकि सच्चाई यह है कि पात्रता की जांच अंचल स्तर पर ही होगी. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से भूमिहीन परिवारों से पटना नहीं आने की अपील की गई है. विभाग का कहना है कि कुछ लोग या संस्थाएं आवेदन पटना में जमा होने की गलत सूचना देकर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं. विभाग के अनुसार, आवेदन अंचल कार्यालय में लिया जाएगा और ऑनलाइन भी किया जा सकता है. विभाग ने अंचलाधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि पात्र लोगों का आवेदन लिया जाए और उन्हें पावती दी जाए. आवेदन नहीं लेने की स्थिति में संबंधित अंचलाधिकारी की जिम्मेदारी तय करने की बात कही गई है.



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