6 महीने में 980% रिटर्न देखकर IPO में लगाया पैसा, सोनल-कुणाल का खुला राज तो पुल‍िस भी रह गई सन्‍न

6 महीने में 980% रिटर्न देखकर IPO में लगाया पैसा, सोनल-कुणाल का खुला राज तो पुल‍िस भी रह गई सन्‍न


7 जुलाई की सुबह बेंगलुरु के 55 साल के एक आईटी एग्जीक्यूटिव सुरेश (बदला हुआ नाम) के व्हाट्सऐप पर अनजान नंबर से एक मैसेज आया. मैसेज भेजने वाली ने खुद को फेमस स्विस बैंकिंग ग्रुप ‘जूलियस बेयर’ की रिलेशनशिप मैनेजर सोनल जगन्नाथ बताया. बात करने में बेहद शालीन और बातचीत का लहजा बेहद प्रोफेशनल. सुरेश उससे बातचीत करने लगे. एक द‍िन सोनल ने सुरेश को एक एक्सक्लूसिव व्हाट्सऐप ग्रुप D036 Julius Baer Wealth में जोड़ा. इस ग्रुप में खुद को कंपनी का वेल्थ हेड बताने वाला कुणाल समाया रोज शेयर बाजार के नए-नए एनालिसिस शेयर करता था. यानी पूरा माहौल एकदम असली कॉर्पोरेट जैसा लगता था.

ग्रुप में कुछ दिन बिताने के बाद सुरेश को लगा कि यह शेयर मार्केट के अंदर की जानकारी लेने के ल‍िए शानदार ऐप है. तभी कुणाल ने ग्रुप के सदस्यों के लिए एक खास हाई नेट वर्थ डेवलपमेंट प्रोग्राम लांच क‍िया. उसने दावा किया कि यह एक ऐसा एक्सक्लूसिव इन्‍वेस्‍टमेंट प्रोग्राम है, जो चंद बड़े इन्‍वेस्‍टर्स के लिए ही बनाया गया है. आप इसमें इन्‍वेस्‍ट कीजिए और स‍िर्फ 6 महीने में 980 फीसदी का जादुई र‍िटर्न म‍िलेगा. यह देखकर सुरेश भी लालच में आ गए.

JB X One – फर्जी ऐप का मायाजाल

सुरेश ने इसमें इन्‍वेस्‍ट करने का फैसला ल‍िया. उनके दिलचस्पी देखते ही ठगों ने उन्हें JB X One ऐप डाउनलोड करने को कहा. दिखने में यह बेहद हाई-टेक ऐप थी. ऐप का इंटरफेस हूबहू जूलियस बेयर के स्विस ब्रांडिंग जैसा बनाया गया था और उस पर SEBI, एनएसई तथा BSE के फर्जी लोगो और अप्रूवल तक चिपकाए गए थे. ऐप खोलते ही स्क्रीन पर लाइव स्टॉक प्राइज, ब्लॉक-ट्रेड एलोकेशन और अपकमिंग आईपीओ के लाइव डैशबोर्ड चमकने लगते थे. ठगों की सिफारिश पर सुरेश ने जो भी शेयर खरीदे, अगले ही दिन बाजार में उनके दाम चढ़ने लगे, जिससे सुरेश का भरोसा गहराता चला गया.

करोड़ों ठगने के ल‍िए ऐसे बिछाया जाल

शातिर ठग जानते थे कि सीधे करोड़ों रुपये ऐंठना आसान नहीं होगा, इसलिए उन्होंने एक सोची-समझी चाल चली. शुरुआत में जब सुरेश ने कुछ हजार रुपये ऐप के जरिए निवेश किए और फिर छोटे-मोटे मुनाफे के साथ उस रकम को वापस निकालने का प्रयास किया, तो पैसा बिना किसी रुकावट के उनके असली बैंक खाते में ट्रांसफर हो गया. इससे सुरेश के मन में बैठा हर संदेह दूर हो गया. अब उनके मन में यह बात पूरी तरह बैठ चुकी थी कि JB X One ऐप एकदम स‍िक्‍योर है. बस यहीं से वे अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई को इस दलदल में झोंकने के लिए पूरी तरह तैयार हो गए.

आईपीओ का लालच और बढ़ता निवेश

अगस्त का महीना आते-आते ठगों ने अपना सबसे बड़ा दांव खेला- ‘गारंटीड आईपीओ अलॉटमेंट’. हम जानते हैं कि आम शेयर बाजार में किसी बड़े आईपीओ का अलॉटमेंट मिलना बेहद कठिन होता है, लेकिन इस फर्जी ऐप पर सुरेश को दिखाया गया कि उन्हें भारी ड‍िमांड वाले आईपीओ में बहुत बड़ा कोटा मिल गया है. हालांकि, इसमें एक पेंच था. ऐप में दिखाई गई अलॉटमेंट वैल्यू सुरेश के मौजूदा बैलेंस से कहीं ज्यादा थी. ठगों ने तुरंत फोन करके कहा, सर, आपको इतना बड़ा अलॉटमेंट मिला है जो हर किसी को नहीं मिलता. अगर आपने तुरंत बाकी रकम जमा नहीं की, तो आपका अकाउंट डिफॉल्ट हो जाएगा और भारी पेनल्टी लगेगी. हाथ आए बड़े फायदे को गंवाने के डर से सुरेश ने अलग-अलग खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर करना शुरू कर दिया.

सुरेश फ‍िर फंसते चले गए

सुरेश जब भी थोड़े असमंजस में पड़ते, तो व्हाट्सऐप ग्रुप के अन्य मेंबर्स के मैसेजेस देखकर उनका हौसला फिर से बढ़ जाता. वहां रोज सैकड़ों की तादाद में स्क्रीनशॉट और धन्यवाद के मैसेज आते थे कि कैसे लोग इस ग्रुप से जुड़कर रोज लाखों रुपये कमा रहे हैं. कुणाल समाया जिन शेयरों में निवेश की सलाह देता, असल बाजार में भी उनकी कीमतें उसी दिशा में जाती दिखाई देतीं. ठगों ने दावा किया कि उनके प्रोग्राम की सटीकता 99% है और वे अपने प्रॉफिट टारगेट के बेहद करीब पहुंच चुके हैं. इस मायावी सटीकता से पूरी तरह प्रभावित होकर सुरेश ने जुलाई से सितंबर के बीच अपनी सारी बचत, एफडी और दोस्तों से उधार लेकर कुल 1.3 करोड़ रुपये ठगों के बताए खातों में भेज दिए.

लॉक्ड अकाउंट और 10% की रंगदारी

4 सितंबर तक आते-आते ऐप की स्क्रीन पर सुरेश का वर्चुअल प्रॉफिट और मूलधन मिलाकर कई करोड़ रुपये का आंकड़ा दिखा रहा था. सुरेश को लगा कि अब अपनी मेहनत का फल काटने और मुनाफा घर ले जाने का सही वक्त आ गया है. उन्होंने जैसे ही ‘Withdraw Funds’ का बटन दबाया, पैसे खाते में आने के बजाय स्क्रीन पर एक लाल रंग की चेतावनी चमकी—”Account Locked for Settlement”. घबराए सुरेश ने तुरंत रिलेशनशिप मैनेजर सोनल से संपर्क किया, लेकिन इस बार उसका लहजा पूरी तरह बदल चुका था. सोनल ने ठंडे अंदाज में कहा कि यह एक गोपनीय प्रोग्राम है, इसलिए नियमों के तहत फंड निकालने से पहले सुरेश को 10% सर्विस व ब्रोकेज फीस (लगभग 13 लाख रुपये) अलग से जमा करनी होगी.

बैंक का चक्कर और कड़वी हकीकत

सुरेश ने जब कहा कि वह 10% की फीस ऐप में दिख रहे करोड़ों रुपये के प्रॉफिट में से ही काटने की इजाजत देते हैं, तो ठगों ने साफ इनकार कर दिया. उन्होंने शर्त रखी कि यह फीस बाहर से ही नए ट्रांसफर के जरिए देनी होगी. परेशान होकर जब सुरेश ने कहा कि वे जूलियस बेयर की नजदीकी बैंक शाखा में जाकर इसकी जांच-पड़ताल करेंगे, तो ठगों ने उन्हें डराते हुए कहा कि यह गोपनीय प्रोजेक्ट है और रेगुलर बैंक शाखा को इसकी कोई खबर नहीं है. वहां जाने पर उनका खाता हमेशा के लिए ब्लॉक हो सकता है. यहीं से सुरेश की आंखों से लालच का पर्दा हटा और उन्हें समझ आया कि ऐप में दिख रहे करोड़ों रुपये महज पिक्सल का धोखा थे और उनके असली 1.3 करोड़ रुपये गायब हो चुके थे.

जब पुल‍िस भी रह गई दंग

अंतिम सच्चाई सामने आते ही सुरेश ने बिना देर किए नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर अपनी शिकायत दर्ज कराई. 16 सितंबर को बेंगलुरु के ईस्ट साइबरक्राइम पुलिस स्टेशन में इस हाई-टेक साइबर फ्रॉड की एफआईआर दर्ज कर ली गई. पुलिस अब उन दर्जनों बैंक खातों, व्हाट्सऐप नंबरों और यूपीआई ट्रेल को ट्रैक कर रही है, जिनके जरिए इस पूरे सिंडिकेट को अंजाम दिया गया. पुलिस का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग ब्रांड्स का सहारा लेकर आम लोगों को ठगने वाला एक शातिर गिरोह सक्रिय है. सुरेश के साथ हुई यह घटना शेयर बाजार में रातों-रात अमीर बनने की चाह रखने वाले हर निवेशक के लिए एक गंभीर सबक है कि किसी भी अनजान ऐप या गारंटीड रिटर्न के दावों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें.



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