6 या 7 नवंबर, पहला प्रदोष व्रत कब? उज्जैन के आचार्य से जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

6 या 7 नवंबर, पहला प्रदोष व्रत कब? उज्जैन के आचार्य से जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त


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6 या 7 नवंबर, पहला प्रदोष व्रत कब? आचार्य से जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

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Shukra Pradosh Vrat 2026: शास्त्रों के अनुसार, जब प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है, तब यह शुक्र प्रदोष व्रत कहलाता है. यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है. प्रदोष व्रत में पूजा शाम के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है.

उज्जैन. हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से महादेव की पूजा और व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और कष्टों से मुक्ति मिलने की कामना की जाती है. हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है. इस दिन प्रदोष काल में शिव पूजन का विशेष महत्व बताया गया है. अब कार्तिक महीने में आने वाले प्रदोष व्रत को लेकर श्रद्धालुओं में उत्सुकता है. आइए जानते हैं, उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज से कि इस माह प्रदोष व्रत की सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व क्या है.

वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर हो रही है. वहीं इस तिथि का समापन 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर होगा. ऐसे में प्रदोष काल को देखते हुए प्रदोष व्रत 6 नवंबर को रखा जाएगा. यह व्रत शुक्रवार को पड़ रहा है, इसलिए यह शुक्र प्रदोष व्रत कहलाएगा. इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 5 मिनट से 7 बजकर 40 मिनट तक रहेगा. इस अवधि में सभी भक्त भोलेनाथ की पूजा कर सकते हैं.

शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
शुक्रवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है. हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है. साथ ही जीवन की बाधाओं से मुक्ति और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने की कामना की जाती है. विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत रखती हैं.

जरूर करें इन नियमों का पालन
प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सूर्यदेव को जल अर्पित कर व्रत का संकल्प लें. इसके बाद पूजा स्थल को स्वच्छ करके भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें. शिव परिवार की विधि-विधान से पूजा करें और शिवलिंग पर बेलपत्र और पुष्प अर्पित करें. धूप और दीपदान करें. फिर प्रदोष व्रत की कथा सुनें या पढ़ें और शिव चालीसा का पाठ करें. शाम को भगवान शिव की आरती उतारें. इसके बाद व्रत का पारण करें.



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