1948 के युद्ध में पाकिस्तान को हराने वाले ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान का पैतृक मकान मऊ में वीरान पड़ा, बन चुका है खंडहर

1948 के युद्ध में पाकिस्तान को हराने वाले ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान का पैतृक मकान मऊ में वीरान पड़ा, बन चुका है खंडहर


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Mau News: 1948 के युद्ध में पाकिस्तान को हराने वाले ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान का पैतृक मकान मऊ में वीरान पड़ा है. वारिसों के न रहने और सेना को मकान न मिलने से यह खंडहर बन चुका है. 15 जुलाई 1912 में ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान का जन्म तत्कालीन आजमगढ़ जनपद के घोसी तहसील हुआ करता था. उसी तहसील के बीबीपुर ग्राम सभा हुआ था. लेकिन सन 1947 और 48 में भारत की आजादी का पाकिस्तान आजाद हुआ तो उस समय युद्ध शुरू हो गया और उस युद्ध के दौरान कब्बालियो ने कश्मीर पर हमला कर दिया था.

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मऊः भारत-पाकिस्तान के बीच 1948 में हुए युद्ध में पाकिस्तान को धूल चटाने वाले ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान की कहानी ही अलग है. जो कभी युद्ध के दौरान पाकिस्तान को धूल चटाने का कार्य किए थे, लेकिन आज उनका पूरा मकान वीरान पड़ा हुआ है. मकान में कोई रहने वाला नहीं है. एक व्यक्ति मकान की देखरेख करता है. लोकल 18 से बात करते हुए सीनियर जर्नालिस्ट राहुल सिंह बताते हैं कि 15 जुलाई 1912 में ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान का जन्म तत्कालीन आजमगढ़ जनपद के घोसी तहसील हुआ करता था. उसी तहसील के बीबीपुर ग्राम सभा हुआ था. लेकिन सन 1947 और 48 में भारत की आजादी का पाकिस्तान आजाद हुआ तो उस समय युद्ध शुरू हो गया और उस युद्ध के दौरान कब्बालियो ने कश्मीर पर हमला कर दिया था.

आज भी मनाया जाता है ब्रिगेडियर उस्मान का जन्मदिन

उस युद्ध में ब्रिगेडियर उस्मान ने जबरदस्त लड़ाई लड़ी थी. जिसमें भारतीय सेना को बहुत बड़ी सफलता मिली. उस दौरान उन्हें परमवीर चक्र से नवाजा गया. सबसे बड़ी बात यह है कि ब्रिगेडियर उस्मान ने देश के लिए शहादत दिया, लेकिन वह शादी नहीं किए थे. वह अपनी मां की सेवा करते थे और कसम खाए थे कि जब तक वह देश की लड़ाई में सफलता हासिल नहीं कर लेते तब तक वह शादी नहीं करेंगे. हालांकि आज भी ब्रिगेडियर उस्मान का जब जन्मदिन मनाया जाता है तो सेवा के सभी अंग आते हैं और वहां पर आकर उनके गांव में आकर प्रदर्शन करते हैं. जहां ऐरोफ्लाइट किया जाता है, ग्लाइडर फ्लाइट होता है आर्मी के लोग आते हैं पूरा कैंप लगते हैं. उस क्षेत्र के नौजवानों को सेवा में जाने के लिए प्रेरित करते हैं, हालांकि आज उस घर में कोई रहने वाला नहीं है पूरा घर वीरान पड़ा है.

मकान को म्यूजियम बनाने की प्रयास में रहते हैं सेना के जवान

सेना ने दो से तीन बार उनके परिवार वालों से रिक्वेस्ट किया की उस जगह को सेना को दे दिया जाए जिससे कि उस जगह को म्यूजियम में तब्दील कर दिया जाए. तथा ब्रिगेडियर उस्मान से जुड़े हुए जितने डॉक्यूमेंट है या जितने साक्ष्य है या उनके जितने भी सेवा में उनकी जितनी महत्वपूर्ण यादें हैं उनको यहां पर लाकर और उसको प्रदर्शन के रूप में लगाया जाए. लेकिन पारिवारिक किन्हीं कारणों से उस जगह को उनके भाई के द्वारा सेना को दिया नहीं गया. क्योंकि ब्रिगेडियर उस्मान ने शादी नहीं किया था जिनका न कोई लड़का था उनको बच्ची नहीं थी उनका कोई वारिस नहीं था.

भाई के जो लड़के हैं वह वर्तमान समय में ब्रिगेडियर उस्मान के पूरे परिवार के ओनर के रूप में जाने जाते हैं. कोई इंग्लैंड है तो कोई लखनऊ में है, इस तरह से उस जगह का सही मामले में कोई सही व्यक्ति न मिलने से वह हस्तांतरित नहीं हो सका. सेना को उसमें पावर नहीं मिला. जिससे कि आज वह पूरा का पूरा मकान है खंडहर में तब्दील हो गया है. क्योंकि उस मकान का कोई सही वारिस नहीं मिला और नहीं सेना के हाथ में उस मकान को दिया गया. यही वजह है जी ब्रिगेडियर ने कभी पाकिस्तान को धूल चटाई थी आज उनका मकान वीरान पड़ा हुआ है.

70 सालों से इस मकान में नहीं कोई रहता

ब्रिगेडियर उस्मान के मकान में रह रहे मंगरु बताते हैं कि 70 साल से वह इस मकान का देखरेख करते हैं क्योंकि इस मकान में ब्रिगेडियर उस्मान के परिवार का कोई रहता नहीं है. ब्रिगेडियर के भांजे की देखरेख में यह मकान चल रहा है हालांकि साल में एक बार जब उनका दिवस आता है उसे दिन यहां आर्मी वाले पूरे मकान को छावनी में तब्दील कर लेते हैं और तरह-तरह के एयर शो करते हैं.



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