Bikaner News: बोल नहीं सकते, लेकिन हुनर की गूंज पहुंची गुजरात-कोलकाता तक, बच्चों ने रंग दिए 12 हजार दीपक

Bikaner News: बोल नहीं सकते, लेकिन हुनर की गूंज पहुंची गुजरात-कोलकाता तक, बच्चों ने रंग दिए 12 हजार दीपक


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Disabilities Children Talents: बीकानेर में दिव्यांग सेवा संस्थान के मूकबधिर बच्चे अपनी मेहनत और हुनर से दीपावली को खास बना रहे हैं. गंगाशहर की चौधरी कॉलोनी स्थित संस्थान में बच्चे पिछले एक महीने से मिट्टी के दीपकों को रंगने और उन पर आकर्षक डिजाइन बनाने में जुटे हैं. अब तक वे करीब 12 हजार दीपकों को अपने हाथों से रंग चुके हैं. बच्चे पढ़ाई के बाद रोजाना दो से तीन घंटे इस काम में लगाते हैं. उनकी बनाई कलाकृतियों को लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. संस्थान के शिक्षक कलवंत कुमार के मुताबिक, कोलकाता और गुजरात से भी दीपकों के ऑर्डर मिले हैं. इन दीपकों की बिक्री से मिलने वाली राशि संस्थान के बच्चों पर ही खर्च की जाएगी. इस तरह बच्चों की कलाकारी घरों को रोशन करने के साथ उनके भविष्य को संवारने में भी मददगार बनेगी.

बीकानेर. दीपावली का त्योहार रोशनी और खुशियों का प्रतीक है. इस पर्व पर घरों को रोशन करने के लिए लोग बाजार से रंग-बिरंगे दीपक खरीदते हैं, लेकिन बीकानेर में कुछ ऐसे बच्चे भी हैं, जो अपने हुनर और मेहनत से इन दीपकों को खास बना रहे हैं. गंगाशहर की चौधरी कॉलोनी स्थित दिव्यांग सेवा संस्थान में मुकबधिर बच्चे अपने हाथों से दीपकों पर रंग भर रहे हैं. इन बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता से साधारण दीपकों को रंग-बिरंगे और आकर्षक बना दिया है.

कोई दीपक पर अलग-अलग रंगों से डिजाइन बना रहा है तो कोई अपनी कलाकारी से उन्हें नया रूप दे रहा है. संस्थान के टीचर कलवंत कुमार ने बताया कि यहां करीब 60 बच्चे अध्ययन करते हैं. इनमें से 15 बच्चे संस्थान के हॉस्टल में रहते हैं, जबकि बाकी बच्चे शहर के अलग-अलग इलाकों से रोजाना पढ़ने आते हैं. संस्थान में बच्चों को पढ़ाई के साथ उनकी रुचि और हुनर के अनुसार अलग-अलग गतिविधियों से भी जोड़ा जाता है. इसी के तहत बच्चों ने दीपकों को रंगने का काम शुरू किया है.

एक महीने में रंग दिए 12 हजार दीपक

कलवंत कुमार ने बताया कि करीब एक महीने पहले बच्चों ने दीपकों पर रंग करने का काम शुरू किया था. अब तक ये बच्चे करीब 12 हजार दीपकों को अपने हाथों से रंग चुके हैं. बच्चे पढ़ाई के अलावा रोजाना दो से तीन घंटे इस काम में लगाते हैं. दीपकों पर रंग भरने के साथ ही बच्चे अपनी पसंद से अलग-अलग डिजाइन और पैटर्न भी तैयार करते हैं. खास बात यह है कि इन बच्चों ने अपनी मेहनत और कल्पनाशीलता से हर दीपक को एक अलग पहचान दी है. संस्थान में अभी भी दीपकों को रंगने का काम लगातार जारी है.

बच्चों की बनाई कलाकृतियों को मिल रहा अच्छा रिस्पॉन्स

संस्थान के शिक्षक ने बताया कि बच्चों द्वारा तैयार किए गए दीपक समाज के कुछ लोग खरीद भी चुके हैं. बच्चों की बनाई कलाकृतियों को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. हाल ही में कोलकाता और गुजरात से भी दीपकों के ऑर्डर आए हैं. इससे बच्चों का उत्साह बढ़ा है. अब बच्चे और भी लगन के साथ दीपकों को रंगने में जुटे हैं. उनका प्रयास है कि दीपावली तक अधिक से अधिक दीपक तैयार किए जा सकें, ताकि लोग इन दीपकों को अपने घरों में सजाकर रोशनी के इस पर्व को खास बना सकें.

बच्चों को पढ़ाने के साथ आत्मनिर्भर बनाने का भी है उद्देश्य

कलवंत कुमार ने बताया कि वर्ष 2016 में संस्थान की शुरुआत हुई थी. तब से यहां बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ उनके हुनर को निखारने के अवसर भी दिए जा रहे हैं. संस्थान का उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ाना ही नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका देना भी है. दीपक तैयार करने का यह काम भी इसी प्रयास का हिस्सा है. उन्होंने बताया कि इन दीपकों की बिक्री से जो भी राशि प्राप्त होगी, उसे संस्थान के मुकबधिर बच्चों पर ही खर्च किया जाएगा. यानी बच्चों की मेहनत से तैयार ये दीपक न केवल लोगों के घरों को रोशन करेंगे, बल्कि इनकी बिक्री से मिलने वाली राशि संस्थान के बच्चों के भविष्य को संवारने में भी मददगार बनेगी.



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