पंखे के रेगुलेटर का अनोखा इतिहास, आदित्य के पास 1920 से 1970 तक का कलेक्शन
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दिल्ली के डॉ. आदित्य विज के पास पंखे के पुराने रेगुलेटर का अनोखा कलेक्शन है. उनके पास 1920 से 1970 तक के रेगुलेटर मौजूद हैं. पहले इनका वजन छह किलो तक होता था. तकनीक बदलने से अब इनका वजन घटकर बीस ग्राम रह गया है. यह अनोखा संग्रह लोगों को खूब हैरान करता है.
नई दिल्ली: भारत में पंखों का इतिहास काफी पुराना है. एक वक्त था जब घरों, बड़ी-बड़ी कोठियों, महलों और सरकारी दफ्तरों में बड़े-बड़े पंखे लगे हुआ करते थे. लोग इन्हीं पंखों की हवा में अपनी पूरी गर्मियां गुजार देते थे. उस दौर में एयर कंडीशनर और कूलर आम नहीं थे. इन पंखों की रफ्तार कम या ज्यादा करने के लिए बड़े-बड़े रेगुलेटर लगे होते थे. आज भी पुराने घरों में ऐसे रेगुलेटर देखने को मिल जाते हैं. लेकिन दिल्ली के एक शख्स ने पंखे के इन रेगुलेटर के इतिहास को बहुत संभालकर रखा है.
उन्होंने एक ऐसा अनोखा कलेक्शन तैयार किया है. जिसमें 1920 से लेकर 1970 तक के सभी रेगुलेटर मौजूद हैं. उनके पास इस बात का पूरा इतिहास है कि भारत में तकनीक कैसे बदली और जो रेगुलेटर कभी 6 किलो वजन के हुआ करते थे. वे आज घटकर सिर्फ 20 ग्राम के कैसे रह गए.
6 किलो वजन का भारी-भरकम रेगुलेटर भी है मौजूद
यह अनोखा संग्रह तैयार करने वाले शख्स दिल्ली के बाली नगर के रहने वाले डॉ. आदित्य विज हैं. डॉ. आदित्य के पास एक पूरा म्यूजियम है. इस म्यूजियम में पुराने कैमरों से लेकर पुरानी सीडी, कैसेट, रेडियो और पुराने डिब्बों तक का बड़ा कलेक्शन है. इसी म्यूजियम में भारत के बदलते रेगुलेटर का इतिहास भी सुरक्षित है.
एक खास बातचीत के दौरान डॉ. आदित्य विज ने 1920 से लेकर 1970 के दशक तक के कई रेगुलेटर दिखाए. इनमें सबसे खास और हैरान करने वाला 6 किलो का रेगुलेटर है. उन्होंने बताया कि पहले पंखे की स्पीड कंट्रोल करने के लिए 6 किलो तक के भारी रेगुलेटर आते थे. समय के साथ तकनीक बदली और आज रेगुलेटर का वजन घटकर सिर्फ 20 ग्राम रह गया है. हालात यह हैं कि अब कई जगहों पर लोग मोबाइल फोन से ही पंखे की स्पीड कम या ज्यादा कर लेते हैं. रेगुलेटर का यह बिजनेस अब लगभग खत्म सा होता जा रहा है. अब बड़े घरों, होटलों, रेस्तरां और सरकारी दफ्तरों में भी पुराने स्टाइल के ये रेगुलेटर नजर नहीं आते हैं.
कैसा है डॉ. आदित्य का यह खास कलेक्शन?
डॉ. आदित्य विज के पास साल 1920 का चीनी मिट्टी (सेरेमिक) का बना हुआ एक रेगुलेटर है. इसके अलावा उनके पास 1930 का भी एक रेगुलेटर मौजूद है, जिसमें एक हैंडल लगा होता था. इस हैंडल को घुमाने पर पंखे की रफ्तार घटती और बढ़ती थी। यह रेगुलेटर भी चीनी मिट्टी से बना है और इसका हैंडल मेटल का है.
1920 के उस चीनी मिट्टी वाले रेगुलेटर से लेकर 1970 के दशक तक के कई मॉडल उनके पास हैं. जब भारत में प्लास्टिक का दौर शुरू हुआ, तो उस समय बाजार में आए कई बड़े ब्रांड और कंपनियों के रेगुलेटर भी उनके पास सुरक्षित हैं. उन्होंने इन सभी पुरानी चीजों को बहुत ही खूबसूरती और संभालकर रखा है. जब भी कोई शख्स उनके इस म्यूजियम को देखने आता है, तो वह पंखों के इन पुराने रेगुलेटर के कलेक्शन को देखकर हैरान रह जाता है.