अब तक जमीन पर टैंकों की गरज और आसमान में लड़ाकू विमानों की दहाड़ सुनी होगी, लेकिन अगले विश्व युद्ध का मैदान धरती की सीमाएं लांघकर अंतरिक्ष तक पहुंच चुका है. अमेरिका के दो सबसे बड़े दुश्मन, रूस और चीन ने ऐसे खतरनाक और एडवांस हथियार तैयार कर लिए हैं, जिन्हें देखकर पेंटागन और व्हाइट हाउस में खौफ का माहौल है. रूस का अंतरिक्ष में न्यूक्लियर हथियार तैनात करने का प्लान और चीन के रोबोटिक आर्म्स व लेजर हथियार इतने खतरनाक हैं कि इनसे एक झटके में दुश्मन पूरी तरह ‘अंधा और बहरा’ हो सकता है.
स्पेस वॉर में कैसे ‘अंधा और बहरा’ होगा दुश्मन?
मॉडर्न वॉर सिस्टम में अंतरिक्ष में तैरते सैटेलाइट्स किसी भी देश की रीढ़ की हड्डी होते हैं. अमेरिकी सेना अपने हर छोटे-बड़े सैन्य अभियान, कम्युनिकेशन, नेविगेशन और मिसाइल ट्रैकिंग के लिए पूरी तरह इन्हीं पर निर्भर है.
- अमेरिकी सेना का पतन: सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के एक्सपर्ट क्लेटन स्वोप ने फॉक्स न्यूज को बताया है कि अगर दुश्मन देश स्पेस क्षमताओं को जाम या तबाह कर दें, तो अमेरिका के लिए जंग लड़ना नामुमकिन हो जाएगा.
- असममित बढ़त: रूस और चीन अच्छी तरह जानते हैं कि अमेरिका की ये सबसे बड़ी कमजोरी है. वो युद्ध की शुरुआत में ही इन सैटेलाइट्स को निशाना बनाकर अमेरिकी सेना को पूरी तरह पंगु बना देना चाहते हैं.
- आम जनजीवन पर भी संकट: ये खतरा सिर्फ सेना तक सीमित नहीं है. अंतरिक्ष में एक बड़ा हमला होने से बैंक सर्वर, जीपीएस नेविगेशन, मौसम की जानकारी और बिजली ग्रिड तक पूरी तरह ठप पड़ जाएंगे.
चीन का ‘स्पेस वॉर’ प्लान: रोबोटिक आर्म और लेजर हथियारों से मचाएगा तबाही
चीन ने अंतरिक्ष में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए ऐसे-ऐसे घातक हथियार बना लिए हैं, जो अमेरिका के होश उड़ाने के लिए काफी हैं. चीनी सैन्य रणनीति का मुख्य उद्देश्य दुश्मन के सैटेलाइट्स को न्यूट्रलाइज करना है.
जमीन से आसमान तक लेजर प्रहार: चीन के पास शक्तिशाली ग्राउंड-आधारित लेजर हथियार हैं, जो लो-अर्थ ऑर्बिट में चक्कर लगा रहे अमेरिकी सैटेलाइट्स के सेंसर्स को पलभर में हमेशा के लिए अंधा कर सकते हैं.
रोबोटिक आर्म वाले किलर सैटेलाइट्स : चीन ने ऐसे अंतरिक्ष यान विकसित किए हैं जिनमें एडवांस रोबोटिक हाथ लगे हैं. उदाहरण के लिए, Shijian-17 जैसा उपग्रह किसी भी दूसरे देश के सैटेलाइट को अपने जादुई शिकंजे में जकड़कर उसकी कक्षा से बाहर फेंक सकता है या तबाह कर सकता है. पेंटागन इसे सीधे तौर पर एक आक्रामक स्पेस वोपन मानता है.
अमेरिकी सैटेलाइट्स का पीछा कर रहे हैं ‘कॉसमॉस’ उपग्रह
रूस ने अंतरिक्ष में अमेरिका को मात देने के लिए ‘किलर सैटेलाइट्स’ की एक ऐसी फौज उतार दी है, जो सीधे तौर पर अमेरिकी जासूसी और सुरक्षा उपग्रहों के पीछे हाथ धोकर पड़ी है.
- करीब आकर हमला करने की ट्रेनिंग: साल 2019 से ही रूस अपने ‘कॉसमॉस’ सीरीज के सैटेलाइट्स को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा उपग्रहों के ठीक बगल में भेज रहा है. कॉसमॉस 2543 ने तो अमेरिकी सैटेलाइट का पीछा करते हुए अंतरिक्ष में एक प्रोजेक्टाइल भी दागा था, जिसे अमेरिका ने एक सीधा एंटी-सैटेलाइट टेस्ट माना.
- 93 किलोमीटर का खतरनाक दायरा: रूस यही नहीं रुका. इसके बाद कॉसमॉस 2558 और 2576 को भी अमेरिकी कक्षाओं में तैनात किया गया. साल 2025 तक कॉसमॉस 2588 अमेरिकी सरकारी सैटेलाइट के महज 93 किलोमीटर के खतरनाक दायरे में मंडरा रहा था.
- मिग-31 से लॉन्च होने वाला हथियार: रूस एक ऐसे ‘बुरेवोस्तनिक’ हथियार पर भी काम कर रहा है जिसे मॉडिफाइड MiG-31 फाइटर जेट से लॉन्च किया जाएगा और वो बिना किसी चेतावनी के लो-ऑर्बिट सैटेलाइट्स को मलबे में बदल देगा.
अंतरिक्ष में परमाणु धमाका: रूस का वो अल्टीमेट प्लान जिससे कांप रहा है अमेरिका
इस पूरी तबाही के बीच रूस का सबसे भयानक और खौफनाक कदम अंतरिक्ष में परमाणु हथियार ले जाने वाले सैटेलाइट का विकास है. अगर रूस इस प्लानिंग को पूरी तरह अमलीजामा पहनाता है, तो ये 1967 की ‘आउटर स्पेस ट्रीटी’ का खुला उल्लंघन होगा.
एक झटके में हजारों सैटेलाइट्स का खात्मा: पेंटागन की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि अंतरिक्ष में एक भी परमाणु विस्फोट हुआ, तो लो-अर्थ ऑर्बिट में मौजूद 15,000 से अधिक सरकारी और कमर्शियल सैटेलाइट्स एक सेकंड में खाक हो जाएंगे.
सालों तक रहने वाला जानलेवा रेडिएशन: इस परमाणु धमाके का असर सिर्फ शुरुआती विस्फोट तक सीमित नहीं रहेगा. इसके बाद अंतरिक्ष में खतरनाक रेडियोधर्मी रेडिएशन की ऐसी बेल्ट बन जाएगी जो वर्षों तक बनी रहेगी और उस रास्ते से गुजरने वाले किसी भी नए या बचे हुए सैटेलाइट को गलाकर रख देगी.
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’: अंतरिक्ष में पहले ही हो चुकी है जंग की शुरुआत
ये कोई भविष्य की काल्पनिक कहानी नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष में हथियारों की ये जंग असल मैदान में शुरू भी हो चुकी है. अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे की स्पेस क्षमताओं के खिलाफ आक्रामक कदम उठाए थे.
जून के महीने में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास जिस तरह अचानक भारी जीपीएस जैमिंग देखने को मिली थी, उसने अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मर्चेंट जहाजों की नींद उड़ा दी थी. इस घटना ने साबित कर दिया कि आधुनिक युद्ध में अब साइबर और स्पेस जैमिंग हथियार सबसे पहले इस्तेमाल किए जा रहे हैं.
वाशिंगटन में मची खलबली: अमेरिका के हाथ-पांव क्यों फूले हैं?
रूस और चीन के इन खतरनाक स्पेस हथियारों की भनक लगते ही अमेरिका के शीर्ष सैन्य अधिकारियों और खुफिया तंत्र में हड़कंप मच गया है.
फरवरी 2024 में अमेरिकी कांग्रेस में इस गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे पर भारी हंगामा हुआ था, जब ये बात सामने आई कि रूस अंतरिक्ष में परमाणु हथियार तैनात करने की फिराक में है.
अमेरिकी स्पेस कमांड के प्रमुख जनरल स्टीफन व्हिटिंग समेत तमाम बड़े अधिकारी खुलकर मान चुके हैं कि रूस और चीन की ये आक्रामक अंतरिक्ष गतिविधियां अमेरिका की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुकी हैं. अमेरिकी लीडरशिप इस बात से डरी हुई है कि अगर जंग छिड़ी, तो वो आसमान से पूरी तरह अंधे हो जाएंगे.
क्या अंतरिक्ष से शुरू होगा दुनिया का अंत?
रूस के न्यूक्लियर-स्पेस हथियारों, चीन के लेजर बीम और रोबोटिक आर्म्स ने ये साफ कर दिया है कि आने वाले समय में युद्ध की परिभाषा पूरी तरह बदल चुकी है. जमीन और समुद्र की सरहदें अब पुरानी हो चुकी हैं, और असली मुकाबला अंतरिक्ष की ऊंचाइयों पर लड़ा जाएगा.
अमेरिका के दुश्मनों की इन चालों ने वाशिंगटन को सकते में डाल दिया है. अगर दुनिया के इन महाशक्तियों के बीच अंतरिक्ष में जरा सी भी चूक हुई, तो ये न केवल अमेरिका बल्कि पूरी मानव सभ्यता को एक बार फिर से अंधेरे और स्टोन एज में धकेलने के लिए काफी होगा.