मिथिला में छठ की अनोखी परंपरा,लोकगीतों से लेकर घाटों की सफाई तक जुड़ी है आस्था
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Deepak Jha Chhath Geet: लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर मिथिलांचल में भक्तिमय माहौल है. प्रसिद्ध लोकगायक दीपक झा ने पारंपरिक छठ गीत गाए. उन्होंने कहा कि यह पर्व श्रद्धा, स्वच्छता और प्रकृति का संगम है, जो समाज को एकता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है.
दरभंगा: लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर मिथिलांचल में भक्तिमय माहौल बनने लगा है. छठ पर्व की शुरुआत से पहले ही गांवों से लेकर शहरों तक छठी मैया के पारंपरिक गीत गूंजने लगे हैं. घरों की साफ-सफाई से लेकर छठ घाटों की तैयारी तक, हर तरफ पर्व की रौनक दिखाई देने लगी है. इसी बीच मिथिलांचल के प्रसिद्ध लोकगायक दीपक झा ने अपनी मधुर मैथिली आवाज में छठ का सुंदर लोकगीत प्रस्तुत कर लोगों को भक्तिरस में सराबोर कर दिया.
दीपक झा मुख्य रूप से आकाशवाणी और दूरदर्शन के लिए गायन करते हैं. छठ गीत प्रस्तुत करने के बाद उन्होंने इस महापर्व की महत्ता और इससे जुड़ी परंपराओं पर अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि छठ शुरू होने से कई दिन पहले ही लोगों के मन में छठी मैया के प्रति गहरी श्रद्धा और भक्ति का भाव जागने लगता है. पूरा मिथिलांचल छठी मैया के गीतों और भक्ति के रंग में रंग जाता है.
छठ घाटों की सफाई एक महीने पहले से शुरू
दीपक झा ने बताया कि छठ पर्व में पूजा-पाठ के साथ साफ-सफाई का भी विशेष महत्व है. गांवों और शहरों में तालाबों, जलाशयों और छठ घाटों की सफाई का काम काफी पहले से शुरू हो जाता है. घाटों को तैयार करना, तालाबों को स्वच्छ बनाना और आसपास के क्षेत्रों की सफाई करना इस पर्व की तैयारियों का अहम हिस्सा है. उन्होंने कहा कि छठ केवल आस्था और श्रद्धा का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमें स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है. इस पर्व के माध्यम से लोग प्रकृति, जल और स्वच्छ वातावरण के महत्व को समझते हैं.
श्रद्धा, स्वच्छता और प्रकृति का संगम है छठ
दीपक झा के मुताबिक छठ ऐसा पर्व है जो लोगों को प्रकृति से जोड़ने के साथ सामाजिक एकता का संदेश भी देता है. इस दौरान समाज के लोग मिलकर घाटों की सफाई करते हैं. पर्व की तैयारियों में एक-दूसरे का सहयोग करते हैं. उन्होंने कहा कि मिथिला में छठ सिर्फ एक व्रत या धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं और संस्कृति से जुड़ा पर्व है. यह महापर्व परिवार, समाज और प्रकृति को एक सूत्र में बांधता है. छठ के पारंपरिक लोकगीतों की मिठास और लोकगायकों की आवाज इस पर्व की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत बनाती है. मिथिलांचल में दीपक झा जैसे कलाकार अपनी गायकी के माध्यम से इस लोकपरंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं.