फटे तारे ने मचाया कोहराम, सूरज के एक अरब साल जितनी ऊर्जा ब्रह्मांड में फेंकी
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अंतरिक्ष में बीते 20 सालों का सबसे चमकदार गामा-रे बर्स्ट (जीआरबी) देखा गया है. नासा के फर्मी स्पेस टेलीस्कोप ने जीआरबी 260310ए नाम के इस विस्फोट को रिकॉर्ड किया. एक भारी तारे के फटने से निकली यह पेंसिल जैसी पतली किरण सूरज की एक अरब साल की ऊर्जा के बराबर थी. वैज्ञानिकों ने साइड एंगल से इसका एनालिसिस करके तारे के कोर और जेट की बनावट को डिकोड किया है.
GRB 260310A का आर्टिस्ट इम्प्रेशन. (Image Credit: Fortuna / Yang / ERC BHianca)
नई दिल्ली: अंतरिक्ष के सुदूर कोने में हाल ही में एक ऐसा प्रलयंकारी विस्फोट दर्ज किया गया है जिसने दुनिया भर के खगोलविदों को हैरान कर दिया है. पिछले 20 सालों के भीतर देखा गया यह सबसे चमकदार गामा-रे बर्स्ट यानी जीआरबी साबित हुआ है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के फर्मी गामा-रे स्पेस टेलीस्कोप ने इस भयानक घटना को सबसे पहले रिकॉर्ड किया था. वैज्ञानिकों ने इस ऐतिहासिक खगोलीय घटना को जीआरबी 260310ए नाम दिया है. शुरुआत में यह विस्फोट बेहद धीमा और कमजोर नजर आ रहा था. कुछ ही घंटों के भीतर इसकी चमक ने अपनी पूरी मूल गैलेक्सी की रोशनी को भी पीछे छोड़ दिया. रिसर्चर्स के मुताबिक इस विस्फोट ने सूरज के लगभग एक अरब साल के बराबर ऊर्जा अंतरिक्ष में झोंक दी. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इतनी भयानक ऊर्जा पेंसिल जितनी पतली किरण के जरिए बाहर निकली थी.
पेंसिल जैसी पतली किरण से अंतरिक्ष में इतनी भयानक ऊर्जा कैसे बाहर निकली?
खगोलविदों के अनुसार किसी विशाल तारे के ढहने के बाद यह सुपरनोवा विस्फोट पैदा हुआ था. इस प्रक्रिया के दौरान प्रकाश की गति के करीब चलने वाले तीव्र जेट अंतरिक्ष में निकलते हैं. जब ये शक्तिशाली जेट्स अंतरिक्ष में मौजूद गैस से टकराते हैं तो एक बेहद चमकदार आफ्टरग्लो पैदा होता है. यह चमक विजिबल लाइट, रेडियो तरंगों और एक्स-रे स्पेक्ट्रम में साफ दिखाई देती है.
पहले कमजोर दिखने वाला यह रहस्यमय विस्फोट अचानक इतना चमकदार कैसे बन गया?
विस्फोट के कुछ ही हफ्तों बाद इसकी एक्स-रे चमक अचानक दोबारा बहुत ज्यादा बढ़ गई. यह असामान्य चमक महीनों तक टेलीस्कोप के जरिए दर्ज की जाती रही.
साइड एंगल से देखने पर खगोलविदों को ब्रह्मांड का कौन सा नया सच समझ आया?
तारे की मौत के बाद पैदा हुआ यह महाविस्फोट विज्ञान के लिए इतना अहम क्यों है?
सुपरनोवा और ब्लैक होल बनने की प्रक्रिया को समझने के लिए यह खोज बेहद क्रांतिकारी मानी जा रही है. रॉबर्टो रिक्की ने बताया कि इस विस्फोट के अलग-अलग पहलुओं को समझना आसान था, लेकिन सबको एक साथ जोड़कर पूरी तस्वीर बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण काम रहा. आमतौर पर सीधी दिशा में दिखने वाले विस्फोटों में अंदरूनी ढांचा समझना नामुमकिन होता है. भविष्य में वेरा रुबिन ऑब्जर्वेटरी जैसे आधुनिक और ताकतवर उपकरणों से ऐसे और भी दुर्लभ विस्फोटों की खोज की उम्मीद है.
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