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ऑरोरा आसमान में दिखने वाली हरे, गुलाबी, लाल और बैंगनी रंगों की खूबसूरत रोशनी है. यह सूरज से आने वाले आवेशित कणों के पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र और वायुमंडल की गैसों से टकराने पर बनती है. ऑरोरा खुद इंसानों के लिए खतरनाक नहीं है, लेकिन इसके पीछे आने वाला शक्तिशाली सौर तूफान सैटेलाइट, GPS, रेडियो कम्युनिकेशन और बिजली नेटवर्क को प्रभावित कर सकता है. बेहद शक्तिशाली तूफान में भारत में भी ऑरोरा दिख सकता है.
रात के अंधेरे में आसमान अचानक हरे, गुलाबी और बैंगनी रंगों से चमकने लगे, तो नजारा किसी दूसरी दुनिया जैसा लगेगा. आसमान में लहराते रंगीन पर्दों जैसी इस रोशनी को ऑरोरा (Aurora) कहते हैं. इसे देखने के लिए दुनिया भर से लोग नॉर्वे, फिनलैंड और आइसलैंड जैसे देशों का रुख करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आसमान में दिखने वाली यह खूबसूरत रोशनी असल में सूरज और पृथ्वी के बीच होने वाली एक बड़ी प्राकृतिक हलचल का नतीजा है? और क्या इसके पीछे छिपा सौर तूफान पृथ्वी के लिए खतरा भी बन सकता है?
ऑरोरा अपने आप में खतरनाक नहीं है. यह एक प्राकृतिक रोशनी है, जो तब पैदा होती है जब सूरज से आने वाले आवेशित कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के संपर्क में आते हैं. लेकिन इसके पीछे सक्रिय शक्तिशाली सौर तूफान पृथ्वी की कई आधुनिक तकनीकों को प्रभावित कर सकता है. आखिर क्यों चमकता है आसमान? सूरज लगातार आवेशित कणों को अंतरिक्ष में छोड़ता रहता है. जब इन कणों की बड़ी मात्रा पृथ्वी की ओर आती है, तो वे पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं. पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र इन कणों को ध्रुवों की ओर मोड़ने में मदद करता है.
इसके बाद ये कण पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन और नाइट्रोजन जैसी गैसों से टकराते हैं. इस टक्कर के दौरान ऊर्जा निकलती है और आसमान में अलग-अलग रंगों की रोशनी दिखाई देने लगती है. इसी प्राकृतिक घटना को ऑरोरा कहा जाता है. ऑक्सीजन से आमतौर पर हरे और लाल रंग की रोशनी दिखाई दे सकती है, जबकि नाइट्रोजन की वजह से नीले और बैंगनी रंग भी नजर आते हैं. रंगों का यह खेल इस बात पर निर्भर करता है कि वायुमंडल में कौन-सी गैस मौजूद है और टक्कर कितनी ऊंचाई पर हो रही है. (AI इमेज)
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क्या ऑरोरा पृथ्वी के लिए खतरनाक है? ऑरोरा को देखने से इंसानों को कोई सीधा खतरा नहीं होता. लेकिन इसके पीछे होने वाला शक्तिशाली भू-चुंबकीय तूफान चिंता की वजह बन सकता है. ऐसे तूफान के दौरान पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में हलचल होती है. इसका असर उन तकनीकों पर पड़ सकता है, जिन पर आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी काफी हद तक निर्भर है. सैटेलाइट, GPS, रेडियो कम्युनिकेशन, बिजली के ग्रिड नेटवर्क, बहुत शक्तिशाली भू-चुंबकीय तूफान बिजली के बड़े नेटवर्क में गड़बड़ी पैदा कर सकता है. (AI इमेज)
क्या भारत में भी दिखाई दे सकता है ऑरोरा? आमतौर पर ऑरोरा पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के आसपास दिखाई देता है. इसकी वजह यह है कि पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र आवेशित कणों को इन क्षेत्रों की ओर ले जाता है. भारत में सामान्य परिस्थितियों में ऑरोरा दिखाई देने की संभावना बेहद कम है. लेकिन अगर सूरज से बहुत शक्तिशाली सौर तूफान आए, तो ऑरोरा अपनी सामान्य सीमा से काफी दूर तक फैल सकता है. ऐसी स्थिति में कम अक्षांश वाले क्षेत्रों में भी इसे देखने का मौका मिल सकता है. (AI इमेज)
पृथ्वी से देखने पर ऑरोरा आसमान में लहराती रंगीन रोशनी जैसा नजर आता है. लेकिन अंतरिक्ष से इसका नजारा और भी अद्भुत होता है. यह पृथ्वी के चारों ओर फैले हरे, लाल और बैंगनी रंग के चमकते पर्दों जैसा दिखाई देता है. ये रोशनी वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में सैकड़ों किलोमीटर तक फैली हो सकती हैं. अंतरिक्ष से देखने पर ऐसा लगता है जैसे पृथ्वी ने अपने चारों ओर रंगों की एक चमकदार चादर ओढ़ रखी हो. (AI इमेज)
कुल मिलाकर, ऑरोरा सिर्फ आसमान की खूबसूरती नहीं, बल्कि सूरज, पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र और वायुमंडल के बीच होने वाली एक विशाल प्राकृतिक प्रक्रिया का नतीजा है. यह हमें दिखाता है कि अंतरिक्ष में होने वाली हलचल का असर हमारी पृथ्वी और रोजमर्रा की तकनीक तक पहुंच सकता है.(AI इमेज)