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Badrinath Helicopter Crash: उत्तराखंड के चमोली में हुए भीषण हेलीकॉप्टर हादसे के मामले में अब जांच का दायरा और अधिक तेज हो गया है. दुर्घटनास्थल पर डीजीसीए और एएआईबी (AAIB) की एक्सपर्ट टीम के साथ यूकाडा (UCADA) के सीईओ प्रतीक जैन भी पहुंचे, जहां अभी तक हादसे का ब्लैक बॉक्स बरामद नहीं किया जा सका है. इस बीच, मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट और भारी बर्फबारी के बावजूद उड़ान की अनुमति दिए जाने को लेकर यूकाडा की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. हालांकि, सीईओ प्रतीक जैन का दावा है कि मौसम का जायजा लेने के बाद ही दोपहर में उड़ान की परमिशन दी गई थी.
खराब मौसम के बावजूद किसने दी हेलिकॉप्टर उड़ाने की परमिशन?
Joshimath Helicopter Crash: तो 6 लोगों की जान बच गई होती, अगर ट्रांस एविएशन की ओर से मौसम विभाग की चेतावनी को मान ली गई होती? क्या पैसों की लालच में पांच यात्रियों और पायलट की जान गई. ये सवाल अभी भी अबूझ पहले बने हुए हैं कि आखिर मौसम विभाग ने 48 घंटों का ऑरेंज अलर्ट जारी किया था. साथ ही पहाड़ों पर भारी बर्फबारी भी हो रही हैं. ऐसे में खराब मौसम को नजरअंदाज करते हुए किसने हेलिकॉप्टर उड़ाने की हरी झंडी दिखाई. इसका जवाब UCADA के सीईओ प्रतीक जैन के पास भी नहीं है.
चमोली में हुए इस दिल दहला देने वाले हेलीकॉप्टर हादसे की तह तक जाने के लिए शनिवार को दुर्घटनास्थल पर डीजीसीए (DGCA) और एएआईबी (AAIB) की विशेषज्ञ टीमों ने डेरा डाल दिया. इस दौरान चमोली जिला प्रशासन के साथ-साथ यूकाडा के सीईओ प्रतीक जैन भी खुद मौके पर मौजूद रहे. हादसे के असली कारणों और तकनीकी गड़बड़ी का सच सामने लाने के लिए आसपास के दुर्गम इलाकों की गहन रैकी की गई, लेकिन सबसे हैरानी की बात यह है कि अभी तक उस महत्वपूर्ण ‘ब्लैक बॉक्स’ का कोई सुराग नहीं मिल पाया है. जानकारों का मानना है कि जब तक ब्लैक बॉक्स हाथ नहीं लगता और उससे मिलने वाला डेटा सामने नहीं आता, तब तक इस खौफनाक दुर्घटना के पीछे का असली सच पर्दे के पीछे ही रहेगा.
प्रतिक जैन का अजीब तर्क
खराब मौसम और चेतावनी के बावजूद उड़ान भरने की अनुमति देने को लेकर चौतरफा घिर चुके यूकाडा के सीईओ प्रतीक जैन ने अपनी सफाई में अजीब तर्क दिए हैं. उनका कहना है कि उड़ान से पहले मौसम के अपडेट की पूरी मॉनिटरिंग की गई थी और यही वजह थी कि खराब मौसम के चलते सुबह से दोपहर 12 बजे तक किसी भी हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की परमिशन नहीं दी गई थी. जैन के मुताबिक, जब मौसम कुछ साफ हुआ तभी हरी झंडी दिखाई गई थी. हालांकि, जमीनी हालात और मौसम विभाग के भारी अलर्ट के बीच यह सफाई लोगों के गले नहीं उतर रही है और प्राधिकरण की कार्यशैली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रही है.
पैसों की लालच में गई जान
बहरहाल, लोगो के मन में यह टीस साफ तौर पर देखी जा रही है कि क्या प्रशासनिक लापरवाही और मुनाफे की भूख के चलते यह बड़ा हादसा हुआ है. जब तक ब्लैक बॉक्स बरामद नहीं होता और जांच एजेंसियां अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश नहीं करतीं, तब तक इन सवालों के घेरे में फंसे जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर बहस यूं ही जारी रहेगी. देखना यह होगा कि इस दर्दनाक हादसे के बाद शासन स्तर से ऐसे लापरवाह फैसलों पर अंकुश लगाने के लिए क्या कड़े कदम उठाए जाते हैं.