‘आपकी पत्‍नी का निधन हो गया है…’ च‍िट पढ़ी, जेब में रखी और कोर्ट में ज‍िरह करते रहे सरदार वल्लभभाई पटेल

‘आपकी पत्‍नी का निधन हो गया है…’ च‍िट पढ़ी, जेब में रखी और कोर्ट में ज‍िरह करते रहे सरदार वल्लभभाई पटेल


Last Updated:

वल्लभभाई पटेल की शादी 1893 में झवेरबा पटेल से हुआ था. उनकी बेटी मणिबेन पटेल का जन्म 1904 में और बेटे दह्याभाई पटेल का जन्म 1905 में हुआ था. 1909 में उनकी पत्नी झवेरबा का कैंसर की वजह से निधन हो गया था. पत्‍नी के न‍िधन के बाद वल्लभभाई ने आजीवन दूसरा विवाह नहीं किया था.

Zoom

सही मायने में लौह पुरुष थे सरदार वल्‍लभभाई पटेल.

अदालत में जज के सामने एक मामले को लेकर एक वकील ज‍िरह कर रहा था. तभी बाहर से एक शख्‍स आया और चुपचाप वकील के हाथ में एक चिट थमा दी. चिट पर कुछ ल‍िखा था. अदालत की कार्यवाही के बीच वकील ने वह संदेश पढ़ा, एक पल रुका और फिर से अपनी बहस शुरू कर दी. मुकद्दमा चलता रहा और आखिर में वह वकील मुकद्दमा जीत गया. लेकिन अदालत की कार्यवाही खत्‍म होने के जब उस च‍िट का राज खुला तो पता चला कि उस चिट में संदेश आया था, ‘आपकी पत्‍नी का निधन हो गया है…’ इस वकील का नाम था लौह पुरुष सरदार वल्‍लभभाई पटेल… देश के पहले गृह मंत्री और लौह पुरुष के नाम से मशहूर सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है. उन्होंने स्वतंत्र भारत के निर्माण में जो भूमिका निभाई, वह आज देश की नींव है.

जर्मनी के एकीकरण से बड़ा था पटेल का काम
सरदार पटेल ने अपने सहयोगियों के साथ 562 रियासतों को भारतीय संघ में शामिल कराने के लिए काम किया और आजादी के आसपास के मुश्किल दौर में देश की एकता मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई. बीबीसी की एक र‍िपोर्ट में सरदार पटेल के जीवन पर ल‍िखने वाले पीएन चोपड़ा उनकी जीवनी ‘सरदार ऑफ़ इंडिया’ में रूसी प्रधानमंत्री निकोलाई बुलगानिन के कहे शब्‍द ल‍िखते हैं, ‘आप भारतीयों के क्या कहने! आप राजाओं को समाप्त किए बिना रजवाड़ों को समाप्त कर देते हैं.’ बुलगानिन की नजर में पटेल की ये उपलब्धि बिस्मार्क के जर्मन एकीकरण की उपलब्धि से बड़ा काम था. मशहूर लेखक एच वी हॉडसन लॉर्ड माउंटबेटन को कहते बताते हैं, “मुझे ये कहने में कोई संकोच नहीं कि अच्छा हुआ नेहरू को नए गृह मंत्रालय का प्रमुख नहीं बनाया गया. अगर ऐसा होता तो सब कुछ बिखर जाता. पटेल ने, जो कि यथार्थवादी है, ये काम कहीं बेहतर ढंग से किया.’

सरदार वल्‍लभभाई पटेल का दिल्‍लीवाला घर आज तक स्‍मारक नहीं बन सका.

मोतीलाल नेहरू ने भी की थी तारीफ
उनकी राजनीति की बात करें तो पटेल की मत्यु से पहले और बाद में नेहरू छह बार कांग्रेस के अध्यक्ष बने जबकि सरदार पटेल को सिर्फ़ एक बार 1931 में कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया. इस दौरान मौलाना आजाद और मदनमोहन मालवीय जैसे नेता दो या उससे अधिक बार कांग्रेस अध्यक्ष बने. पटेल की जीवनी में राजमोहन गाँधी लिखते हैं, ‘1928 में बारदोली के किसान आंदोलन में पटेल की भूमिका के बाद पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष मोतीलाल नेहरू ने गाँधी को पत्र में लिखा, ‘इसमें कोई संदेह नहीं कि इस समय के हीरो वल्लभभाई हैं. हम उनके लिए कम से कम इतना तो कर ही सकते हैं कि उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष बना दें. अगर किन्हीं कारणों से ऐसा नहीं होता हैं तो जवाहरलाल हमारी दूसरी पसंद होने चाहिए.’

पहले बने डिस्ट्रिक्ट प्लीडर, फिर गए लंदन
31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में एक किसान परिवार में जन्‍म सरदार पटेल देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री बने. परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी. इस वजह से उन्होंने विश्वविद्यालय में महंगी पढ़ाई करने के बजाय ‘डिस्ट्रिक्ट प्लीडर’ की परीक्षा पास की थी, जिसके बाद उन्हें वकालत करने का अधिकार मिल गया था. अपने बड़े भाई विट्ठलभाई पटेल की मदद करने और अपना करियर आगे बढ़ाने के लिए अगस्त 1910 में वे इंग्लैंड गए. उन्होंने लंदन के मिडिल टेंपल इन में दाखिला लिया. वहां उन्होंने 36 महीने का कोर्स सिर्फ 30 महीने में पूरा किया और प्रथम श्रेणी में परीक्षा पास की थी.

वल्लभभाई पटेल वर्ष 1913 में भारत लौटे और अहमदाबाद में वकालत करने लगे. उनकी शादी 1893 में झवेरबा पटेल से हुआ था. उनकी बेटी मणिबेन पटेल का जन्म 1904 में और बेटे दह्याभाई पटेल का जन्म 1905 में हुआ था. साल 1909 में सरदार वल्लभभाई पटेल की पत्नी झवेरबा का कैंसर की वजह से निधन हो गया था. पत्‍नी के न‍िधन के बाद वल्लभभाई ने आजीवन दूसरा विवाह नहीं किया था.

(इनपुट एजेंसी से भी) 



Source link