बच्चों की मोबाइल या स्क्रीन देखने की लत एक बड़ी समस्या है. पर अक्सर कई माता-पिता इस बात पर संतुष्ट होते हैं कि उनके बच्चे स्क्रीन पर एजुकेशनल वीडिया या कुछ अच्छा ही देख रहे हैं. इससे वो सीखेंगे और चीजें समझ पाएंगे. छोटे बच्चों को तो पढ़ाने के लिए अक्सर टीवी पर कविताएं, रंग-बिरंगे एनिमेशन चला दिए जाते हैं. पर ऐसे एजुकेश्नल वीडियो देखकर बच्चा हर बार सीख रहा हो, ये जरूरी नहीं है. एक नई स्टडी में सामने आया है कि बच्चों का ध्यान शैक्षिक वीडियो में मौजूद पढ़ाई की सामग्री से ज्यादा उसके पीछे चल रही एनिमेटेड चीजों पर जाता है.
बच्चों का ध्यान पढ़ाई से ज्यादा एनिमेशन पर
इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) और सांता क्लारा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बच्चों के वीडियो देखने के तरीके पर एक स्टडी की. इसमें पता चला कि वीडियो में जितने ज्यादा हिलते-डुलते दृश्य होते हैं, बच्चे उसे उतनी ही देर तक देखते हैं. लेकिन उनका ध्यान वीडियो में पढ़ाई से जुड़ी बातों पर कम और पीछे चल रहे एनिमेशन पर ज्यादा रहता है. यानी बच्चा स्क्रीन को लगातार देख रहा है, इसका मतलब यह नहीं कि वह वीडियो में बताई जा रही बातें भी समझ रहा है.
इस स्टडी का नाम है ‘Attention Trap: How Visual Motion Shapes Children’s Screen Time and Engagement on Video Platforms’. यह ‘इनफॉर्मेशन सिस्टम रीसर्च’ नाम के जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन को ISB के प्रोफेसर सुमीत कुमार और मधु विश्वनाथन और सांता क्लारा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रवि बापना ने मिलकर किया है.
32 हजार से ज्यादा YouTube वीडियो देखे
रिसचरों ने बच्चों के वीडियो देखने के तरीके को समझने के लिए तीन तरीके अपनाए. सबसे पहले बच्चों के लिए बनाए गए 32 हजार से ज्यादा YouTube वीडियो का विश्लेषण किया गया. इसके बाद एक प्रयोग किया गया. साथ ही, 6 से 10 साल की उम्र के बच्चों की आंखों की गतिविधियों पर भी नजर रखी गई. इससे यह समझने की कोशिश की गई कि वीडियो देखते समय बच्चों की नजर स्क्रीन के किस हिस्से पर रहती है. वीडियो के विश्लेषण में पता चला कि अगर किसी वीडियो में विजुअल्स 10 प्रतिशत बढ़ा दिए जाएं, तो उसे देखने वालों की संख्या करीब 1.1 प्रतिशत बढ़ जाती है. यानी वीडियो में जितनी ज्यादा हलचल होती है, बच्चे उसे देखने में उतनी ही दिलचस्पी दिखाते हैं.
एनिमेशन बढ़ा तो वीडियो देखने वाले भी बढ़े
शोधकर्ताओं ने अपने प्रयोग में कुछ शैक्षिक वीडियो में अतिरिक्त एनिमेटेड बैकग्राउंड जोड़े. फिर देखा कि बच्चे किस तरह के वीडियो ज्यादा देखते हैं. नतीजों में पता चला कि बिना एक्स्ट्रा एनिमेशन वाले वीडियो के मुकाबले मध्यम स्तर की हलचल वाले वीडियो को देखने वालों की संख्या 1.6 प्रतिशत ज्यादा थी. वहीं, जिन वीडियो में ज्यादा हलचल थी, उन्हें देखने वालों की संख्या 2 प्रतिशत बढ़ गई. यानी रंग-बिरंगे और हिलते-डुलते दृश्य बच्चों को वीडियो देखने के लिए आकर्षित करते हैं. लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि वे पढ़ाई की बातें भी बेहतर तरीके से सीख रहे हैं.
स्टडी का सबसे दिलचस्प हिस्सा बच्चों की आंखों की गतिविधियों से जुड़ा था. शोधकर्ताओं ने देखा कि जिन वीडियो में एनिमेटिड बैकग्राउंड था, उन्हें देखते समय बच्चे कम बार स्क्रीन से नजरें हटाते थे. इस वजह से स्क्रीन देखने में उनका समय करीब 3.4 से 3.6 प्रतिशत बढ़ गया. लेकिन जब यह देखा गया कि बच्चे स्क्रीन पर आखिर किस चीज को देख रहे हैं, तो पता चला कि उनका ध्यान ज्यादातर हिलते-डुलते बैकग्राउंड पर था. वे वीडियो में समझाई जा रही पढ़ाई की बातों को उतनी तवज्जो नहीं दे रहे थे.
ISB में मार्केटिंग की एसोसिएट प्रोफेसर मधु विश्वनाथन का कहना है कि वीडियो में चलायमान दृश्यों का इस्तेमाल बच्चों को आकर्षित करने का अच्छा तरीका हो सकता है. लेकिन इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए.
इस स्टडी से माता-पिता और शिक्षकों को एक जरूरी बात समझने की जरूरत है. बच्चा अगर आधे घंटे तक कोई एजुकेशनल वीडियो देख रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं कि उसने आधे घंटे तक पढ़ाई भी की है. हो सकता है कि वह वीडियो में चल रहे मजेदार एनिमेशन और रंगों में ही उलझा रहा हो. इसलिए बच्चों के लिए वीडियो चुनते समय सिर्फ यह न देखें कि उसमें कितने अच्छे एनिमेशन हैं या बच्चा उसे कितनी देर तक देखता है. यह भी देखें कि वीडियो में समझाई जा रही बात कितनी साफ है और बच्चा उसे समझ पा रहा है या नहीं. जरूरत पड़ने पर बच्चे से वीडियो के बारे में सवाल पूछें. इससे अंदाजा लग सकता है कि उसने वीडियो से क्या सीखा.
(इनपुट एजेंसी से भी)