एक कदम से शुरू हुई कहानी, 108 साल में बनी साख! जानिए सेठ गोविंददास उत्तमचन्द श्राफ की पूरी दास्तान

एक कदम से शुरू हुई कहानी, 108 साल में बनी साख! जानिए सेठ गोविंददास उत्तमचन्द श्राफ की पूरी दास्तान


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108 Year Old Jewellery Shop: वर्ष 1908 में शुरू हुआ सेठ गोविंददास उत्तमचन्द श्राफ का व्यापार आज 108 वर्षों की गौरवशाली विरासत बन चुका है. पांच पीढ़ियों से बुरहानपुर में संचालित यह प्रतिष्ठान गुणवत्ता और भरोसे की पहचान है.

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108 Year Old Jewellery Shop: शहर की ऐतिहासिक व्यापारिक परंपरा में कुछ प्रतिष्ठान ऐसे हैं जिन्होंने अपनी गुणवत्ता ईमानदारी और ग्राहकों के विश्वास के दम पर एक अलग पहचान बनाई है. ऐसा ही एक प्रतिष्ठित नाम है सेठ गोविंददास उत्तमचन्द श्राफ. इस प्रतिष्ठान की शुरुआत वर्ष 1908 में हुई थी.अंग्रेजों के शासनकाल में शुरू हुआ सोने-चांदी के व्यापार का यह सफर आज 108 वर्षों की गौरवशाली विरासत बन चुका है.

पांचवीं पीढ़ी संभाल रही दुकान
लोकल 18 की टीम को डायरेक्टर उपेंद्र श्राफ समीर श्रॉफ ने बताया कि इस प्रतिष्ठान की कहानी संघर्ष मेहनत और विश्वास की मिसाल है. शुरुआती दौर में परिवार के सदस्य घर-घर जाकर सोने-चांदी के आभूषण और सामान बेचते थे. उस समय व्यापार के लिए न तो आज जैसी सुविधाएं थीं और न ही बाजार का इतना विस्तार था. इसके बावजूद परिवार ने अपनी मेहनत और ग्राहकों के प्रति ईमानदारी से कारोबार को आगे बढ़ाया. धीरे-धीरे लोगों का विश्वास बढ़ता गया और प्रतिष्ठान ने बुरहानपुर के सराफा बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना ली. इस विरासत को आगे बढ़ाने में राजेंद्र नारायणदास श्राफ, मंगलदास नारायणदास श्राफ और उपेंद्र नारायणदास श्राफ सहित परिवार की अलग-अलग पीढ़ियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है.

परिवार के सदस्यों ने समय के साथ व्यापार को आगे बढ़ाया, लेकिन गुणवत्ता और ग्राहकों के विश्वास से कभी समझौता नहीं किया. परिवार की चौथी पीढ़ी में कपिल कुमार श्राफ, शमीर श्राफ और रोहन श्राफ ने कारोबार की जिम्मेदारी संभालते हुए इस परंपरा को आगे बढ़ाया.वहीं पांचवीं पीढ़ी के तन्मय श्राफ भी इस गौरवशाली विरासत को नई सोच और दिशा देने में जुटे हैं.

108 साल पुरानी हैं दुकान
108 वर्षों बाद भी इस प्रतिष्ठान की सबसे बड़ी पूंजी ग्राहकों का अटूट विश्वास है. पीढ़ियां बदलती रहीं समय बदला और व्यापार के तरीके भी बदले, लेकिन खरे माल गुणवत्ता और पारंपरिक साख की पहचान बरकरार रही. यही वजह है कि सेठ गोविंददास उत्तमचन्द श्राफ का नाम आज भी बुरहानपुर की व्यापारिक विरासत में सम्मान के साथ लिया जाता है.108 वर्षों का अनुभव, पांच पीढ़ियों की मेहनत और ग्राहकों का अटूट भरोसा ही इस प्रतिष्ठान की सबसे बड़ी पहचान है.



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