सत्ता के साथ रहिए तो सम्मान, नहीं तो… अनंत सिंह के बेटे अभिषेक सिंह का फेसबुक पोस्ट, न्याय के तराजू के साथ उठाए सवाल

सत्ता के साथ रहिए तो सम्मान, नहीं तो… अनंत सिंह के बेटे अभिषेक सिंह का फेसबुक पोस्ट, न्याय के तराजू के साथ उठाए सवाल


पटना. दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने मोकामा विधायक अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है. अदालत ने बिहार पुलिस को चार महीने के भीतर मामले की जांच पूरी करने को भी कहा है. सर्वोच्च न्यायालय का यह आदेश पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान आया. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अनंत सिंह के राजनीतिक विरोधियों और समर्थकों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अनंत सिंह के रिश्ते और वर्तमान जेडीयू नेतृत्व के साथ उनकी अनबन की चर्चा है. वहीं, इसी कड़ी में अनंत सिंह के बेटे अभिषेक सिंह का सोशल मीडिया पर लिखा गया एक पोस्ट को भी मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम के संदर्भ में देखा जा रहा है.

अभिषेक सिंह ने अपनी पोस्ट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जिक्र करते हुए मोकामा की राजनीति में हुए हालिया घटनाक्रमों पर टिप्पणी की है. पोस्ट के साथ लगाई गई न्याय के तराजू की तस्वीर भी चर्चा में है. उन्होंने लिखा, “मोकामा की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम! माननीय मोकामा विधायक श्री अनंत सिंह जी को दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 1 दिसंबर 2026 तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है. साथ ही पुलिस को चार महीने के भीतर जांच पूरी करने का आदेश दिया गया है. सत्ता के साथ रहिए तो सम्मान, सवाल उठाइए तो कानून का ज्ञान!” खास बात यह कि उन्होंने अपने पोस्ट में न्याय के तराजू की इमोजी लगाई है.

मोकामा विधायक अनंत सिंह के बेटे अभिषेक सिंह का सोशल मीडिया पोस्ट.

सुप्रीम कोर्ट का सरेंडर आदेश

बता दें कि कि मोकामा विधायक अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है. साथ ही पुलिस को चार महीने के भीतर जांच पूरी करने का आदेश दिया गया है. दरअसल, दुलारचंद हत्याकांड वाला मामला मोकामा के पुराने चर्चित केस में से एक है. लेकिन, इससे पहले भी अनंत सिंह कई मामलों में जेल जा चुके हैं. मगर एमएलसी चुनाव नतीजों के बाद सुप्रीम कोर्ट से आए इस नए आदेश ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

बेटे अभिषेक सिंह का पोस्ट का मतलब क्या है?

अभिषेक सिंह ने अपने पोस्ट में लिखा है, सत्ता के साथ रहिए तो सम्मान, सवाल उठाइए तो कानून का ज्ञान. पोस्ट के साथ न्याय का तराजू की फोटो लगाई गई है. ऐसे में यह पोस्ट सीधे तौर पर मौजूदा राजनीतिक हालात पर टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है. मोकामा में इस पोस्ट के बाद सियासी चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह जदयू से निष्कासन और हाल के विवादों से जुड़ा है.

नीरज कुमार विवाद से निष्कासन तक

पटना ग्रेजुएट एमएलसी चुनाव के दौरान अनंत सिंह ने जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला था और उन्होंने जन सुराज के अनुज सिंह का समर्थन किया था. इस दौरान नीरज कुमार पर लगातार हमले किए. चुनाव के बीच संजय झा के बयान में ललन सिंह को अनंत सिंह से बात करने के लिए अधिकृत करने की बात सामने आई थी. विवाद बढ़ने के बाद जेडीयू ने अनंत सिंह को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था. इस बीच नीरज कुमार की जीत के बाद अनंत सिंह पर कार्रवाई को पार्टी नेतृत्व के बदले रुख और सख्ती के तौर पर देखा जा रहा.

न्याय के तराजू वाली फोटो का संदेश

वहीं, बेटे अभिषेक सिंह ने पोस्ट में जानबूझकर न्याय के तराजू की फोटो का इस्तेमाल किया है. हालांकि, पोस्ट में सीधे किसी पार्टी या नेता का नाम नहीं लिखा गया है, लेकिन राजनीति के जानकार इसे दो अर्थों में देख रहे हैं. पहला, न्याय प्रणाली पर भरोसा जताना और दूसरा, सत्ता और कानून के दोहरे मापदंड पर सवाल उठाना. सत्ता के साथ रहिए तो सम्मान, सवाल उठाइए तो कानून का ज्ञान, यह पंक्ति जहां जेडीयू से निष्कासन के बाद अनंत सिंह खेमे की नाराजगी को दिखा रही है. वहीं, सत्ता के साथ मिलने पर सारे गुनाहों पर पर्दा डाला जा सकता है, यह इस बात को भी दिखाता है.

मोकामा की राजनीति में आगे क्या?

मोकामा अनंत सिंह का गढ़ माना जाता है. सरेंडर आदेश के बाद अब देखना होगा कि अनंत सिंह कोर्ट में कब पेश होते हैं और पुलिस जांच किस दिशा में जाती है. फिलहाल बेटे अभिषेक सिंह का पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और मोकामा से पटना तक सियासी गलियारों में इसकी चर्चा हो रही है. दूसरी ओर, मोकामा की राजनीति में अब सवाल सिर्फ अनंत सिंह के अगले कदम का नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक प्रभाव और बदलते समीकरणों का भी है.



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