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विदेशी निवेशकों (FIIs) को भारत में निवेश के लिए SEBI ने बड़ा तोहफा दिया है. अब 8 साल तक KYC का झंझट नहीं होगा. यानी अब उन्हें बार बार केवाईसी नहीं कराना होगा. इतना ही नहीं, कंप्लायंस से जुड़े दोहराव वाले नियमों को खत्म कर दिया गया है, जिससे भारत में विदेशी निवेश करना अब और आसान हो जाएगा.
विदेशी निवेशकों के लिए सेबी ने लिया बड़ा फैसला.
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भारी बिकवाली ने शेयर मार्केट को टेंशन में डाल दिया है. बाजार से लाखों करोड़ रुपये निकालकर विदेशी निवेशक मानो गायब ही हो गए. इससे सभी प्रमुख सूचकांक लाल निशान में गोते लगाने लगे. सेबी ने कुछ कड़े नियम भी लगा रखे थे. इन कड़े नियमों के कारण विदेशी निवेशकों का भरोसा डगमगाने लगा था और वे अपना पैसा सुरक्षित व आसान बाजारों की ओर मोड़ रहे थे. लेकिन अब सेबी ने ऐसा फैसला ले लिया है कि विदेशी निवेशक वापस आने पर मजबूर हो जाएंगे.
विदेशी निवेशकों की सबसे बड़ी शिकायत केवाईसी (KYC) प्रक्रिया को बार-बार दोहराने की झंझट को लेकर थी, जिसे अब पूरी तरह से सुलझा लिया गया है. SEBI ने KYC रिव्यू की अवधि बढ़ा दी है, जिससे अब FPIs को बार-बार KYC कराने का झंझट नहीं उठाना पड़ेगा.
- कैटेगरी 1 के लिए जो रिव्यू पहले हर 1 साल में करना अनिवार्य था, उसे अब बढ़ाकर हर 2 साल कर दिया गया है.
- इसी तरह, कैटेगरी 2 के निवेशकों को पहले हर 3 साल में यह प्रक्रिया पूरी करनी होती थी, लेकिन अब उन्हें बहुत बड़ी राहत देते हुए इस अवधि को सीधे हर 8 साल कर दिया गया है.
- हालांकि, SWAGAT-FI कैटेगरी के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है, यानी उनके लिए यह अवधि पहले की तरह दस साल ही रहेगी.
कंप्लायंस में भी राहत
SEBI ने एक और नियम खत्म करते हुए निवेशकों को कंप्लायंस से जुड़ी बहुत बड़ी सहूलियत दी है. अब विदेशी निवेशकों को अपना रजिस्ट्रेशन जारी रखने के समय पहले दी गई जानकारी में बदलाव को लेकर अलग से कन्फर्मेशन देने की जरूरत अब नहीं होगी. इस नियम के खत्म होने से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का काफी समय और संसाधन बचेगा, जो वे पहले बार-बार एक ही जानकारी की पुष्टि करने वाली जटिल कानूनी प्रक्रियाओं में बर्बाद करते थे.