1 नवंबर से दिल्ली में ग्रैप-1-विंटर प्लान दोनों लागू, किसे मानना होगा
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दिल्ली में 1 नवंबर से विंटर एक्शन प्लान लागू होने जा रहा है. जबकि यहां पहले से ही ग्रैप-1 लागू है. ऐसे में सवाल है कि दिल्ली में 1 नवंबर से किसकी पाबंदियां लागू होंगी और कहां छूट मिलेगी? विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को दोनों योजनाओं के सभी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा. आइए जानते हैं कैसे?
दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप वन लागू, 1 नवंबर से विंटर एक्शन प्लान भी होगा लागू, किसकी पाबंदियां माननी होंगी. (PTI Photo)
दशहरा के तुरंत बाद खराब हुई हवा के बाद दिल्ली में सीएक्यूएम द्वारा ग्रैप स्टेज-1 लागू कर दिया गया है. दो दिन बारिश के बाद पर्यावरण साफ हुआ है और प्रदूषण स्तर कम हुआ है, लेकिन ग्रैप-1 की पाबंदियां अभी भी लागू हैं. इसके साथ ही 1 नवंबर से राजधानी में रेखा गुप्ता सरकार विंटर एक्शन प्लान की सख्त पाबंदियां भी लागू करने जा रही है. जिसमें 1 नवंबर से 28 फरवरी तक सख्त नियम लागू रहेंगे. ऐसे में लोगों में यह कन्फ्यूजन पैदा हो रहा है कि दिल्ली में एक्शन प्लान की पाबंदियां मानी जाएंगी या ग्रैप स्टेज-1 की?
लोग पूछ रहे हैं कि ग्रैप स्टेज-1 में दिल्ली में बीएस-4 कार ले जाने की मनाही नहीं है, जबकि विंटर एक्शन प्लान में दिल्ली के बाहर के नंबरों वाली सभी ऐसी गाड़ियों पर रोक रहेगी और इन्हें प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा. लिहाजा लोग जानना चाहते हैं कि दोनों में से कौन सा नियम लागू होगा और किसमें ज्यादा छूट मिलेगी?
ग्रैप-1 क्या है?
सबसे पहले बता दें कि ग्रैप एक ग्रेडेड प्लान है जो वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के आधार पर लागू होता है. स्टेज-1 तब लगता है जब एक्यूआई 201-300 (खराब श्रेणी) हो. इसमें खुले में कचरा-बायोमास जलाने पर रोक, होटल-रेस्तरां में कोयला-लकड़ी के तंदूर पर पाबंदी, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, पुरानी डीजल (10 साल से ज्यादा) और पेट्रोल (15 साल से ज्यादा) गाड़ियों की एंट्री पर रोक रहती है. दिल्ली से गुजरने वाले गैर-निर्धारित ट्रकों को बाईपास भेजना और केवल ईवी-सीएनजी-बीएस-6 इंटरस्टेट बसें अनुमति जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं. यह आपातकालीन उपाय हैं और एक्यूआई बिगड़ने पर इसके स्टेज-2, 3 या 4 तक अपडेट कर लगाए जा सकते हैं.
विंटर एक्शन प्लान क्या है?
दिल्ली सरकार का यह प्लान एक्यूआई पर निर्भर नहीं है. बल्कि सरकार ने इसे लंबी अवधि यानि चार महीनों के लिए बनाया है और उसी अवधि में यह लागू किया जाएगा. यह 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक तय कैलेंडर पर चलेगा. इसमें अतिरिक्त सख्ती दर्ज की गई हैं. जैसे सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम, अधिकृत पार्किंग शुल्क दोगुना (मेट्रो पार्किंग छूट), वैध पीयूसीसी के बिना ईंधन नहीं (‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’), दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड बीएस-6 से कम मानक वाले पेट्रोल-डीजल वाहनों पर 1 नवंबर से 31 जनवरी तक प्रवेश प्रतिबंध (सीएनजी-ईवी छूट), धूल पैदा करने वाले तोड़-फोड़ और बाहरी सिविल निर्माण पर 1 नवंबर-31 जनवरी रोक तथा 10 दिसंबर-20 जनवरी पूर्ण निर्माण प्रतिबंध आदि शामिल हैं.
कन्फ्यूजन कैसे दूर करें?
विशेषज्ञों की मानें तो दिल्ली में ये दोनों योजनाएं एक साथ लागू रहेंगी. जहां नियम ओवरलैप होंगे, वहां सख्त वाला नियम लागू होगा. विंटर प्लान से 1 नवंबर से वाहनों, निर्माण, पार्किंग और ऑफिस अटेंडेंस पर अतिरिक्त पाबंदियां जुड़ जाएंगी. ग्रैप-1 में कोई खास छूट नहीं है और विंटर प्लान भी छूट नहीं देता बल्कि अतिरिक्त नियंत्रण लगाता है. ऐसे में यात्रियों, निर्माण एजेंसियों और ऑफिसों को दोनों नियमों का पालन करना होगा. एक्यूआई बढ़ने पर ग्रैप और सख्त हो सकता है. आधिकारिक वेबसाइट या ट्रैफिक पुलिस सलाह देखकर ही किसी चीज का फैसला लें.