Binance में 6.3 अरब डॉलर की लगी सेंध तो भारत के क्रिप्टो एक्सचेंजों की क्यों अटक गई सांस?

Binance में 6.3 अरब डॉलर की लगी सेंध तो भारत के क्रिप्टो एक्सचेंजों की क्यों अटक गई सांस?


Binance क्रिप्टो की दुनिया में एक बड़ा नाम है. एक द‍िन पहले जब इस प्लेटफॉर्म पर 6.3 अरब डॉलर यानी करीब 56 हजार करोड़ रुपये की चोरी हुई तो पूरी इंडस्‍ट्री ह‍िल गई.पहले लगा क‍ि एक विदेशी कंपनी में सेंधमारी हुई है. लेकिन अब पता चल रहा क‍ि भारत तक इसकी आंच पहुंच सकती है. इसल‍िए भारत के क्रिप्टो एक्सचेंजों की सांस अटक गई है. वजह कई क्रिप्टो एक्सचेंज अपने फ्यूचर्स कारोबार के लिए Binance से मिलने वाली लिक्विडिटी पर निर्भर हैं. यानी Binance में परेशानी आती है, तो संकट आना तय है.

लिक्विडिटी मतलब किसी चीज को खरीदने या बेचने के लिए बाजार में पर्याप्त खरीदार और विक्रेता मौजूद हों. मान लीजिए आपके पास बिटकॉइन है और आप उसे तुरंत बेचना चाहते हैं. अगर बाजार में खरीदने वाले लोग मौजूद हैं, तो आपका सौदा जल्दी हो जाएगा. लेकिन अगर खरीदार ही नहीं हैं, तो आपको या तो इंतजार करना पड़ेगा या कम कीमत पर बेचना होगा. यही वजह है कि क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए लिक्विडिटी बहुत जरूरी होती है.

चढ़ने-ग‍िरने दोनों पर दांव लगाने का था मौका

फ्यूचर्स ट्रेडिंग में इसकी अहमियत और भी ज्‍यादा है. इसमें लोग केवल क्रिप्टो खरीदकर रखने का कारोबार नहीं करते, बल्कि कीमत बढ़ने और गिरने दोनों पर दांव लगा सकते हैं. इसके लिए एक्सचेंज को बड़ी संख्या में खरीद और बिक्री के ऑर्डर चाहिए. Binance जैसे बड़े प्लेटफॉर्म से मिलने वाली लिक्विडिटी इन ऑर्डरों को पूरा करने में मदद करती है. अगर यह सहारा अचानक कमजोर पड़ जाए, तो सौदे पूरे होने में परेशानी आ सकती है. खरीद और बिक्री की कीमतों में अंतर बढ़ सकता है और बाजार में उतार-चढ़ाव भी तेज हो सकता है.

Binance में चोरी कैसे हुई और कितना पैसा बचाया गया?

Moneycontrol की रिपोर्ट के मुताबिक, Binance से करीब 6.3 अरब डॉलर की क्रिप्टो संपत्ति चोरी हुई है. ब्लॉकचेन इंटेलिजेंस कंपनी TRM Labs ने इस हमले के पीछे उत्तर कोरिया के हैकर समूह TraderTraitor का हाथ होने की बात कही है. कंपनी का दावा है कि उसके पास इस निष्कर्ष के समर्थन में मजबूत ऑन-चेन और दूसरी खुफिया जानकारियां हैं. हालांकि, इस मामले की अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार है.

चोरी की पूरी रकम को हैकरों के हाथ में जाने से रोकने के लिए कई कंपनियों ने कदम उठाए. Tether ने 1.5 अरब डॉलर से ज्यादा के USDT टोकन फ्रीज किए. Circle ने करीब 80 करोड़ डॉलर के USDC को फ्रीज किया. Ripple और BitGo जैसी कंपनियों ने भी चोरी से जुड़े कुछ वॉलेट के टोकन रोकने की कार्रवाई की. इस तरह करीब 3 अरब डॉलर की संपत्ति सुरक्षित की गई. इसके अलावा Binance ने अपने स‍िक्‍योर एसेट फंड फॉर यूजर्स यानी SAFU फंड से करीब 1.17 से 1.2 अरब डॉलर का सुरक्षा कवच दिया है. कंपनी ने बाकी कमी को भी पूरा करने की बात कही है.

भारत में CoinDCX ने फ्यूचर्स कारोबार पर क्यों लगाई रोक?

इस घटना के बाद भारत में इसका असर दिखने लगा. CoinDCX ने अपने फ्यूचर्स कारोबार को अस्थायी रूप से Reduce-Only मोड में डाल दिया. इसका मतलब है कि ग्राहक अपनी पहले से खुली पोजिशन को कम या बंद कर सकते हैं, लेकिन नई पोजिशन नहीं खोल सकते और पुरानी पोजिशन का आकार भी नहीं बढ़ा सकते. हालांकि, कंपनी ने कहा कि प्लेटफॉर्म पर जमा और निकासी की सुविधा जारी है.

यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि इससे पता चलता है कि किसी बड़े वैश्विक एक्सचेंज में आई दिक्कत भारत के प्लेटफॉर्म तक पहुंच सकती है. Liminal के वरिष्ठ अधिकारी मनहर गरेग्राट ने Moneycontrol से कहा कि भारत के क्रिप्टो एक्सचेंजों का Binance से किसी न किसी रूप में जुड़ाव है. उनके मुताबिक, यह घटना कंपनियों की कारोबार जारी रखने की क्षमता और जोखिम प्रबंधन की परीक्षा है. उन्होंने यह भी कहा कि फ्यूचर्स जैसे कुछ उत्पादों के लिए Binance के विकल्प सीमित हैं.

एक दूसरे एक्सचेंज अधिकारी ने भी बताया कि भारतीय प्लेटफॉर्म Binance के पूल से API के जरिये लॉन्ग और शॉर्ट पोजिशन के लिए लिक्विडिटी लेते हैं. आसान भाषा में समझें तो भारतीय एक्सचेंज ग्राहक से ऑर्डर लेते हैं, लेकिन उस ऑर्डर को पूरा करने के लिए उन्हें बड़े वैश्विक बाजार की मदद की जरूरत पड़ सकती है. अगर वह बाजार अचानक उपलब्ध न हो, तो उनके अपने सिस्टम पर दबाव बढ़ सकता है.

क्या अब भारतीय निवेशकों का पैसा भी खतरे में है?

यहां दो अलग-अलग बातों को समझना जरूरी है. पहली, Binance में हुई चोरी और दूसरी, भारतीय एक्सचेंजों के कारोबार पर उसका असर. इन दोनों को एक जैसा नहीं माना जा सकता. Binance से चोरी होने का मतलब यह नहीं है कि CoinDCX, Mudrex या CoinSwitch के ग्राहकों का पैसा भी चोरी हो गया है. लेकिन अगर किसी भारतीय प्लेटफॉर्म की फ्यूचर्स ट्रेडिंग किसी बाहरी लिक्विडिटी प्रदाता पर बहुत ज्यादा निर्भर है, तो उस प्रदाता की समस्या से ट्रेडिंग सेवा प्रभावित हो सकती है.

निवेशकों के लिए असली सवाल यह है कि एक्सचेंज के पास अपना पर्याप्त रिजर्व है या नहीं, ग्राहक की संपत्ति कहां रखी जाती है, और किसी बाहरी कंपनी की सेवा बंद होने पर कारोबार कैसे जारी रहेगा. किसी एक्सचेंज का विज्ञापन, बड़ा यूजर बेस या लोकप्रिय होना अपने आप में सुरक्षा की गारंटी नहीं है. निवेशकों को यह भी देखना चाहिए कि प्लेटफॉर्म ग्राहक की क्रिप्टो संपत्ति को किस तरह सुरक्षित रखता है और निकासी में परेशानी आने पर उसकी नीति क्या है.

AI से बढ़ रहे साइबर हमले, क्रिप्टो एक्सचेंज क्यों बन रहे निशाना?

इस घटना ने एक और चिंता बढ़ाई है. अब साइबर हमले केवल पासवर्ड चुराने या किसी वेबसाइट को बंद करने तक सीमित नहीं हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से हमलावर ज्यादा तेजी से नकली पहचान, फिशिंग संदेश और तकनीकी हमले तैयार कर सकते हैं. क्रिप्टो एक्सचेंज उनके लिए खास निशाना हैं, क्योंकि डिजिटल संपत्ति एक बार गलत वॉलेट में पहुंच जाए तो उसे वापस लाना बेहद मुश्किल हो सकता है.

Binance से पहले Bitget में भी करीब 38.75 करोड़ डॉलर की सुरक्षा घटना सामने आई थी. इससे साफ है कि बड़े नाम वाले प्लेटफॉर्म भी साइबर जोखिम से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं. Binance की सह-संस्थापक और सह-CEO यी हे ने बताया कि एक्सचेंज ने जमा की सुविधा फिर शुरू कर दी है और निकासी सेवा तथा वॉलेट एड्रेस नियंत्रण को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है. कंपनी ने 48 घंटे में निकासी सेवा फिर शुरू करने की उम्मीद जताई थी.



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