पाकिस्तान में देश के पूर्व प्रधानमंत्री पर जो टॉर्चर हो रहा है, उसकी एक-एक डीटेल सुनकर रूह कांप जाती है. हाल ही में इस्लामाबाद से लेकर लाहौर तक हलचल मची हुई है क्योंकि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने शहबाज शरीफ सरकार और सेना प्रमुख असीम मुनीर पर बेहद खौफनाक आरोप लगाए हैं. पार्टी का दावा है कि जेल की चारदीवारी के भीतर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन को दिल का दौरा पड़ा है. हैरान करने वाली बात ये है कि जिस वक्त उन्हें जेल में डाला गया था, वो पूरी तरह से स्वस्थ थीं. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि पाकिस्तानी काल कोठरी अंदर इमरान खान के खानदान के साथ आखिर चल क्या रहा है?
कब और कैसे शुरू हुआ इमरान खान परिवार का ये चैप्टर?
बात सितंबर 2026 के आखिरी हफ्ते की है. पीटीआई के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और मार्च से ठीक पहले, पंजाब सरकार ने ‘मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर’ कानून का हवाला देकर इमरान खान की बहनों को उठा लिया.
- अलीमा खान: इन्हें 20 सितंबर 2026 को हिरासत में लिया गया.
- नोरीन नियाजी और डॉ उज्मा खान: इन्हें 21 सितंबर 2026 को पकड़ा गया.
इन तीनों बहनों को उठाकर लाहौर की बदनाम कोट लखपत जेल की काल कोठरी में ठूंस दिया गया. जेल के अंदर बुनियादी सुविधाओं के अभाव और मानसिक तनाव के चलते हाल ही में नोरीन नियाजी की तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें अस्पताल तक दौड़ाना पड़ा. और अब जो खबर सामने आई है, उसने पूरे देश में भूचाल ला दिया है—जेल के अंदर ही इमरान खान की बहन को गंभीर हार्ट अटैक आ गया.
पीटीआई के तीखे आरोप: ‘ये जेल नहीं, टॉर्चर सेल है’
इमरान खान के करीबी नेता डॉ. शहबाज गिल ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई बड़े खुलासे किए हैं, जिससे साबित होता है कि पाकिस्तान की जेलों में बदले की आग किस हद तक भड़क चुकी है. पीटीआई का साफ कहना है कि ये सामान्य कैद नहीं, बल्कि एक सोची-समझी क्रूरता है. पार्टी ने दिल दहला देने वाले आरोप लगाए हैं.
- सेहत पर सीधा अटैक: जो बहनें जेल जाने से पहले एकदम फिट थीं, उन्हें सलाखों के पीछे दिल का दौरा पड़ रहा है.
- इमरान खान की आंख की रोशनी पर संकट: पार्टी का दावा है कि खुद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल में जानबूझकर ऐसी स्थिति में रखा गया है कि उनकी सेहत दिन-ब-दिन गिरे. उनकी एक आंख की रोशनी जा चुकी है और गंभीर ब्लड प्रेशर की शिकायत होने के बावजूद उन्हें डॉक्टर या सही दवाइयां नहीं दी जा रही हैं.
- बुशरा बीबी की चुपके से सर्जरी: इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी की आंखों को भी जेल के अंदर भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके बाद उनकी सर्जरी करानी पड़ी. सबसे घटिया बात ये है कि इस पूरी मेडिकल प्रक्रिया के दौरान उनके परिवार को पूरी तरह अंधेरे में रखा गया.
- जेल में कार्यकर्ताओं की मौत: पीटीआई का दावा है कि अमानवीय टॉर्चर और इलाज न मिलने के कारण अब तक 12 से ज्यादा पार्टी कार्यकर्ताओं की मौत या तो जेल के अंदर हो चुकी है या फिर रिहाई के कुछ दिनों बाद उन्होंने दम तोड़ दिया.
क्या ये कानून है या इंतकाम की आग?
पाकिस्तान के इतिहास में सत्ता और सेना के खिलाफ आवाज उठाने वालों का क्या हस्र होता है, ये किसी से छिपा नहीं है. लेकिन इमरान खान के मामले में जो कुछ हो रहा है, वो लोकतंत्र के हर कायदे को तार-तार कर रहा है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शहबाज सरकार और सेना को अच्छी तरह पता है कि अगर इमरान खान और उनका परिवार बाहर आ गया, तो उनकी सत्ता की नींव हिल जाएगी. यही वजह है कि नेताओं को तो तोड़ा ही जा रहा है, साथ ही उनके घर की महिलाओं को भी जेल में डालकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है. इसे सीधे तौर पर ‘कैलकुलेटेड क्रूरता’ कहा जा रहा है.
मानवाधिकारों की धज्जियां और इंटरनेशनल कानून का मखौल
दुनियाभर के मानवाधिकार कानून और पाकिस्तान का अपना संविधान भी ये कहता है कि चाहे कैदी कोई आम अपराधी हो या राजनीतिक बंदी, उसे जीने का हक और समय पर इलाज पाने का पूरा अधिकार है. लेकिन कोट लखपत जेल में इन तमाम नियमों को कचरे के डिब्बे में डाल दिया गया है.
जब परिवार को बिना बताए मरीजों की सर्जरी कराई जाए, गंभीर बीमारियों को छिपाया जाए और स्वस्थ लोगों को हार्ट अटैक के मुहाने पर पहुंचा दिया जाए, तो इसे न्याय नहीं बल्कि तानाशाही का नंगा नाच कहा जाता है. मकसद साफ है, पूरे परिवार और पार्टी का मनोबल तोड़ देना.
जनता गुस्सा और आगे क्या होगा?
इमरान खान की बहन को हार्ट अटैक आने की खबर जैसे ही बाहर आई, पाकिस्तान की आम जनता और पीटीआई समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा है. सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक लोग सरकार और फौज के खिलाफ खुलकर भड़ास निकाल रहे हैं. जनता का कहना है कि जब देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवार की जान सलाखों के पीछे सुरक्षित नहीं है, तो आम आदमी की जिंदगी की क्या औकात रह गई है.
इमरान खान की बहन को जेल में दिल का दौरा पड़ना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि पाकिस्तान की राजनीति अब इंसानियत के दायरे से बाहर निकल चुकी है. कुर्सी की भूख में विरोधियों के परिवारों को इस तरह टॉर्चर करना लोकतंत्र के ताबूत में आखिरी कील ठोकने जैसा है. आने वाले दिनों में ये घटना पाकिस्तान की राजनीति में एक भयंकर तूफान लेकर आने वाली है, क्योंकि पीटीआई इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मंचों पर उठाकर सरकार हिलाने की तैयारी कर रही है.